Sharjeel Imam Bail Plea: दिल्ली दंगों के UAPA मामले में HC ने पुलिस से मांगा जवाब, 27 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

शर्जील के वकील की दलील के बाद कोर्ट ने नोटिस जारी किया। वकील ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट का यह मानना गलत था कि ज़मानत की नई अर्ज़ी पर विचार करने का कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि यह निष्कर्ष गलत था क्योंकि ट्रायल में कोई प्रगति नहीं हुई थी और अभी तक आरोप भी तय नहीं किए गए थे।
दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े बड़ी साज़िश के मामले में स्टूडेंट एक्टिविस्ट शरजील इमाम की ज़मानत अर्ज़ी पर नोटिस जारी किया। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और विकास महाजन की बेंच ने दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा और सुनवाई की अगली तारीख 27 अगस्त तय की। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा नोटिस जारी करें। मामले को 27 अगस्त को लिस्ट करें। शरजील ने अपने वकील इब्राहिम और तालिब मुस्तफा के ज़रिए ट्रायल कोर्ट के 4 जुलाई के आदेश के खिलाफ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
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ट्रायल कोर्ट ने 4 जुलाई को शरजील और उमर खालिद की ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि नई याचिका पर विचार करने का कोई आधार नहीं है, क्योंकि वह यह भी नहीं देख सकता कि जनवरी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद से हालात बदले हैं या नहीं।
कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशन जज (ASJ) समीर बाजपेयी ने कहा कि गुलफिशा फातिमा मामले में 5 जनवरी के सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके बाद सैयद इफ्तिखार अंद्राबी से जुड़े मामले में आए फैसले के बीच विचारों के अंतर का मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच को भेजा जा चुका है। ट्रायल कोर्ट ने कहा कि जब तक यह मुद्दा सुलझ नहीं जाता, वह किसी भी आधार पर नई याचिकाओं पर विचार नहीं कर सकता। उस मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी के फ़ैसले में अपनाई गई दलीलों पर गंभीर शंका जताई थी।
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कोर्ट ने कहा कि हो सकता है कि इसमें 'यूनियन ऑफ़ इंडिया बनाम के.ए. नजीब' (2021) के फ़ैसले में तय सिद्धांतों को सही ढंग से लागू न किया गया हो। उस फ़ैसले में माना गया था कि लंबे समय तक जेल में रहने और ट्रायल में देरी होने पर, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 43D(5) के तहत ज़मानत पर लगी कानूनी पाबंदियों को दरकिनार किया जा सकता है। शर्जील के वकील की दलील के बाद कोर्ट ने नोटिस जारी किया। वकील ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट का यह मानना गलत था कि ज़मानत की नई अर्ज़ी पर विचार करने का कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि यह निष्कर्ष गलत था क्योंकि ट्रायल में कोई प्रगति नहीं हुई थी और अभी तक आरोप भी तय नहीं किए गए थे। वकील ने बताया कि कार्यवाही का चरण जनवरी जैसा ही था, जब सुप्रीम कोर्ट ने शर्जील की ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी थी।
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