ड्रग्स बेचने वालों का हुआ बुरा हाल, अब सब्जियां और मास्क बेचने को हुए मजबूर

ड्रग्स बेचने वालों का हुआ बुरा हाल, अब सब्जियां और मास्क बेचने को हुए मजबूर

ड्रग्स का व्यापार करने वाले लोग अब आय के दूसरे स्त्रोतों की तलाश में गाड़ियां साफ कर रहे हैं तो वहीं कई सारे लोग सब्जियां और मास्क बेच रहे हैं।

पणजी। देशव्यापी लॉकडाउन ने कई लोगों को काफी मुश्किलों में डाल दिया है। उदाहरण के लिए जैसे लॉकडाउन होने की वजह से मजदूरों का काम-धन्धा सब कुछ चौपट हो गया जिसके बाद उन्हें मजबूरन पैदल अपने घरों की तरफ जाना पड़ा। जिसकी वजह से देश के सामने आजादी के बाद के पलायन की सबसे बड़ी तस्वीर सामने आई। ठीक इसी प्रकार समुद्र तट से सटे गोवा में ड्रग्स सप्लाई करने वालों ने आय के लिए वैकल्पिक स्त्रोतों की तलाश शुरू कर दी।

अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक अब ड्रग्स सप्लाई करने वालों ने ठेले पर सब्जी और मास्क बेचने या फिर गाड़ियों की सफाई जैसे काम शुरू कर दिए हैं। बता दें कि गोवा में बड़ी संख्या में देश-विदेश से सैलानी आते हैं। जिसकी वजह से यहां पर ड्रग्स का कोरोबार भी खासा होता है। लेकिन लॉकडाउन की वजह से सबकुछ बंद पड़ गया है। 

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गाड़ियां साफ कर रहे ड्रग डीलर्स

ड्रग्स का व्यापार करने वाले लोग अब आय के दूसरे स्त्रोतों की तलाश में गाड़ियां साफ कर रहे हैं तो वहीं कई सारे लोग सब्जियां और मास्क बेच रहे हैं। द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक मापुसा जिला हॉस्पिटल के ड्रग ट्रीटमेंट सेंटर में मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर रविंद्र पाटिल ने बताया कि ड्रग्स का व्यापार करने वाले 2 भाईयों ने अब मास्क बनाना शुरू कर दिया है। बता दें कि मापुसा जिला हॉस्पिटल में ड्रग्स के लती लोगों के पुनर्वास में मदद करता है और पिछले तीन महीनों के लॉकडाउन सभी के लिए कठिन रहे हैं।

पर्यटन से जुड़े काम धंधे बंद !

डॉ पाटिल न आगे बताया कि लॉकडाउन की वजह से पर्यटन सेक्टर से जुड़े कई लोगों का कामकाज पूरी तरह से चौपट हो गया। हालांकि उन्होंने इस बात की खुशी जताई कि गाइड, होटलों में काम करने वाले और इत्यादि लोगों ने दूसरा विकल्प तलाश कर लिया है और उन्हें जो रोजगार मिला है उन्होंने उसे कर लिया है। 

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मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक लॉकडाउन के बाद ड्रग्स रिहैबिलिटेशन के लिए आने वालों की संख्या में इजाफा हुआ। जबकि पहले संख्या काफी कम थी। सेंटर ने बताया कि मार्च से पहले 25-30 लोग रेग्युलर आते थे जिनकी संख्या अप्रैल और मई में बढ़कर 60 हो गई। हिरोइन की लत छुड़ाने के लिए लोग मेथाडोन रखरखाव उपचार (MMT) कराते हैं और मई में ऐसे मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ। जिसकी वजह से सेंटर में दवाइयां तक कम पड़ गईं। हालांकि केंद्र सरकार के द्वारा लॉकडाउन में ढील के बाद अब सामान्य गतिविधियां फिर से शुरू हो गई हैं।





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