पुरानी Delhi के Hauz Qazi में ढही इमारत से एक और शव बरामद, मरने वालों का आंकड़ा 7 पहुंचा

पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार के पास हौज काजी क्षेत्र में गिरी तीन मंजिला इमारत के मलबे से रविवार को 66 वर्षीय व्यक्ति का शव निकाला गया। हादसे के 70 घंटे बाद भी राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। मामले में पुलिस ने बिना नक्शा पास कराए निर्माण कराने के आरोप में मकान मालिक और तीन ठेकेदारों को गिरफ्तार किया है।
नयी दिल्ली, आठ नवंबर पुरानी दिल्ली के हौज काजी इलाके में तीन मंजिला इमारत ढहने की घटना में रविवार को मलबे से एक और शव बरामद होने के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। एक अधिकारी ने बताया कि हादसे के 70 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी बचाव अभियान जारी है। मृतक की पहचान बिहार के दरभंगा निवासी 66 वर्षीय लुचहुमन मुखिया के रूप में हुई है।
उनका शव चावड़ी बाजार के पास ढही इमारत के मलबे में चलाए जा रहे तलाश एवं बचाव अभियान के दौरान बरामद किया गया। शव को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल ले जाया गया है। इसके साथ अब तक मलबे से सात शव निकाले जा चुके हैं।
बचावकर्मी मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के दबे होने की आशंका के मद्देनजर तलाश अभियान चला रहे हैं। यह इमारत पांच नवंबर को सुबह करीब नौ बजकर 45 मिनट पर उस समय ढह गई थी, जब उसमें निर्माण कार्य चल रहा था। हादसे के बाद से 70 घंटे से अधिक समय से बचाव अभियान जारी है।
पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान संजीत कुमार, किशोरी साह, पंकज शर्मा, विपिन राम, शांतु, दिनेश साह और लुचहुमन मुखिया के रूप में हुई है। इनमें से चार बिहार के रहने वाले थे, जबकि विपिन राम दिल्ली के मंडावली इलाके में रहते थे। इस घटना के सिलसिले में इमारत के मालिक सईमुल्लाह उर्फ अयूब और तीन ठेकेदारों सिराज, ताजुद्दीन तथा फरकान को गिरफ्तार किया गया है।
ठेकेदारों को फरीदाबाद के सिरोही से पकड़ा गया। इस मामले में पांच नवंबर को हौज काजी पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 105 (गैर इरादतन हत्या), 290 (इमारतों को गिराने या उनकी मरम्मत के संबंध में लापरवाहीपूर्ण आचरण), 125(ए) (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कृत्य) और 3(5) (साझा मंशा) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप है कि 50 वर्गमीटर के भूखंड पर आवश्यक मंजूरी लिए बिना इमारत का निर्माण कराया जा रहा था।
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के एक अधिकारी ने बताया कि इस इमारत का कोई भवन नक्शा स्वीकृत नहीं किया गया था। आरोप है कि 50 वर्ग मीटर के भूखंड पर आवश्यक मंजूरी के बिना इमारत का निर्माण कराया जा रहा था। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने कहा था कि इस इमारत के निर्माण के लिए कोई भवन योजना मंजूर नहीं की गई थी।
नगर निगम के अनुसार, इमारत का निर्माण तीसरी मंजिल तक पहुंच गया था और छत की स्लैब डालने का काम चल रहा था, तभी वह ढह गई।
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