न्यायपालिका की साख को लेकर सवाल उठाना गंभीर चिंता का विषय, मेरी राय में यह लोकतंत्र के हित में नहीं: गहलोत

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अनुसार लोकतंत्र व संविधान तभी निर्विघ्न व निर्बाध काम करते हैं जबकि लोगों की संवैधानिक संस्थानों में आस्था हो।
जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने न्यायपालिका की साख को लेकर उठाए जा रहे सवालों को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए बुधवार को कहा कि यह लोकतंत्र के हित में नहीं है। गहलोत ने इस बारे में किए ट्वीट में कहा,‘‘हाल ही में कुछ प्रतिष्ठित वकीलों व बुद्धिजीवियों ने न्यायपालिका की साख को लेकर सवाल उठाए हैं जो कि हम सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय है। मेरी राय में यह लोकतंत्र के हित में नहीं है।’’
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गहलोत के अनुसार लोकतंत्र व संविधान तभी निर्विघ्न व निर्बाध काम करते हैं जबकि लोगों की संवैधानिक संस्थानों में आस्था हो। मुख्यमंत्री ने एक ट्वीट में लिखा है,‘‘देश के उच्चतम न्यायालय को भारतीय संविधान का संरक्षक व अभिभावक माना जाता है। लोग न्यायपालिका को बड़े विश्वास से देखते हैं और उनकी इसमें बड़ी आस्था है।
पूरे देश में सर्वोच्च न्यायालय को संविधान का रक्षक माना जाता है। न्यायपालिका का देश में सर्वोच्च सम्मान है। हाल ही में देश के जाने माने वकीलों व बुद्धिजीवियों द्वारा उसकी विश्वसनीयता पर प्रश्चिन्ह लगाया जाना सभी के लिए चिन्ता का विषय है। यह लोकतंत्र के हित में नहीं है।
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) August 19, 2020
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