Instagram पर CSAM Ads: BBC रिपोर्ट पर एक्शन में सरकार, Meta के अधिकारी होंगे तलब

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अभिनय आकाश । Jul 3 2026 6:19PM

इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापनों के आरोपों पर मेटा भारत सरकार की जांच के दायरे में है, जिससे प्लेटफॉर्म की कंटेंट मॉडरेशन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के बाद केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मामले में जवाबदेही के लिए मेटा को तलब करने का निर्देश दिया है।

भारत में इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट (CSAM) को बढ़ावा देने वाले विज्ञापन दिखाए जाने के आरोपों के बाद केंद्र सरकार मेटा के अधिकारियों को तलब करेगी। सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों को इस मामले पर मेटा को तलब करने का निर्देश दिया है। MeitY भारत में इंस्टाग्राम विज्ञापनों के ज़रिए बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने के आरोपों पर कंपनी से स्पष्टीकरण मांगेगा। यह कदम BBC Eye की उस जांच के बाद उठाया गया है जिसमें पाया गया कि Instagram पर "रेप वीडियो" और "चाइल्ड वीडियो" जैसे शब्दों वाले पेड विज्ञापन दिखाए जा रहे थे। ये विज्ञापन यूज़र्स को Telegram चैनलों पर भेजते थे, जहाँ कथित तौर पर ऐसा गैर-कानूनी कंटेंट बेचा जाता था।

बीबीसी की जांच के मुताबिक, Instagram पर "रेप वीडियो" और "चाइल्ड वीडियो" जैसे शब्दों वाले पेड विज्ञापन दिखाए गए। ये विज्ञापन यूज़र्स को Telegram चैनलों पर भेजते थे, जहाँ कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा मटीरियल सिर्फ़ 99 रुपये में खरीदा जा सकता था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि Instagram पर विज्ञापन तभी पब्लिश किए जाते हैं जब वे प्लेटफ़ॉर्म की मॉडरेशन प्रक्रिया से गुज़र जाते हैं। यह कदम BBC Eye की उस जांच के बाद उठाया गया है जिसमें पाया गया कि Instagram पर रेप वीडियो और चाइल्ड वीडियो जैसे शब्दों वाले पेड विज्ञापन दिखाए जा रहे थे। ये विज्ञापन यूज़र्स को Telegram चैनलों पर भेजते थे, जहाँ कथित तौर पर ऐसा गैर-कानूनी कंटेंट बेचा जाता था।

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BBC की जांच के मुताबिक, Instagram पर "रेप वीडियो" और "चाइल्ड वीडियो" जैसे शब्दों वाले पेड विज्ञापन दिखाए गए। ये विज्ञापन यूज़र्स को Telegram चैनलों पर भेजते थे, जहाँ कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा मटीरियल सिर्फ़ 99 रुपये में खरीदा जा सकता था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि Instagram पर विज्ञापन तभी पब्लिश किए जाते हैं जब वे प्लेटफ़ॉर्म की मॉडरेशन प्रक्रिया से गुज़र जाते हैं। जांच में पता चला कि एक विज्ञापन में एक लड़का और एक लड़की (जो लगभग 12 साल के लग रहे थे) सेक्सुअल एक्टिविटी में शामिल थे। एक और विज्ञापन में एक आदमी (जिसने अपनी उम्र 52 साल बताई) और एक लड़की (जिसे 12 साल का बताया गया) दिखे; इसमें यूज़र्स से टेलीग्राम पर और वीडियो देखने के लिए क्लिक करने को कहा गया था। बीबीसी ने एक ऐसे विज्ञापन की भी रिपोर्ट की जिसमें एक छोटी लड़की रोती हुई दिख रही थी और साथ में लिखा था कि उसके साथ सेक्सुअल असॉल्ट हुआ है। हालांकि, खबरों के मुताबिक इंस्टाग्राम ने 24 घंटे बाद जवाब दिया कि उस विज्ञापन से उसके कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स का उल्लंघन नहीं हुआ है।

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बीबीसी के सवालों के बाद, मेटा ने कहा कि उसने पहले ही कई विज्ञापनों को हटा दिया था और उन्हें पोस्ट करने वाले अकाउंट्स को सस्पेंड कर दिया था। कंपनी ने कहा कि बीबीसी की जानकारी की समीक्षा करने के बाद उसने और विज्ञापन हटाए, और अकाउंट्स बंद किए, साथ ही अपनी पॉलिसी का उल्लंघन करने वाले कंटेंट से जुड़े यूआरएल (URLs) को ब्लॉक किया। मेटा ने माना कि "कोई भी सिस्टम परफेक्ट नहीं होता" और कहा कि उसकी समीक्षा प्रक्रिया शायद हर पॉलिसी उल्लंघन का पता न लगा पाए। उसने यह भी कहा कि विज्ञापन लाइव होने के बाद भी वह प्रोएक्टिव डिटेक्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती रहती है और यूज़र्स को नियमों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट की रिपोर्ट करने की सुविधा देती है।

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