मोदी के फैसले के साथ 5 कांग्रेसी सांसद? UPI पर चिदंबरम ने राहुल को फंसाया?

Congress
ANI
अभिनय आकाश । Sep 18 2026 1:04PM

राहुल गांधी यूपीआई पर एमडीआर लागू करने को मोदी टैक्स बताकर सरकार का विरोध कर रहे हैं। हालांकि, संसदीय समिति की रिपोर्ट में पी चिदंबरम सहित कांग्रेस के वरिष्ठ सांसदों ने बिना किसी असहमति के इसका समर्थन किया था। समिति ने यूपीआई के बुनियादी ढांचे और साइबर सुरक्षा को मजबूत रखने के लिए इस व्यवस्था की सिफारिश की थी।

डिजिटल इंडिया की रीड बन चुके यूपीआई को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस का डबल गेम एक्सपोज हुआ है जिसके खुलासे ने पूरे देश को हैरान परेशान कर दिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सुबह से शाम तक घर से लेकर बाहर तक यह ढोल पीट रहे हैं कि मोदी सरकार यूपीआई पर 0.4% का एमडीआर थोपकर आम जनता की जेब पर डाका डाल देगी। जनता को महंगाई से और मार देगी। सरकार अमेरिका के दबाव में काम कर रही है। उसके आगे घुटने टिक रही। राहुल गांधी सोशल मीडिया पर अपनी दादी इंदिरा गांधी की दुहाई दे देकर प्रधानमंत्री मोदी की रीड की हड्डी पर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन यूपीआई पर चिल्लाने वाले राहुल गांधी को किसी और ने नहीं बल्कि उनके अपने ही सांसदों ने पूरी तरह फंसा दिया है। क्या आप जानते हैं कि जिस यूपीआई एमडीआर के फैसले को राहुल गांधी मोदी टैक्स बताकर देश को गुमराह कर रहे हैं। उसी व्यवस्था को जल्द से जल्द लागू करने की सिफारिश किसी और ने नहीं बल्कि खुद कांग्रेस के दिग्गज सांसदों के जरिए की गई। 

इसे भी पढ़ें: 'वोट चोरी के बाद अब पार्टी चोरी': TMC विवाद पर Rahul Gandhi का Election Commission पर हमला


मतलब जब बैठक हुई तो कांग्रेस के सांसद उस बैठक में रजामंदी दिखाते हुए नजर आए। जिसका बाहर आकर विरोध कर रहे हैं, उसका अंदर समर्थन किया गया था  पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम से लेकर मनीष तिवारी और गौरव गोगोई जैसे कांग्रेस के पांच दिग्गजों ने संसदीय समिति की रिपोर्ट पर सहमति बताई। बिना किसी असहमति के यूपीआई पर एमडीआर लागू करने की वकालत दी। लेकिन अब वही कांग्रेस बाहर आकर यूपीआई पर जहर उगल रहा है। सिर्फ मकसद मोदी को निशाना बनाना है। राहुल गांधी जनता को गुमराह कर शोर मचा रहे हैं। आखिर संसद समिति के उस रिपोर्ट का क्या सच है जिसने राहुल गांधी के दोहरे चरित्र की धज्जियां उड़ा कर रख दी है। कांग्रेसियों को बेनकाब कर दिया है। चलिए आज परते खोलते हैं और कांग्रेस को ही बेनकाब कर देते हैं। 

इसे भी पढ़ें: TMC सिंबल विवाद पर Rahul Gandhi का आरोप, BJP और चुनाव आयोग मिलकर छीन रहे दलों के चिह्न
क्या है पूरा मामला


कहानी की शुरुआत 12 अगस्त को देश की संसद में पेश हुए वित्त संबंधी स्थाई समिति की उस सनसनीखेज रिपोर्ट से होती है। जिसने कांग्रेस पार्टी के दोहरे रवैया की पोल खोल कर रख दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी सांसद भृतु हरी मेहताब की अध्यक्षता वाली इस उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में साफ शब्दों में कहा था कि भारत में यूपीआई और रूप के बढ़ते इस्तेमाल को बनाए रखने के लिए अब एक स्थाई राजस्व मॉडल यानी एमडीआर की सख्त जरूरत है। समिति ने सिफारिश की थी कि यूपीआई इकोसिस्टम को मजबूती देने के लिए टियर आधारित एमडीआर व्यवस्था को बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए। इस कहानी में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस संसदीय समिति में कांग्रेस पार्टी के पांच-पांच बड़े और कद्दावर सांसद शामिल थे। जिसमें देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोर लाल और के गोपीनाथ के नाम दर्ज हैं। जब यह रिपोर्ट मंजूर हुई तो संसद के पटल पर जब रखी गई तब इन कांग्रेसी नेताओं ने एक शब्द भी असहमति पर दर्ज नहीं कराया। यानी बंद कमरे में कांग्रेस के नेता मोदी सरकार के इस कदम को पूरी तरह जायज ठहरा रहे थे। मतलब चुप्पे साध कर बैठे थे। विरोध नहीं किया था। यह रिपोर्ट के मुताबिक साफ-साफ कहा जा रहा है क्योंकि आपत्ति होती तो विरोध भी करते, इसे आगे बढ़ने से रोकते भी, शोर भी मचाते लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जैसे ही यह फैसले लागू होने की बारी आई तो राहुल गांधी सड़क पर आकर राजनीति का ड्रामा रचने लगे। अपने सांसदों से नहीं पूछ रहे हैं कि बैठक में क्या हुआ, कैसे हुआ? विरोध क्यों नहीं किया गया? लेकिन बाहर आकर माहौल मोदी सरकार के खिलाफ बना दिया है। प्रधानमंत्री मोदी पर तीखे हमले शुरू कर दिए गए हैं। 


राहुल क्यों हैं इतने हमलावर


राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बिना देरी करते हुए एक वीडियो जारी कर यूपीआई एमडीआर फ्रेमवर्क को मोदी टैक्स करार दिया और इसे तुरंत वापस लेने की मांग कर डाली। राहुल गांधी ने सरकार पर अमेरिका के आगे घुटने टेकने का बचकाना आरोप लगाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अपनी दादी इंदिरा गांधी का भी किस्सा सुना दिया। राहुल गांधी ने लिखा जब उनसे पूछा गया था कि वो वामपथंत की ओर झुकती है या फिर दक्षिण पंत की ओर तो उनका जवाब था कि वो ना बाई और झुकती है और ना दाई और बल्कि सीधी खड़ी रहती है। राहुल नए-नए आरोप लगाकर मोदी सरकार के इस फैसले पर जमकर चिल्ला रहे हैं। लेकिन देश की जनता आज राहुल गांधी से पूछ रही है कि जब आपकी पार्टी के पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम खुद संसद के रिपोर्ट के समर्थन में खड़े थे, चुप्पी साथ बैठे थे, विरोध नहीं कर रहे थे तो फिर राहुल गांधी किस आधार पर इसे मोदी टैक्स बताकर चिल्ला रहे हैं? 


संसदयी समिति की रिपोर्ट क्या कहती है?


रिपोर्ट के मुताबिक 2026 के बजट में मोदी सरकार ने यूपीआई और रुपए पर जीरो एमडीआर नीति से पैदा होने वाले भारी भरकम नुकसान की भरपाई के लिए 2000 करोड़ का प्रावधान किया था। रिपोर्ट के मुताबिक यूपीआई के हर महीने 150 अरब तक ट्रांजैक्शन करने और 60 करोड़ नए यूज़र्स जोड़ने का अनुमान है। इतने विशाल नेटवर्क को चलाने की जो वास्तविक लागत आती है सरकार की 2000 करोड़ की प्रोत्साहन राशि उस लागत का केवल 11% और संभावित एमडीआर संग्रह का महज 14स ही कवर कर पाती है। समिति ने इसे एक खतरनाक स्ट्रक्चर फंडिंग गैप यानी वित्तीय खाई बता दिया और इसलिए इस व्यवस्था की सिफारिश की थी ताकि सरकारी खजाने पर दबाव ना पड़े। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि अगर पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर जैसे बैंक और पेमेंट्स ऐप को सही फंड नहीं मिला तो यूपीआई की साइबर सिक्योरिटी धोखाधड़ी रोकने का इंतजाम और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में नया निवेश पूरी तरह ठप हो जाएगा। और इसी साइबर क्राइम से जनता को बचाने के लिए सरकारी खजाने को बचाने के लिए संतुलित एमडीआर व्यवस्था की सिफारिश कांग्रेस सांसदों ने भी की थी। 

All the updates here:

अन्य न्यूज़