आंतरिक मामलों में दखल की साजिश? ED ने पकड़ी 1.5 Million Dollar की संदिग्ध फंडिंग ट्रेल

ED
ANI
अभिनय आकाश । Nov 7 2026 3:46PM

प्रवर्तन निदेशालय ने भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने और संदिग्ध विदेशी फंडिंग के आरोप में दो विदेशी संस्थाओं के खिलाफ जांच शुरू की है। यह मामला लगभग 14.1 करोड़ रुपये के लेन-देन से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि जर्मनी, लिथुआनिया, कनाडा और यूके की कंपनियों के जरिए यह रकम भारत भेजी गई थी।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दो विदेशी संस्थाओं के खिलाफ जांच शुरू की है। इन पर संदिग्ध विदेशी फंडिंग और भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिशों का आरोप है। यह जांच लगभग 1.5 मिलियन डॉलर (करीब 14.1 करोड़ रुपये) के लेन-देन से जुड़ी है। एजेंसी को शक है कि यह रकम कई देशों से होते हुए भारत में कुछ संगठनों और व्यक्तियों तक पहुंचाई गई थी। जांचकर्ताओं को संदेह है कि पैसे के स्रोत और उसके लेन-देन को छिपाने के लिए कई चरणों में फंड ट्रांसफर किए गए। इस संदिग्ध फंडिंग ट्रेल में सेंट किट्स एंड नेविस, लिथुआनिया, यूके और कनाडा में रजिस्टर्ड कंपनियां, और जर्मनी का एक ट्रस्ट शामिल है। भारतीय एजेंसियां ​​अब इन लेन-देनों की जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि फंड सीमाओं के पार कैसे गया और अंत में इसे किसे मिला।

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ED ने 1 मिलियन डॉलर की फंडिंग ट्रेल का पता लगाया, जो जर्मनी के एक ट्रस्ट से जुड़ी है


जांच के अनुसार, सेंट किट्स एंड नेविस में रजिस्टर्ड कंपनी 'TCC डिजिटल मार्केट्स लिमिटेड' को 1 मिलियन डॉलर की फंडिंग का स्रोत माना गया है। ED ने इस पैसे के असली स्रोत का पता जर्मनी के 'डॉ. मैथियास कार्ल वोग्ट ट्रस्ट' (Dr Matthias Karl Vogt Trust) के रूप में लगाया है। एजेंसी को संदेह है कि जर्मन ट्रस्ट ने सबसे पहले यह रकम लिथुआनिया की कंपनी 'XBase डिजिटल UAB' को ट्रांसफर की। जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि इस रास्ते का इस्तेमाल जर्मन कानूनों से बचने और फंड के लेन-देन का पता लगाना मुश्किल बनाने के लिए किया गया था।

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संदिग्ध विदेशी फंडिंग यूके तक कैसे पहुंची


ED को संदेह है कि पैसे को उसकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए दुबई और लिथुआनिया के रास्ते हवाला चैनलों और डिजिटल एसेट्स का इस्तेमाल किया गया। जांच में पता चला है कि सेंट किट्स एंड नेविस की कंपनी ने बाद में यह फंड एक ब्रिटिश कंपनी को 'ग्रांट' (अनुदान) के रूप में दो अलग-अलग किश्तों में ट्रांसफर किया। जांचकर्ताओं ने कनाडा में रजिस्टर्ड कंपनी 'ZBase डिजिटल इंक' से जुड़े 500,000 डॉलर के एक और ट्रांसफर का भी पता लगाया है। यह रकम फरवरी 2026 में उसी ब्रिटिश कंपनी के खाते में भेजी गई थी। इन दोनों संदिग्ध लेन-देनों की कुल रकम 1.5 मिलियन डॉलर (लगभग 14.1 करोड़ रुपये) है। जांच के हिस्से के रूप में, भारतीय एजेंसियां ​​'एयरवॉलेक्स' (Airwallex) के साथ मिलकर इन लेन-देनों के विवरण की पुष्टि कर रही हैं।

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