असम बाढ़ पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने के लिए सीएम हिमंत ने पीएम मोदी को दिया धन्यवाद

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने राज्य में बाढ़ की स्थिति पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार युद्ध स्तर पर राहत कार्य कर रही है और सभी प्रभावित गांवों तक सहायता पहुंचाई जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में असम के सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक कर बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की थी।

गुवाहाटी, 28 जुलाई असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को राज्य में आई बाढ़ के मुद्दे पर ‘‘व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने’’ के लिए धन्यवाद दिया। बाढ़ से अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4.45 लाख से अधिक लोग अब भी प्रभावित हैं। शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार सभी प्रभावित गांवों तक पहुंचने में सक्षम रही है और बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को संसद भवन परिसर में असम से जुड़े केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा सांसदों के साथ बैठक की, जिसमें राज्य में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की गई। बाद में मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘असम के सांसदों से मुलाकात की और राज्य के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की मदद के लिए असम सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।

मैं सभी की सुरक्षा और कल्याण की कामना करता हूं।’’ राज्य के केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा सांसदों के साथ बाढ़ की स्थिति की समीक्षा से संबंधित मोदी की पोस्ट को साझा करते हुए शर्मा ने कहा, ‘‘आदरणीय प्रधानमंत्री जी, इस मामले पर व्यक्तिगत तौर पर ध्यान देने और असम की बाढ़ की स्थिति के बारे में जमीनी स्तर की जानकारी लेने के लिए धन्यवाद।’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘आपके नेतृत्व में, हम अपने लोगों को राहत पहुंचाने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं और अब तक हम प्रत्येक प्रभावित गांव तक पहुंचने में सफल रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित ज्यादातर क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति भी बहाल कर दी गई है और जिन लोगों को बचाया गया है, उन्हें राहत शिविरों में ठहराकर उचित भोजन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। शर्मा ने कहा, ‘‘हम इस मुश्किल समय में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे काम करते रहेंगे और इसके बाद अपने लोगों की सहायता के लिए एक व्यापक पुनर्वास योजना प्रस्तुत करेंगे, जो जन भागीदारी के सिद्धांतों पर आधारित होगी।

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