Elections 2022। चुनावी राज्यों में इन CMs पर होगी पार्टी की नैय्या पार लगाने की जिम्मेदारी

Elections 2022। चुनावी राज्यों में इन CMs पर होगी पार्टी की नैय्या पार लगाने की जिम्मेदारी

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के लिए भी 2022 काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है क्योंकि कांग्रेस को पंजाब में अपना किला बचाना है जबकि आम आदमी पार्टी गोवा, पंजाब और उत्तराखंड के रास्ते लंबी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रही है।

अगले साल पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां जोरों पर है। सभी राजनीतिक दल पूरी दमखम के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है। सबसे ज्यादा चुनौती सत्तारूढ़ दलों के लिए है। साथ ही साथ सबसे बड़ी चुनौती उन मुख्यमंत्रियों के लिए भी है जो राज्य में पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और सरकार का चेहरा हैं। कुल मिलाकर देखें तो भाजपा को 4 राज्यों में अपनी सत्ता बचानी है जबकि पंजाब में उसे अपने इतिहास को सुधारना है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के लिए भी 2022 काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है क्योंकि कांग्रेस को पंजाब में अपना किला बचाना है जबकि आम आदमी पार्टी गोवा, पंजाब और उत्तराखंड के रास्ते लंबी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रही है। लेकिन इतना तो तय है कि अगले चुनाव में पार्टियों की निर्भरता उन चेहरों पर ज्यादा है जो फिलहाल राज्य सरकारों का नेतृत्व कर रहे हैं। 

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योगी आदित्यनाथ

योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। कई नामों पर विचार होने के बाद 2017 में उन्हें उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी गई। 1998 में राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से लगातार लोकसभा पहुंचते रहे हैं। 1998 से लेकर 2017 तक वह गोरखपुर से लोकसभा सांसद चुने गए। योगी आदित्यनाथ भाजपा के फायर ब्रांड नेता हैं और हिन्दुत्व के मुद्दे पर काफी मुखर रहते हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ-साथ वह गोरक्षपीठाधीश्वर भी हैं। 2022 के उत्तर प्रदेश चुनाव में भी पार्टी इन्हीं के चेहरे पर उतरने जा रही है। पार्टी की ओर से साफ तौर पर कह दिया गया है योगी आदित्यनाथ के ही नेतृत्व में 2022 का चुनाव लड़ा जाएगा। पार्टी लगातार योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भ्रष्टाचार मुक्त शासन, किए गए विकास कार्य और माफियाओं तथा गूंड़ो के खिलाफ कार्यवाही को मुद्दा बना रही है। 

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पुष्कर सिंह धामी

उत्तराखंड में भी 2022 में चुनाव होने है। सत्तारूढ़ भाजपा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ने जा रही है। हालांकि 2017 में चुनाव जीतने के बाद भाजपा ने यहां त्रिवेंद्र सिंह रावत को कमान सौंपी थी। इसके बाद उन्हें हटाकर तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया। जनता में बढ़ती नाराजगी को देखते हुए आनन-फानन में पार्टी ने पुष्कर सिंह धामी को नेतृत्व सौंपा। पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के 11वें मुख्यमंत्री बने। पुष्कर सिंह धामी की पहचान युवा और ऊर्जावान नेता के तौर पर होती है। उत्तराखंड के खटीमा सीट से वह 2 बार विधायक चुने गए हैं। 

चरणजीत सिंह चन्नी

चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के मुख्यमंत्री हैं। पंजाब कांग्रेस में लंबे समय तक चली अंर्तकलह के बाद उन्हें 20 सितंबर 2021 को राज्य की कमान सौंपी गई। वे पंजाब के 27 वें मुख्यमंत्री बने। इसके साथ ही वह राज्य के पहले दलित मुख्यमंत्री भी हैं। 2017 में चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस ने अमरिंदर सिंह को सत्ता सौंपी थी। लेकिन पार्टी में टकराव की वजह से उन्हें हटा दिया गया और चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया। कैप्टन अमरिंदर सिंह के भी मंत्रिमंडल में ये तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक परीक्षण मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वर्तमान में कांग्रेस की ओर से चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है। लेकिन पार्टी उन्हीं के नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतरने वाली है। चरणजीत सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 2007 में की थी जब उन्हें चमकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र से जीत मिली थी। इसके बाद 2012 और 2017 में भी वह विधायक चुने गए। 

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प्रमोद सावंत

गोवा में प्रमोद सावंत भाजपा सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। वह राज्य के 13वें मुख्यमंत्री हैं। 2019 में मनोहर पर्रिकर के अचानक निधन के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया। वह गोवा विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सावंत को आरएसएस का एक समर्पित कार्यकर्ता माना जाता है। सावंत हमेशा मनोहर पर्रिकर को अपना गुरु मानते हैं। सावंत पेशे से आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं। उन्होंने पहली बार 2008 में चुनाव लड़ा था हालांकि इन्हें हार मिली थी। 2012 के चुनाव में उन्हें जीत मिली और 2017 में भी यह अच्छे वोटों से जीतकर विधानसभा पहुंचे। 

एन. बीरेन सिंह 

एन. बीरेन मणिपुर में भाजपा गठबंधन के एनडीए सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। एन. बीरेन सिंह कांग्रेस के बड़े नेता रह चुके हैं। हालांकि इबोबी सिंह से टकराव के बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और भाजपा में शामिल हो गए थे। इबोबी सिंह की सरकार में वह मंत्री रह चुके हैं। 56 वर्षीय एन. बीरेन हीनगंग विधानसभा सीट से 4 बार से विधायक रहे हैं। इस बार उनके नेतृत्व में भाजपा चुनावी मैदान में अपने सहयोगियों के साथ उतर रही है। ऐसे में पार्टी के लिए सत्ता में वापसी कराना इनकी बड़ी जिम्मेदारी है। 





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