ICU Bed Management में गड़बड़ी पर Delhi High Court सख्त, 38 Govt Hospitals में NextGen HMIS लागू करने का निर्देश

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अभिनय आकाश । Aug 13 2026 6:38PM

ऑडिट में पाया गया कि ज़्यादातर मामलों में स्टेट हेल्थ डेटा मैनेजमेंट पोर्टल पर दिखाए गए खाली ICU बेड की संख्या असल उपलब्धता से मेल खाती थी। हालांकि, कुछ अस्पतालों में अंतर पाया गया, जिसे अधिकारियों ने वेबसाइट अपडेट होने के बाद हुए एडमिशन और ट्रांसफर का नतीजा बताया। कोर्ट को यह भी बताया गया कि ICU बेड की उपलब्धता को अभी अस्पताल मैन्युअल रूप से अपडेट करते हैं, जो औसतन दिन में तीन बार किया जाता है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह 38 सरकारी अस्पतालों में ICU बेड मैनेजमेंट और NextGen ई-हॉस्पिटल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) को लागू करने में आ रही कमियों को दूर करने के लिए तय समय-सीमा के भीतर कदम उठाए। यह निर्देश नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) के अचानक किए गए ऑडिट के बाद दिया गया, जिसमें इमरजेंसी रिस्पॉन्स और अस्पताल के IT इंफ्रास्ट्रक्चर में कमियां पाई गई थीं। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने NIC की विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट की समीक्षा की। यह ऑडिट 13 से 24 जुलाई के बीच किया गया था, जो दिल्ली के अस्पतालों में HMIS के इस्तेमाल में असमानताओं को लेकर कोर्ट की पिछली चिंताओं के बाद किया गया था। ऑडिट में यह जांचा गया कि क्या ऑनलाइन दिखाई जा रही ICU बेड की उपलब्धता असल स्थिति से मेल खाती है, क्या ICU बेड के लिए आने वाली इमरजेंसी कॉल्स का जवाब दिया जा रहा है, और क्या सभी 38 अस्पतालों में NextGen HMIS को एक समान तरीके से लागू किया जा रहा है।

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ऑडिट में पाया गया कि ज़्यादातर मामलों में स्टेट हेल्थ डेटा मैनेजमेंट पोर्टल पर दिखाए गए खाली ICU बेड की संख्या असल उपलब्धता से मेल खाती थी। हालांकि, कुछ अस्पतालों में अंतर पाया गया, जिसे अधिकारियों ने वेबसाइट अपडेट होने के बाद हुए एडमिशन और ट्रांसफर का नतीजा बताया। कोर्ट को यह भी बताया गया कि ICU बेड की उपलब्धता को अभी अस्पताल मैन्युअल रूप से अपडेट करते हैं, जो औसतन दिन में तीन बार किया जाता है। ऑडिट में यह भी पाया गया कि ICU बेड के लिए मदद मांगने वाली इमरजेंसी कॉल्स का कुछ मामलों में तो ठीक से जवाब दिया गया, लेकिन कुछ अस्पतालों के नंबरों पर कोई जवाब नहीं मिला। संबंधित अस्पताल अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई और सुधार के उपाय करने की सलाह दी गई।

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अस्पतालों के बीच NextGen HMIS के लागू होने के तरीके में भी काफी अंतर पाया गया। जहाँ 18 अस्पताल सिस्टम के 10 से ज़्यादा मॉड्यूल का इस्तेमाल कर रहे थे, वहीं बाकी 20 अस्पताल सिर्फ़ 5 से 10 मॉड्यूल का इस्तेमाल कर रहे थे। NIC ने सुझाव दिया कि सभी अस्पतालों को तुरंत ज़रूरी मॉड्यूल अपना लेने चाहिए और उनका इस्तेमाल करना चाहिए। अस्पताल-वार ऑडिट के अनुसार, कई कमियाँ स्टाफ़ और तकनीकी कर्मचारियों की कमी, अपर्याप्त कंप्यूटर सिस्टम और IT इंफ़्रास्ट्रक्चर, और लीज़्ड-लाइन कनेक्टिविटी न होने से जुड़ी थीं। हाई कोर्ट ने GNCTD के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सेक्रेटरी को निर्देश दिया कि वे ऑडिट की विस्तृत रिपोर्ट सभी 38 अस्पतालों को भेजें और उनकी राय लें। सेक्रेटरी को एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है जिसमें कमियों को दूर करने के लिए उठाए जा रहे कदमों और उन्हें लागू करने की समय-सीमा का ज़िक्र हो। NIC टीम को सभी 38 अस्पतालों का एक और औचक निरीक्षण करने की भी अनुमति दी गई है।

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