Ethanol विवाद के बीच Bihar पहुँचे Nitin Gadkari, E-20 ईंधन से वाहनों को नुकसान के दावे करने वालों की कर दी खिँचाई

Nitin Gadkari
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पटना में ‘बिहार इन्वेस्टर समिट 2026 : द इमर्जिंग इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन ऑफ इंडिया’ का उद्घाटन करने पहुंचे गडकरी ने कहा कि देश की प्रमुख वाहन कंपनियां अपने वाहनों को शत-प्रतिशत एथनॉल से चलाकर परीक्षण कर चुकी हैं और इस संबंध में कोई शिकायत सामने नहीं आई है।

एथनॉल को लेकर देश में चल रही बहस के बीच जब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी आज बिहार पहुंचे, तो वहां भी उनसे वही सवाल किया गया जो इन दिनों देशभर में उनसे पूछा जा रहा है। उनसे पूछा गया कि क्या पेट्रोल में एथनॉल मिलाने से वाहनों को नुकसान पहुंच रहा है? गडकरी ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि एथनॉल मिश्रित पेट्रोल से वाहनों को नुकसान पहुंचने की बात तथ्यों पर आधारित नहीं है।

हम आपको बता दें कि पटना में ‘बिहार इन्वेस्टर समिट 2026 : द इमर्जिंग इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन ऑफ इंडिया’ का उद्घाटन करने पहुंचे गडकरी ने कहा कि देश की प्रमुख वाहन कंपनियां अपने वाहनों को शत-प्रतिशत एथनॉल से चलाकर परीक्षण कर चुकी हैं और इस संबंध में कोई शिकायत सामने नहीं आई है। गडकरी ने कहा, ‘‘संबंधित विभाग का मंत्री होने के नाते मैं जानता हूं कि सभी प्रमुख वाहन कंपनियों ने अपने वाहनों को 100 प्रतिशत एथनॉल के जरिये चलाकर भी देखा है और कोई शिकायत सामने नहीं आई है।’’

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उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2022 से करीब चार करोड़ चार-पहिया और 20 करोड़ दोपहिया वाहन एथनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल कर रहे हैं। गडकरी ने कहा कि यदि एथनॉल से वाहनों को नुकसान हो रहा है तो कोई सामने आकर इसकी शिकायत करके दिखाए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एथनॉल मिश्रण की नीति केवल पेट्रोल में एक और ईंधन मिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कृषि को ऊर्जा और बिजली क्षेत्र से जोड़ने की बड़ी रणनीति है। उनके मुताबिक इससे किसानों के लिए आय के नए रास्ते खुल रहे हैं और आने वाले समय में किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि ऊर्जादाता भी बन सकते हैं।

गडकरी ने कहा कि भारत करीब 22 लाख करोड़ रुपये मूल्य के पारंपरिक ईंधन का आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने से आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों के कारोबार पर इसका असर पड़ सकता है, वे स्वाभाविक रूप से एथनॉल नीति को लेकर चिंतित हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि मक्के से एथनॉल बनाने और उसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने के फैसले से बिहार और उत्तर प्रदेश के किसानों की अतिरिक्त आय में करीब 45,000 करोड़ रुपये तक की वृद्धि हुई है। गडकरी ने सवाल उठाया कि किसानों के हित में आय बढ़ाना उन लोगों के हित साधने से बेहतर नहीं है, जिनसे भारत ईंधन आयात करता है?

गडकरी ने भविष्य के ईंधन और तकनीक का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार नए विकल्पों पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि धान की भूसी से विमान ईंधन तैयार करने की दिशा में भी काम हुआ है। उनके मुताबिक आने वाला समय नवाचार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान का है और बिहार जैसे राज्यों को इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। बिहार की संभावनाओं पर बात करते हुए गडकरी ने पर्यटन और स्थानीय उत्पादों को निवेश का बड़ा आधार बताया। उन्होंने मखाने का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार में बड़े पैमाने पर उत्पादित होने वाले इस उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी मांग है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार के नई ऊंचाइयों पर पहुंचने की उम्मीद जताते हुए गडकरी ने राज्य में निवेश की संभावनाओं पर जोर दिया। वहीं चौधरी ने निवेशकों से साफ शब्दों में कहा— ‘‘बिहार में विश्वास करें और बिहार में निर्माण करें।''

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