Delhi High Court पहुंचा Connaught Place का रेस्तरां मालिक, प्रदर्शन से हुए नुकसान पर मांगा मुआवजा

कनॉट प्लेस के एक रेस्तरां संचालक ने विरोध-प्रदर्शनों से हुए नुकसान के मुआवजे और सेंट्रल पार्क में अनधिकृत सभाओं पर रोक लगाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रस्तावित कार्यक्रम को रोकने की मांग की है। उच्च न्यायालय ने इस याचिका को संबंधित मामलों के साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
एक रेस्तरां मालिक ने चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के कारण हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि CJP को शुक्रवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में कोई कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति न दी जाए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे और संजय शर्मा की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि इस मामले को इससे जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध किया जाए। अधिवक्ता उमंग त्यागी ने खंडपीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया। यह याचिका वकील उमंग त्यागी, संयम दहिया और जुबेर अली के माध्यम से दायर की गई है। इसमें बताया गया है कि याचिकाकर्ता आयुष चोपड़ा का परिवार 01.07.2017 से नई दिल्ली के कनॉट प्लेस में 'मीनार रेस्टोरेंट' चला रहा है, जो सेंट्रल पार्क से लगभग 700 मीटर की दूरी पर स्थित है। कहा गया है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक ने लोगों से 16.10.2026 को शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में इकट्ठा होने की अपील की है।
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याचिकाकर्ता ने दो राहतें मांगी हैं: पहली, संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वे इस जमावड़े या कनॉट प्लेस मार्केट में किसी भी अन्य अनधिकृत विरोध-प्रदर्शन या सभा की अनुमति न दें और इसे रोकें, क्योंकि इससे याचिकाकर्ता और अन्य दुकानदारों को भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने यह भी मांग की है कि 10.10.2026 के आंदोलन के दौरान याचिकाकर्ता और अन्य प्रभावित लोगों को हुए नुकसान का आकलन किया जाए और जिम्मेदार लोगों से उन्हें मुआवजा दिलाया जाए। याचिकाकर्ता ने इस आधार पर राहत मांगी है कि प्रस्तावित जमावड़े का कोई कानूनी आधार नहीं है। सेंट्रल विस्टा और उसके आसपास विरोध प्रदर्शनों को 28.04.2022 के 'स्टैंडिंग ऑर्डर' (स्थायी आदेश) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। यह आदेश 'मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जारी किया गया था। इसमें विरोध प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर को एक जगह के रूप में तय किया गया था, जिसके लिए नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त (DCP) के पास कम से कम दस दिन पहले आवेदन करना जरूरी था। साथ ही, वहां विरोध प्रदर्शन का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच सीमित रखा गया था। हालांकि, 11.10.2026 को जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन की सूची से हटा दिया गया और प्रदर्शन के लिए तीन अन्य जगहों को तय किया गया। सेंट्रल पार्क को कभी भी विरोध प्रदर्शन की जगह के रूप में नहीं चुना गया है; न ही इसके लिए कोई अनुमति मांगी गई है।
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कार्यक्रम से दो दिन पहले शाम 5 बजे के लिए यह बुलावा दिया गया था, जबकि उस जिले में 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा (प्रतिबंधात्मक आदेश) लागू है। यह भी बताया गया है कि इस तरह के जमावड़े से कनॉट प्लेस के व्यापारियों पर बुरा असर पड़ेगा। संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) और 21 के तहत उनके अधिकार भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितना कि इकट्ठा होने का अधिकार। कनॉट प्लेस, जिसे अक्सर दिल्ली का दिल कहा जाता है, भारत के सबसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में से एक है। इसके अलावा, दिल्ली की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र पर टिकी है, जिसमें व्यापार, होटल और रेस्तरां का योगदान 'ग्रॉस स्टेट वैल्यू एडेड' (GSVA) के नौवें हिस्से से भी अधिक है। अभी नवरात्रि से लेकर दिवाली तक का त्योहारी सीजन चल रहा है।
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