कोरोना महामारी के चलते दिल्ली मेट्रो का बुरा हाल, पहली बार किस्त देने में असमर्थ

DMRC

कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 22 मार्च को दिल्ली मेट्रो को बंद करने का आदेश जारी किया था, जिससे पिछले 123 दिनों में दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) को करीब 1200 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है।

नयी दिल्ली। लाखों लोगों को जाम से बचाने और उन्हें उनके गंतव्य स्थान तक सही सलामत और समय पर पहुंचाने वाली मेट्रो आज खुद एक समस्या से जूझ रही है। पिछले दो दशक में यह पहली बार देखा गया है कि दिल्ली मेट्रो लोन की किस्त चुकाने में असमर्थ हो। दिल्ली मेट्रो ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वह इस बार के भुगतान को फिर से निर्धारित कर अगले साल के लिए टाल दें।

डीएमआरसी को हुए 1200 करोड़ का नुकसान

कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 22 मार्च को दिल्ली मेट्रो को बंद करने का आदेश जारी किया था, जिससे पिछले 123 दिनों में दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) को करीब 1200 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। 

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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मेट्रो का संचालन नहीं होने की वजह से डीएमआरसी ने पिछले चार महीने में किसी भी प्रकार का यात्री राजस्व नहीं कमाया है। हालांकि वह अपने 10 हजार कर्मचारियों को समय पर वेतन दे रहा है। सूत्रों ने बताया कि डीएमआरसी कुछ और समय तक बिना राजस्व के काम कर सकता है मगर उसकी सबसे बड़ी समस्या कर्ज का भुगतान करना है। जो पिछले चार महीने से बंद मेट्रो की वजह से नहीं हो पा रहा है।

अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक डीएमआरसी को जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) से 1.2 से 2.3 फीसदी की ब्याज दर पर लोन प्राप्त हुआ है। यह 10 वर्षों की अधिस्थगन के साथ 30 वर्षों के लिए है। इस लोन को भारत सरकार ने जेआईसीए से दिल्ली मेट्रो परियोजना के लिए लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक डीएमआरसी को पहले चरण का निर्माण कार्य शुरू करने से एक साल पहले सन 1997 में पहली किस्त मिली जिसका पुनर्भगतान 2007 में शुरू हुआ था। बता दें कि अभी तक दिल्ली मेट्रो ने 3337 रुपए चुकाए हैं। 

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DMRC को वित्त वर्ष 2020-21 में ऋण के लिए केंद्र को 1,242.8 करोड़ रुपए का भुगतान करना आवश्यक है। जिसमें 434.1 करोड़ रुपए ब्याज और 808.7 करोड़ रुपए मूलधन के हैं। जबकि डीएमआरसी ने ब्याज के तौर पर महज 79.2 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।

अगर हम साल 2018-19 की बात करें तो डीएमआरसी ने यात्री किराये से 3,121 रुपए और 594 करोड़ रुपए विज्ञापन और किराये की दुकानों से कमाए हैं। हालांकि पिछले एक साल में मेट्रो नेटवर्क का व्यापक विस्तार नहीं हो पाया है और रोजाना 30 लाख लोगों ने मेट्रो की सवारी की है। ऐसे में यह माना जा सकता है कि 22 मार्च तक डीएमआरसी रोजाना 10 करोड़ रुपए कमा रही थी। 

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कमाई पर पड़ेगा असर

अगर केंद्र सरकार मेट्रो के संचालन की इजाजत दे भी देती है तो उसके लिए गाइडलाइन्स जारी करेगी। जिसमें सामाजिक दूरी का भी उल्लेख होगा। ऐसे में मेट्रो अपनी तय क्षमता के मुताबिक यात्रियों के साथ अपने गंतव्य स्थान पर नहीं जा सकेगी। जिसका असर रोजाना की होने वाली कमाई पर पड़ेगा।

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