सरकार-किसान वार्ता अटकी, किसान यूनियनों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 22, 2021   19:51
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सरकार-किसान वार्ता अटकी, किसान यूनियनों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

इस समिति में तीन ही सदस्य हैं क्योंकि भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान ने खुद को इस समिति से अलग कर लिया था। इस समिति के तीन अन्य सदस्यों ने बृहस्पतिवार को पक्षकारों के साथ वार्ता प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

नयी दिल्ली। सरकार और किसानों के बीच शुक्रवार को वार्ता तब अटक गई जब किसान नेता तीनों नए कृषि कानूनों को पूरी तरह वापस लिए जाने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दिए जाने की अपनी मांग पर लगातार अड़े रहे। केंद्र ने उनसे कृषि कानूनों को 12-18महीने के लिए निलंबित रखने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने को कहा। ग्यारहवें दौर की वार्ता के आज बेनतीजा रहने के साथ ही किसान नेताओं ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। वार्ता के पिछले 10 दौर के विपरीत आज 11वें दौर की वार्ता में अगली बैठक की कोई तारीख तय नहीं हो पाई। उल्लेखनीय है कि केंद्र द्वारा लाए गए नए कृषि कानूनों के विरोध में लगभग दो महीने से हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका मानना है कि संबंधित कानून किसानों के खिलाफ तथा कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में हैं। सरकार ने आज अपने रुख में कड़ाई लाते हुए कहा कि यदि किसान यूनियन कानूनों को निलंबित किए जाने संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सहमत हों तो वह दुबारा बैठक करने के लिए तैयार है। इसके साथ ही किसान संगठनों ने कहा कि वे अब अपना आंदोलन तेज करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान सरकार का रवैया ठीक नहीं था। किसान नेताओं ने यह भी कहा कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली योजना के अनुरूप निकाली जाएगी और यूनियनों ने पुलिस से कहा है कि इस दौरान शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी सरकार की है। केंद्र ने पिछले दौर की वार्ता में कानूनों को निलंबित रखने तथा समाधान ढूंढ़ने के लिए एक संयुक्त समिति बनाने की पेशकश की थी।

किसान नेताओं ने आज की बैठक के बाद कहा कि भले ही बैठक पांच घंटे चली, लेकिन दोनों पक्ष मुश्किल से 30 मिनट के लिए ही आमने-सामने बैठे। बैठक की शुरुआत में ही किसान नेताओं ने सरकार को सूचित किया कि उन्होंने बुधवार को पिछले दौर की बैठक में सरकार द्वारा रखे गए प्रस्ताव को खारिज करने का निर्णय किया है। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर सहित तीनों केंद्रीय मंत्रियों ने किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों से अपने रुख पर पुनर्विचार करने को कहा जिसके बाद दोनों पक्ष दोपहर भोज के लिए चले गए। किसान नेताओं ने अपने लंगर में भोजन किया जो तीन घंटे से अधिक समय तक चला। भोजन विराम के दौरान 41 किसान नेताओं ने छोटे-छोटे समूहों में आपस में चर्चा की, जबकि तीनों केंद्रीय मंत्रियों ने विज्ञान भवन में एक अलग कक्ष में प्रतीक्षा की। बैठक के बाद भारतीय किसान यूनियन (उग्राहां) के नेता जोगिंदर सिंह उग्राहां ने कहा कि वार्ता टूट गई है क्योंकि यूनियनों ने सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार ने कहा कि कानूनों को निलंबित रखने की अवधि दो साल तक विस्तारित की जा सकती है, लेकिन यूनियन तीनों कानूनों को पूरी तरह वापस लिए जाने तथा फसलों की खरीद पर एमएसपी की कानूनी गारंटी दिए जाने की अपनी मांगों पर अड़ी रहीं। मंत्रियों ने किसान यूनियनों से कहा कि उन्हें सभी संभव विकल्प दिए गए हैं और उन्हें कानूनों को निलंबित रखने के प्रस्ताव पर आपस में आंतरिक चर्चा करनी चाहिए। सूत्रों के अनुसार तोमर ने किसान नेताओं से कहा कि यदि वे प्रस्ताव पर चर्चा करना चाहते हैं तो सरकार एक और बैठक के लिए तैयार है। 

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मंत्री ने यूनियनों का उनके सहयोग के लिए धन्यवाद भी किया और कहा कि हालांकि कानूनों में कोई समस्या नहीं है, लेकिन सरकार ने प्रदर्शनकारी किसानों के सम्मान के लिए इन्हें निलंबित रखने की पेशकश की है। बैठक स्थल से बाहर आते हुए किसान नेता शिवकुमार कक्का ने कहा कि चर्चा में कोई प्रगति नहीं हुई और सरकार ने अपने प्रस्ताव पर यूनियनों से पुन: विचार करने को कहा। कक्का बैठक से जाने वाले पहले व्यक्ति थे, लेकिन उन्होंने कहा कि यह ‘‘कुछ निजी कारणों’’ की वजह से है। बुधवार को हुई पिछले दौर की बातचीत में सरकार ने तीनों नए कृषि कानूनों के क्रियान्वयन को स्थगित रखने और समाधान निकालने के लिए एक संयुक्त समिति बनाने की पेशकश की थी। हालांकि बृहस्पतिवार को विचार-विमर्श के बाद किसान यूनियनों ने इस पेशकश को खारिज करने का फैसला किया और वे इन कानूनों को रद्द किए जाने तथा एमएसपी की कानूनी गारंटी दिए जाने की अपनी दो प्रमुख मांगों पर अड़े रहे। किसान नेता दर्शनपाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमने सरकार से कहा कि हम कानूनों को निरस्त करने के अलावा किसी और चीज के लिए सहमत नहीं होंगे। लेकिन मंत्री ने हमें अलग से चर्चा करने और मामले पर फिर से विचार कर फैसला बताने को कहा।’’ टिकैत ने कहा, ‘‘हमने अपनी स्थिति सरकार को स्पष्ट रूप से बता दी कि हम कानूनों को निरस्त कराना चाहते हैं, न कि स्थगित। मंत्रियों ने हमें अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा।’’ कुछ नेताओं ने आशंका जताई कि यदि किसान एक बार दिल्ली की सीमाओं से चले गए तो आंदोलन अपनी ताकत खो देगा। 

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भारतीय किसान यूनियन (असली अराजनीतिक) के अध्यक्ष हरपाल सिंह ने कहा, ‘‘यदि हम सरकार की पेशकश को स्वीकार कर लेते हैं, तो दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हमारे साथी भाई कानूनों को रद्द करने के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे। वे हमें नहीं बख्शेंगे। हम उन्हें क्या उपलब्धि दिखाएंगे?’’ उन्होंने सरकार की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि यह विश्वास करना मुश्किल है कि वह 18 महीने तक कानूनों के क्रियान्वयन को स्थगित रखकर अपनी बात पर कायम रहेगी। सिंह ने कहा, ‘‘हम यहां मर जाएंगे, लेकिन कानूनों को रद्द कराए बिना वापस नहीं लौटेंगे।’’ सरकार की ओर से केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, रेलवे, वाणिज्य और खाद्य मंत्री पीयूष गोयल तथा वाणिज्य राज्य मंत्री सोमप्रकाश ने करीब 41 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की। संयुक्त किसान मोर्चा के तहत किसान नेताओं ने सरकार के प्रस्ताव पर बृहस्पतिवार को सिंघू बॉर्डर पर बैठक की थी। इसी मोर्चे के बैनर तले कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर किसान संगठन पिछले लगभग दो महीने से आंदोलन कर रहे हैं। मोर्चे ने एक बयान में कहा था, ‘‘बैठक में तीनों नए केंद्रीय कृषि कानूनों को पूरी तरह रद्द करने और किसानों के लिए सभी फसलों पर लाभदायक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए एक कानून बनाने की बात, इस आंदोलन की मुख्य मांगों के रूप में दोहराई गईं।’’ वहीं, कृषि मंत्री तोमर ने आज की बैठक के बाद कहा कि सरकार और किसानों के बीच अक्टूबर से बातचीत चल रही है तथा अब तक वार्ता के 11 दौर हुए हैं एवं एक बैठक अधिकारियों के साथ हुई। उन्होंने कहा कि किसानों के फायदे के लिए संसद में कृषि सुधार विधेयकों को पारित किया गया और आंदोलन मुख्य रूप से पंजाब के किसानों तथा कुछ अन्य राज्यों के कुछ किसानों द्वारा किया जा रहा है।

तोमर ने कहा कि सरकार ने हमेशा यह कहा है कि वह कानूनों को निरस्त करने के अलावा अन्य विकल्पों पर विचार करने को तैयार है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा प्रस्ताव किसानों और देश के हित में है। हमने यूनियनों से हमारे प्रस्ताव पर शनिवार तक अपना फैसला बताने को कहा है। यदि वे सहमत हैं, तो हम फिर से बैठक करेंगे।’’ मंत्री ने कहा कि सरकार ने आंदोलन खत्म करने के लिए कई प्रस्ताव दिए, लेकिन जब आंदोलन की शुचिता खो जाती है तो कोई समाधान संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि कुछ बाहरी ताकतें निश्चित रूप से आंदोलन जारी रखने की कोशिश कर रही हैं और जाहिर है कि वे ताकतें किसानों के हितों के खिलाफ हैं। दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों में से अधिकतर पंजाब, हरियाणा तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हैं। किसान संगठनों का आरोप है कि नए कृषि कानूनों से मंडी और एमएसपी खरीद प्रणालियां समाप्त हो जाएंगी तथा किसान बड़े कॉरपोरेट घरानों की दया पर निर्भर हो जाएंगे। उच्चतम अदालत ने 11 जनवरी को तीनों नए कृषि कानूनों के अमल पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी और गतिरोध को दूर करने के मकसद से चार-सदस्यीय एक समिति का गठन किया था। फिलहाल, इस समिति में तीन ही सदस्य हैं क्योंकि भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान ने खुद को इस समिति से अलग कर लिया था। इस समिति के तीन अन्य सदस्यों ने बृहस्पतिवार को पक्षकारों के साथ वार्ता प्रक्रिया शुरू कर दी थी।





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ISRO को मिली एक और कामयाबी, PSLV-C51 ने अमेजोनिया-1 समेत 19 उपग्रहों को लेकर भरी उड़ान

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 28, 2021   11:41
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ISRO को मिली एक और कामयाबी, PSLV-C51 ने अमेजोनिया-1 समेत 19 उपग्रहों को लेकर भरी उड़ान

प्रक्षेपण के करीब 18 मिनट बाद प्राथमिक उपग्रह अमेजोनिया-1 के कक्षा में स्थापित किए जाने की संभावना है, जबकि अन्य 18 उपग्रह अगले दो घंटों में कक्षाओं में भेजे जाएंगे।

श्रीहरिकोटा। ब्राजील के अमेजोनिया-1 और 18 अन्य उपग्रहों को लेकर भारत के पीएसएलवी (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) सी-51 ने रविवार को यहां श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी। करीब 26 घंटे की उल्टी गिनती पूरी होने के बाद पीएसएलवी-सी51 ने चेन्नई से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम लॉन्च पैड से सुबह करीब 10 बजकर 24 मिनट पर उड़ान भरी।

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प्रक्षेपण के करीब 18 मिनट बाद प्राथमिक उपग्रह अमेजोनिया-1 के कक्षा में स्थापित किए जाने की संभावना है, जबकि अन्य 18 उपग्रह अगले दो घंटों में कक्षाओं में भेजे जाएंगे। इन उपग्रहों में चेन्नई की स्पेस किड्ज़ इंडिया (एसकेआई) का उपग्रह भी शामिल है। इस अंतरिक्ष यान के शीर्ष पैनल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर उकेरी गई है। 





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देश में कोरोना के मामलों में तेजी से हो रही वृद्धि, 16,752 नए मामले दर्ज, 113 मरीजों की मौत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 28, 2021   11:01
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देश में कोरोना के मामलों में तेजी से हो रही वृद्धि, 16,752 नए मामले दर्ज, 113 मरीजों की मौत

आंकड़ों के मुताबिक, संक्रमण का इलाज करा रहे मरीजों की संख्या बढ़कर 1,64,511 पहुंच गई है जो कुल मामलों का 1.48 प्रतिशत है। देश में अबतक कुल 1,07,75,169 मरीज संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं।

नयी दिल्ली। भारत में बीते 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के 16,752 नए मरीजों की पुष्टि हुई है जो पिछले 30 दिनों में सबसे ज्यादा हैं। इसके बाद संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 1,10,96,731 हो गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सुबह आठ बजे तक के अद्यतन आंकड़ों के मुताबिक, 113 और संक्रमितों की मौत के बाद महामारी से जान गंवाने वालों की संख्या 1,57,051 पहुंच गई है। देश में 29 जनवरी को 18,855 नए मामले आए थे। 

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आंकड़ों के मुताबिक, संक्रमण का इलाज करा रहे मरीजों की संख्या बढ़कर 1,64,511 पहुंच गई है जो कुल मामलों का 1.48 प्रतिशत है। देश में अबतक कुल 1,07,75,169 मरीज संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं। इसके बाद संक्रमण से मुक्त होने की दर 97.10 फीसदी है। कोरोना वायरस संक्रमण से मृत्यु दर 1.42 प्रतिशत है। देश में पिछले साल सात अगस्त को संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त को 30 लाख और पांच सितम्बर को 40 लाख से अधिक हो गई थी। 

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वहीं, संक्रमण के कुल मामले 16 सितम्बर को 50 लाख, 28 सितम्बर को 60 लाख, 11 अक्टूबर को 70 लाख, 29 अक्टूबर को 80 लाख और 20 नवम्बर को 90 लाख और 19 दिसम्बर को एक करोड़ के पार चले गए थे। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के मुताबिक, 27 फरवरी तक 21,62,31,106 नमूनों की जांच की गई है। शनिवार को ही 7,95,723 नमूनों का परीक्षण किया गया है।





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जब तक यमुना का पानी साफ नहीं होगा, शाही स्नान में नहीं लेंगे भाग: हिंदू संत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 28, 2021   10:54
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जब तक यमुना का पानी साफ नहीं होगा, शाही स्नान में नहीं लेंगे भाग: हिंदू संत

अयोध्या स्थित महा निर्वाणी अखाड़ा के प्रमुख महंत धर्मदास ने आगामी कुंभ मेले के लिए भी ऐसी घोषणाएं कीं। महंत धर्मदास ने दो अन्य वैष्णवी अखाड़ों- महा निर्मोही और महा दिगंबर अखाड़ा के प्रमुखों की उपस्थिति में यह घोषणा की।

मथुरा। यमुना के गंभीर जल प्रदूषण को रेखांकित करते हुए, देश के तीन प्रमुख हिंदू संतों ने शनिवार को संकल्प लिया कि वे वर्तमान में चल रहे वृंदावन कुंभ के दौरान बाकी शाही स्नान’ में तब तक भाग नहीं लेंगे, जब तक कि नदी का पानी साफ नहीं हो जाता। अयोध्या स्थित महा निर्वाणी अखाड़ा के प्रमुख महंत धर्मदास ने शेष तीन शुभ दिनों- 9, 13 और 25 मार्च को नदी में शाही स्नान का बहिष्कार करने की घोषणा की। 

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उन्होंने आगामी कुंभ मेले के लिए भी ऐसी घोषणाएं कीं। महंत धर्मदास ने दो अन्य वैष्णवी अखाड़ों- महा निर्मोही और महा दिगंबर अखाड़ा के प्रमुखों की उपस्थिति में यह घोषणा की। महंत धर्मदास ने कहा, अगले शाही स्नान में, हम यमुना में पवित्र डुबकी तभी लगाएंगे, जब पानी साफ होगा। दो अन्य अखाड़ों के प्रमुखों ने इस पर सहमति व्यक्त की।





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