Explained: क्या है E20 पेट्रोल विवाद? Rahul Gandhi ने 'पेट्रोल चोरी' के लगाए आरोप, जानें तेल कंपनियों ने सफाई में क्या कहा

शनिवार को 'X' पर एक पोस्ट में, गांधी ने दावा किया कि एक मान्यता प्राप्त लैब में जांचे गए 14 नमूनों में से 11 में 20% से ज्यादा इथेनॉल पाया गया। केंद्र सरकार के इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम पर तंज कसते हुए गांधी ने कहा, "E20 बन गया 420 - जनता की गाड़ियों से पेट्रोल की चोरी!" उन्होंने सरकारी और निजी, दोनों तरह की तेल कंपनियों पर तय सीमा से ज्यादा इथेनॉल मिलाने का आरोप लगाया और उनकी जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
देश में केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी 'इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम' (Ethanol Blending Programme) को लेकर एक नया और बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रमुख तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और केंद्र सरकार पर पेट्रोल में तय सीमा (20%) से कहीं अधिक इथेनॉल मिलाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने इस पूरे मामले को जनता की जेब पर डाका करार देते हुए तंज कसा कि "E20 बन गया 420 - जनता की गाड़ियों से पेट्रोल की चोरी!"
राहुल गांधी ने कर्नाटक के सात जिलों से लिए गए ईंधन के नमूनों (Fuel Samples) की स्वतंत्र लैब जांच का हवाला देते हुए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है और इस नीति की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
शनिवार को 'X' पर एक पोस्ट में, गांधी ने दावा किया कि एक मान्यता प्राप्त लैब में जांचे गए 14 नमूनों में से 11 में 20% से ज्यादा इथेनॉल पाया गया। केंद्र सरकार के इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम पर तंज कसते हुए गांधी ने कहा, "E20 बन गया 420 - जनता की गाड़ियों से पेट्रोल की चोरी!" उन्होंने सरकारी और निजी, दोनों तरह की तेल कंपनियों पर तय सीमा से ज्यादा इथेनॉल मिलाने का आरोप लगाया और उनकी जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। गांधी के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के नमूनों में इथेनॉल की मात्रा क्रमशः 31.2% और 30.5% पाई गई। ये नमूने कर्नाटक के सात जिलों - बेंगलुरु, कोलार, चिक्काबल्लापुरा, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु से लिए गए थे।
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गांधी ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), नायरा एनर्जी और शेल (Shell) का भी जिक्र किया, जिनके ईंधन के नमूनों की जांच की गई थी। उन्होंने दावा किया कि इन कंपनियों की अपनी लैब ने नमूनों में मौजूद इथेनॉल की मात्रा का खुलासा नहीं किया। उन्होंने कहा, "मोदी जी, हमें बताइए - देश की गाड़ियों के टैंक में क्या डाला जा रहा है? पेट्रोल में असल में कितना इथेनॉल है? 20% से ज्यादा इथेनॉल मिलाने वाली कंपनियों पर कब कार्रवाई होगी? और बहस की चुनौती अभी भी कायम है। इसमें एक और मुद्दा जोड़ लीजिए - आपकी नीतियों से असल में किसे फायदा हो रहा है?"
तेल कंपनियों ने कर्नाटक की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए
ये दावे ऐसे समय में सामने आए हैं जब कर्नाटक सरकार और तेल कंपनियों के बीच राज्य के रिटेल आउटलेट्स पर बिकने वाले पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा को लेकर विवाद चल रहा है। कर्नाटक के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिज़वान अरशद ने पहले कहा था कि बेंगलुरु स्थित NABL-मान्यता प्राप्त और ISO-प्रमाणित 'श्रीराम रिसर्च इंस्टीट्यूट' द्वारा किए गए परीक्षणों में, कई नमूनों (सैंपल्स) में इथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत की सीमा से अधिक पाई गई। राज्य सरकार ने बताया कि इन नमूनों को शुरुआत में IOCL और BPCL की अपनी प्रयोगशालाओं (इन-हाउस लैब्स) में भेजा गया था, लेकिन उनकी रिपोर्ट में इथेनॉल की मात्रा का खुलासा नहीं हुआ। इसके बाद सरकार ने स्वतंत्र जांच कराने का फैसला किया।
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कंपनियों ने आरोपों पर जवाब दिया
सार्वजनिक क्षेत्र की तीन तेल विपणन कंपनियों (ऑयल मार्केटिंग कंपनियों) — IOCL, BPCL और HPCL — ने पेट्रोल में इथेनॉल की अत्यधिक मात्रा मिलाने के कर्नाटक सरकार के निष्कर्षों पर सवाल उठाए हैं। कंपनियों का कहना है कि ये दावे निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत किए गए परीक्षणों से साबित नहीं होते हैं। एक संयुक्त बयान में, कंपनियों ने कहा कि कर्नाटक सहित पूरे देश में सप्लाई किया जाने वाला E20 पेट्रोल, 'ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स' (BIS) के मानक IS 17021 के अनुरूप है। उन्होंने अक्टूबर 2026 की जांच प्रक्रिया के दौरान अपनाए गए सैंपलिंग (नमूने लेने की) तरीके पर चिंता जताई। कंपनियों का दावा है कि इस प्रक्रिया में उनके प्रतिनिधि शामिल नहीं थे, और उन्हें न तो 'रिटेंशन सैंपल' (सुरक्षित रखे गए नमूने) मिले, न ही आउटलेट-वार विवरण या पूरी प्रयोगशाला रिपोर्ट दी गई।
कंपनियों ने कर्नाटक सरकार द्वारा पेश किए गए थर्ड-पार्टी प्रयोगशाला प्रमाणपत्रों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इन प्रमाणपत्रों में इथेनॉल की मात्रा की पुष्टि के लिए जरूरी परीक्षण विधियों (टेस्टिंग मेथड्स) के बारे में तकनीकी विवरण नहीं दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि निर्धारित दस्तावेजों और नमूनों के बिना, इन निष्कर्षों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती।
कंपनियों ने सालाना 62,000 करोड़ रुपये के माइलेज नुकसान और 39,000 करोड़ रुपये के वाहन मरम्मत खर्च के अनुमानों को खारिज कर दिया। उनका कहना है कि इन आंकड़ों को साबित करने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी आधार की आवश्यकता है। उन्होंने सैंपलिंग के पूरे रिकॉर्ड की मांग की है। साथ ही, उन्होंने राज्य सरकार के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में किसी अधिकृत प्रयोगशाला में स्वतंत्र जांच के लिए 'काउंटरपार्ट सैंपल' (समान नमूने) उपलब्ध कराने की भी मांग की है। E20 ईंधन पर बहस से वाहनों की अनुकूलता (compatibility) को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
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इस विवाद ने इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल की गुणवत्ता और भारतीय सड़कों पर चलने वाले वाहनों के साथ इसकी अनुकूलता को लेकर फिर से चिंताएं बढ़ा दी हैं। E20 पेट्रोल का मतलब है ऐसा ईंधन जिसमें पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिला होता है। केंद्र सरकार ने आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने, उत्सर्जन घटाने और घरेलू इथेनॉल उत्पादकों को समर्थन देने के उद्देश्य से इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दिया है।
हालांकि, इथेनॉल की अधिक मात्रा का ईंधन दक्षता (fuel efficiency) और वाहनों के पुर्जों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चिंताएं जताई गई हैं। यह चिंता खासकर उन वाहनों के लिए है, जिन्हें ऐसे मिश्रण के हिसाब से डिज़ाइन नहीं किया गया है। कर्नाटक सरकार ने उन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है जो तय सीमा से अधिक इथेनॉल वाला पेट्रोल सप्लाई कर रही हैं। साथ ही, सरकार ने ईंधन स्टेशनों पर इथेनॉल की मात्रा के बारे में जानकारी देने में अधिक पारदर्शिता बरतने को कहा है। इस विवाद के कारण केंद्र सरकार के इथेनॉल-मिश्रण कार्यक्रम की भी नए सिरे से जांच-परख शुरू हो गई है, जिसमें ईंधन की गुणवत्ता, टेस्टिंग की प्रक्रियाओं और उपभोक्ता सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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