Mohan Bhagwat Birthday: पशु चिकित्सक से RSS Chief बनने तक ऐसा रहा मोहन भागवत का सफर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत आज यानी की 11 सितंबर को अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। वह करीब 16 सालों से ज्यादा समय से संघ के मार्गदर्शक और दर्शनीक के रूप में शीर्ष पर है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत आज यानी की 11 सितंबर को अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। वह करीब 16 सालों से ज्यादा समय से संघ के मार्गदर्शक और दर्शनीक के रूप में शीर्ष पर है। बता दें कि एमएस गोलवलकर के बाद मोहन भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीसरे सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रमुख हैं। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर मोहन भागवत के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में 11 सितंबर 1950 को मोहन भागवत का जन्म हुआ था। उनका बचपन नागपुर में बीता था। वहीं शिक्षा पूरी करने के बाद मोहन भागवत ने पशु चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई की। फिर बाद में उन्होंने अपना पूरा समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यों को समर्पित कर दिया।
संघ से जुड़े
संघ से जुड़ने के बाद मोहन भागवत ने संगठन की तमाम जिम्मेदारियों को संभाला। स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अलग-अलग दायित्व निभाते हुए संगठन के कामकाज और विस्तार को बेहद करीब से समझा। इसी लंबे संगठनात्मक अनुभव के आधार पर मोहन भागवत धीरे-धीरे संघ के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गए।
संभाली RSS की कमान
वहीं साल 2009 में मोहन भागवत को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सरसंघचालक चुना गया। उन्होंने के. एस सुदर्शन के बाद संघ प्रमुख का दायित्व संभाला था। इसके बाद भागवत लगातार संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व की भूमिका में सक्रिय रहे हैं। सरसंघचालक के रूप में मोहन भागवत के कार्यकाल के दौरान संघ की गतिविधियों का विस्तार विभिन्न क्षेत्रों में भी हुआ। उन्होंने संगठनात्मक विषयों के अलावा सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी राय रखी है।
मोहन भागवत के सार्वजनिक संबोधनों में राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता और भारतीय संस्कृति जैसे विषय प्रमुखता से सामने आते रहे। संघ प्रमुख के रूप में मोहन भागवत संगठन के कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच संवाद पर भी लगातार जोर देते रहते हैं।
समय-समय पर मोहन भागवत देश के सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार व्यक्त करते हैं। वह सामाजिक एकता और समरसता जैसे विषयों में शामिल रहे हैं। भागवत समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सहयोग और संवाद को राष्ट्र निर्माण के लिए अहम बताते हैं।
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