DMK leader TKS Elangovan ने कहा, केंद्र मौजूदा Lok Sabha seat पर महिला आरक्षण लागू करे

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द्रविड़ मुनेत्र कषगम के वरिष्ठ नेता टीकेएस एलंगोवन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह संसद में सीटों की संख्या बढ़ाए बिना मौजूदा क्षमता पर ही महिला आरक्षण व्यवस्था लागू करे। उन्होंने कहा कि सीट विस्तार के नाम पर इसमें देरी करना महिलाओं का अपमान है। इसके साथ ही द्रमुक नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर वादाखिलाफी करने का आरोप भी लगाया।

(16 अगस्त को प्रादे90 फाइल में प्रसारित खबर के इंट्रो में नाम में सुधार के साथ पुनः जारी) चेन्नई, 18 अगस्त द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के वरिष्ठ नेता टीकेएस एलंगोवन ने लोकसभा में सीट संख्या बढ़ाकर महिला आरक्षण लागू करने में हो रही देरी को महिलाओं का “अपमान” बताते हुए कहा कि केंद्र को सदन में मौजूदा सीट संख्या के आधार पर ही महिला आरक्षण लागू करना चाहिए। एलंगोवन ने रविवार को ‘पीटीआई-वीडियो’ से बातचीत में महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर लोगों को “धोखा देने” का आरोप भी लगाया। द्रमुक नेता ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पहले कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने पेश किया था और उस समय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसका विरोध किया था।

रविवार को ‘पीटीआई-भाषा’ की प्रसारित खबर में टीकेएस एलंगोवन का नाम त्रुटिवश ईवीकेएस एलंगोवन लिखा गया था। एलंगोवन ने तमिलनाडु में तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के नेतृत्व वाली सरकार के पहले 100 दिनों के कार्यकाल के प्रदर्शन की भी आलोचना की। उन्होंने लोकसभा सीट संख्या बढ़ाने के साथ 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को जोड़ने के केंद्र के तर्क की आलोचना की।

एलंगोवन ने कहा, “उन्हें (केंद्र सरकार को) मौजूदा सीट पर ही महिला आरक्षण लागू करना चाहिए।” उन्होंने सीट संख्या बढ़ाने में हो रही देरी को “महिलाओं का अपमान” बताया।द्रमुक नेता ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साधते हुए टीवीके सरकार के पहले 100 दिनों के कथित खराब प्रशासनिक प्रदर्शन की आलोचना की और इसे “शून्य” बताया। एलंगोवन ने आरोप लगाया कि टीवीके सरकार ने केवल मौजूदा योजनाओं के नाम बदलने का काम किया है। एलंगोवन ने कहा, “उनकी एकमात्र विचारधारा हर तरह से द्रमुक पर हमला करने की है।” एलंगोवन ने मुख्यमंत्री विजय के सरकार के खिलाफ साजिश को नाकाम करने के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार के पास पूर्ण बहुमत नहीं है और वह उन दलों पर काफी निर्भर है, जिन्होंने द्रमुक के साथ गठबंधन के तहत चुनाव जीता था।

उन्होंने आगाह किया कि अगर सरकार अपने वादे पूरे करने में विफल रहती है, तो सहयोगी दल अपना समर्थन वापस ले सकते हैं।

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