Global Hunger Index: क्या भारत में सच में भुखमरी बढ़ी है या रिपोर्ट ही भरोसे के लायक नहीं?

Global Hunger Index: क्या भारत में सच में भुखमरी बढ़ी है या रिपोर्ट ही भरोसे के लायक नहीं?

क्या भारत में भुखमरी बढ़ी है या इंडेक्स भरोसे के लायक नहीं? भूख और कुपोषण पर नजर रखने वाली वैश्विक भुखमरी सूचकांक की वेबसाइट पर 14 अक्टूबर को बताया गया कि चीन, ब्राजील और कुवैत सहित अठारह देशों ने पांच से कम के जीएचआई स्कोर के साथ शीर्ष स्थान साझा किया है।

वर्ष 2021 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स के मुताबिक भारत भुखमरी के मामले में विश्व के 116 देशों में 101वें नंबर पर है। पिछले वर्ष भारत इसमें 94वें नंबर पर था। इस इंडेक्स का ये दावा है कि भारत इस मामले में अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश भी भारत से अच्छी स्थिति में हैं। यानी इस साल भारत की रैकिंग गिरी है। भारत उन 31 देशों में भी शामिल है जहां पर भुखमरी की समस्या गंभीर मानी गई है। रिपोर्ट कहती है भारत में कोवि़ड 19 महामारी के दौरान लगे प्रतिबंधों का लोगों पर गंभीर असर पड़ा है। रिपोर्ट में भारत में भुखमरी के स्तर को लेकर चिंता जताई गई है। दूसरी तरफ सरकार ने रिपोर्ट को बनाने के तरीके पर सवाल उठाते हुए, इसे खारिज कर दिया है। ऐसे में आपको भुखमरी पर आई इस रिपोर्ट के बारे में विस्तार से बताते हैं, साथ ही इसको लेकर सरकार द्वारा उठाई गई आपत्तियों की जानकारी देने के साथ ही बताते हैं कि कैसे रैंकिंग तय की जाती है। 

क्या कहती है रिपोर्ट?

भूख और कुपोषण पर नजर रखने वाली वैश्विक भुखमरी सूचकांक की वेबसाइट पर 14 अक्टूबर को बताया गया कि चीन, ब्राजील और कुवैत सहित अठारह देशों ने पांच से कम के जीएचआई स्कोर के साथ शीर्ष स्थान साझा किया है। सहायता कार्यों से जुड़ी आयरलैंड की एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मनी का संगठन वेल्ट हंगर हिल्फ द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई रिपोर्ट में भारत में भूख के स्तर को ‘चिंताजनक’ बताया गया है। वर्ष 2020 में भारत 107 देशों में 94वें स्थान पर था। अब 116 देशों में यह 101वें स्थान पर आ गया है। भारत का जीएचआई स्कोर भी गिर गया है। यह साल 2000 में 38.8 था, जो 2012 और 2021 के बीच 28.8 - 27.5 के बीच रहा। रिपोर्ट के अनुसार, पड़ोसी देश जैसे नेपाल (76), बांग्लादेश (76), म्यांमार (71) और पाकिस्तान (92)भी भुखमरी को लेकर चिंताजनक स्थिति में हैं, लेकिन भारत की तुलना में अपने नागरिकों को भोजन उपलब्ध कराने को लेकर बेहतर प्रदर्शन किया है। 

GHI रैंकिंग की गणना कैसे की जाती है?

जीएचआई रिपोर्ट, आयरिश सहायता एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मन संगठन वेल्ट हंगरहिल्फ ने संयुक्त रूप से तैयार की है। रैंकिंग हमेशा किसी भी संकेतक के पूर्ण माप के बजाय एक सापेक्ष होती है। जीएचआई स्कोर की गणना चार संकेतकों पर की जाती है-

  • अल्पपोषण- जिन्हें पर्याप्त पोषक आहार नहीं मिला हो।
  • चाइल्ड वेस्टिंग - वैसे बच्चे जो अपनी लंबाई के हिसाब से काफी पतले हो. जिनका वजन कम गया हो या फिर बढ़ नहीं रहा।
  • चाइल्ड स्टंटिंग- वैसे बच्चे जो अपनी उम्र के हिसाब से शरीरिक रूप  से छोटे रहे गए हों या जिनकी लंबाई उम्र के हिसाब से विकसित नहीं हुई हो।
  • 5 साल तक के बच्चों की मत्यु दर- 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मत्युदर।

भारत सरकार को रिपोर्ट पर क्या है आपत्ति

रिपोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कहा कि यह ‘‘चौंकाने वाला’’ है कि वैश्विक भूख रिपोर्ट 2021 ने कुपोषित आबादी के अनुपात पर एफएओ (खाद्य एवं कृषि संगठन) के अनुमान के आधार पर भारत के रैंक को कम कर दिया है, जो जमीनी वास्तविकता और तथ्यों से रहितहै और इसमें गंभीर कार्यप्रणाली का अभाव है।’’ मंत्रालय ने एक बयान में कहा, इस रिपोर्ट का प्रकाशन करने वाली एजेंसियों, कंसर्न वर्ल्डवाइड और वेल्ट हंगरहिल्फ ने रिपोर्ट जारी करने से पहले तथ्यों की पुष्टि के लिए उपयुक्त पड़ताल नहीं की है। मंत्रालय ने दावा किया कि एफएओ द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कार्यप्रणाली ‘‘अवैज्ञानिक’’ है। उसने कहा, ‘‘उन्होंने‘चार प्रश्न’ के एक सर्वेक्षण के परिणामों पर अपना मूल्यांकन किया है, जो गैलप द्वारा टेलीफोन पर किया गया था। इसने कहा कि अल्पोषण के वैज्ञानिक मापन के लिए वजन और ऊंचाई की जरूरत होती है, जबकि यहां जिस कार्य प्रणाली का इस्तेमाल किया गया वह पूरी तरह से टेलीफोन पर लोगों से बातचीत के आधार पर किये गये आकलन पर आधारित है।  

रिपोर्ट कितनी विश्वसनीय 

 किसी भी रिपोर्ट की विश्वसनीयता को परखने के दो पैमाने होते हैः उसे बनाने वाले की पृष्ठभूमि और दूसरा, उसे तैयार करने की प्रक्रिया। इस लिहाज से सबसे पहली बात जो इस इंडेक्स के बारे में ध्यान रखनी चाहिए, वह ये कि इसे बनाने वाली ये दोनों ही संस्थाएं गैर-सरकारी हैं। पश्चिमी संस्थाओं में एशिया और विशेषतौर पर भारत के प्रति पूर्वग्रह जगजाहिर है। पूरी दुनिया में मानवाधिकार को बचाने के लिए कथित तौर पर काम करने वाली एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्थाएं अक्सर आतंकवादियों के पक्ष में लॉबिंग करने के लिए कुख्यात हैं। वहीं अगर बात रिपोर्ट की करे तो ये वैश्विक रैंकिंग कई कारणों से समस्याग्रस्त हैं।  वे विभिन्न जनसंख्या आकारों का कोई हिसाब नहीं रखते हैं, और दूसरा, न ही वे उन विभिन्न रास्तों पर विचार करते हैं जिनका राष्ट्रों ने अनुसरण किया है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स के मामले में, भारत के पास व्यथित महसूस करने का उचित कारण है। सबसे पहले, हम नाम से शुरू करते हैं। यह एक मिथ्या नाम है। इसे अधिक सटीक रूप से 'वैश्विक मानव पोषण सूचकांक' कहा जाना चाहिए। कई विकसित देशों के नागरिक भूखे नहीं हैं बल्कि कुपोषण से पीड़ित हैं। यहां तक ​​कि 'स्टंटिंग' और 'वेस्टिंग' शब्दों को भी बदलने की जरूरत है। वे कृपालु मूल्य निर्णयों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें से किसी भी पैरामीटर पर किसी देश के स्कोर की तुलना बेंचमार्क वैल्यू से की जाती है, जो कि 1988 और 2013 के बीच प्रचलित अधिकतम है। संख्या जितनी कम होगी, सूचकांक पर देश की उपलब्धि उतनी ही बेहतर होगी। भारत का स्कोर 2021 में 27.5 था जबकि 2012 में 28.8 था। इसके साथ ही सूचकांक को संकलित करने वाली संस्था संयुक्त राष्ट्र के संगठनों जैसे एफएओ, यूनिसेफ, डब्ल्यूएचओ और विश्व बैंक द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर निर्भर करती है।





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