सत्ता व संगठन में संतुलन बनाने की कोशिशों के बीच भाजपा हिमाचल में उभरने लगे मतभेद

सत्ता व संगठन में संतुलन बनाने की कोशिशों के बीच भाजपा हिमाचल में उभरने लगे मतभेद

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नडडा के ही गृह क्षेत्र में इन दिनों पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। यही वजह है कि पिछले 15 दिनों में सत्ता में वापसी व उपचुनावों में जीत के लिये भाजपा के राष्ट्रीय नेता शिमला व धर्मशाला में दो बार मात्थापच्ची कर चुके हैं।

शिमला। हिमाचल प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होंगे व इससे पहले अगले माह एक लोकसभा व दो विधानसभा क्षेत्रों में उप चुनाव होने जा रहे हैं जिससे सत्तारूढ दल भाजपा एकाएक चुनावी मोड में आ गया है। शिमला से लेकर धर्मशाला तक जारी बैठकों के बीच पार्टी में मतभेद भी उभर कर सामने आ रहा है। जिससे पार्टी के अंदर पनप रही बैचेनी साफ महसूस की जा सकती है। 

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नडडा के ही गृह क्षेत्र में इन दिनों पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। यही वजह है कि पिछले 15 दिनों में सत्ता में वापसी व उपचुनावों में जीत के लिये भाजपा के राष्ट्रीय नेता शिमला व धर्मशाला में दो बार मात्थापच्ची कर चुके हैं। लेकिन चुनाव किस तरह व किस का चेहरा आगे कर के जीता जाएगा। इस को लेकर न तो कोई सहमति बन पाई न ही फैसला हो पाया है।

शिमला में भाजपा की कोर समिति की बैठक में पार्टी के प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना के अलावा पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह ने शिरकत की। इस बैठक में खुलकर कुछ विधायकों ने मौजूदा मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की मनमानियों के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुये संगठन मंत्री पवन राणा को लेकर भी शिकायत की। पार्टी के ओबीसी नेता व विधायक रमेश धवाला तो मीडिया में भी अपनी बात को लेकर सामने आये। आम तौर पर इस तरह की बैठकों में प्रदेश में राष्ट्रीय पदाधिकारी कम ही आते हैं। लेकिन इस बार ऐसा हो रहा है तो पार्टी में सब ठीक होने के दावों की पोल भी खलने लगी है।

दरअसल भाजपा के प्रदेश प्रभारी खन्ना का झुकाव पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की ओर ज्यादा था। ऐसे में संतुलन बनाने के लिए संभवत: सौदान सिंह को भी बुलाया गया हो। वजह जो भी हो लेकिन इसके बाद भी पार्टी ने सार्वजनिक तौर अपने पत्ते नहीं खोले और न ही उस रणनीति का खुलासा किया जिसके तहत पार्टी चुनाव जीतना चाहती है। 

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हैरानी की बात है कि इस कोर समिति की बैठक के महज दस दिन बाद धर्मशाला में कार्यकारी समूह की बैठक बुला ली गई। हालांकि भाजपा में इस नाम की कोई कमेटी होती ही नहीं। धर्मशाला में बैठक के अंदर चुनिंदा लोगों को ही आने दिया गया भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप की ओर से कहा गया कि यह वर्किंग ग्रुप की बैठक है। इस बैठक में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह तो आए ही उनके अलावा राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष भी धर्मशाला पहुंच गए। दिलचस्प तौर पर इन बैठकों से जगत प्रकाश नड्डा दूर ही रहे। हिमाचल उनका गृह राज्य है लेकिन जिस तरह का घमासान पार्टी के भीतर चल रहा है उससे वे भी हैरान बताये जा रहे हैं।

निसंदेह हिमाचल में सरकार व संगठन में अब दो ध्रुव हो गए है। एक तरफ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर है जबकि दूसरी ओर उनके समानांतर पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को खड़ा कर दिया गया है। इसके अलावा संगठन भी जयराम व धूमल खेमे में बंट गया है। पार्टी में अंदरखाने यह साफ हो गया है कि आगामी उप चुनाव हों या 2022 के विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बूते जीत पाना आसान नहीं है।

हालांकि धूमल को आगे कर जीत निश्चित ही होगी यह भी कहा नहीं जा सकता। अगर तमाम नेता एकजुट हो जाएं तो संभव है कि पार्टी को कुछ लाभ मिल सके। एकजुट होकर काम करना होगा। ऐसे में लंबे अरसे तक हाशिए पर रखे गए धूमल को जयराम से भी बड़ा नेता बताने की कोशिशें इन बैठकों में की गई। यह अपने आप में आश्चर्यजनक था। इस दौरान धूमल को ही मुख्यमंत्री बनाने की अटकलें भी लग र्गइं और आलाकमान की ओर से इन अटकलों पर किसी ने विराम तक नहीं लगाया। भाजपा का एक खेमा अभी भी यह मान कर चल रहा है कि प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है। केन्द्रिय मंत्री अनुराग ठाकुर भी एकाएक सक्रिय हो गये हैं। 

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गौरतलब यह है कि हिमाचल में दिसंबर 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं जबकि जिला शिमला में जुब्बल कोटखाई और कांगड़ा में फतेहपुर विधानसभा और मंडी संसदीय हलके के उपचुनाव 12 अगस्त तक कराए जाने हैं। भाजपा में अंदरखाने चले रहे घमासान की वजह से अनिश्चितता का माहौल है।





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