Goa Fire Tragedy: 25 मौतों के बाद अब Forgery Case में भी Luthra Brothers को मिली बेल, जानें क्या हैं शर्तें

Goa Fire Tragedy
ANI
अभिनय आकाश । Apr 8 2026 4:09PM

Goa nightclub fire: जांचकर्ताओं का दावा है कि नियामक स्वीकृतियां, जिनमें उत्पाद शुल्क लाइसेंस भी शामिल है, प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में एक जाली अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी शामिल था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि कथित फर्जी मंजूरी ने नियमों के अनुपालन संबंधी चिंताओं के बावजूद प्रतिष्ठान को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

गोवा की एक अदालत ने बुधवार को आग से प्रभावित नाइटक्लब 'बर्च बाय रोमियो लेन' के मालिकों सौरभ और गौरव लूथरा को जालसाजी के एक मामले में जमानत दे दी। इस फैसले से उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है, साथ ही उन्हें इस दुखद घटना से जुड़े एक अलग मामले में पहले ही राहत मिल चुकी है। मापुसा में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जूड सेक्वेरा ने यह आदेश पारित किया। बचाव पक्ष के वकील पराग राव ने पुष्टि की कि जमानत मंजूर कर ली गई है और बताया कि औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद दोनों भाई जेल से बाहर आ जाएंगे। शर्तों के तहत, आरोपियों को अगले कुछ दिनों तक स्थानीय पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगाने का निर्देश दिया गया है, जबकि अधिकारी विस्तृत आदेश पर कार्रवाई जारी रखेंगे।

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जालसाजी के आरोपों की जांच जारी

यह मामला गंभीर आरोपों से जुड़ा है कि लूथरा बंधुओं ने अरपोरा में नाइटक्लब चलाने के लिए आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने हेतु जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। जांचकर्ताओं का दावा है कि नियामक स्वीकृतियां, जिनमें उत्पाद शुल्क लाइसेंस भी शामिल है, प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में एक जाली अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी शामिल था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि कथित फर्जी मंजूरी ने नियमों के अनुपालन संबंधी चिंताओं के बावजूद प्रतिष्ठान को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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घातक अग्निकांड से जुड़ा एक अलग मामला

दिसंबर 2025 में नाइट क्लब में लगी भीषण अग्निकांड के सिलसिले में दोनों भाइयों को इसी महीने की शुरुआत में जमानत मिल चुकी थी। इस अग्निकांड में 25 लोगों की जान चली गई थी। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था और सुरक्षा नियमों व उनके पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। अग्निकांड के बाद, आरोपियों ने कथित तौर पर भारत छोड़ दिया और थाईलैंड चले गए। बाद में उन्हें निर्वासित कर दिया गया और वापसी के तुरंत बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। उनकी गिरफ्तारी इस त्रासदी की चल रही जांच में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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