भारत को मिली पहली हाइड्रोजन ट्रेन! Jind-Sonipat रूट पर चलेगी Zero Emission ट्रेन

Hydrogen train
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अंकित सिंह । Jul 10 2026 5:30PM

रेल मंत्रालय ने जींद-सोनीपत रूट पर भारत की पहली रोजाना चलने वाली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन सेवा को मंजूरी दी है, जो स्वच्छ ऊर्जा परिवहन को बढ़ावा देगी। यह 10-कार वाली ट्रेन 75 किमी प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चलेगी, जिससे पारंपरिक फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम होगी और केवल जल-वाष्प का उत्सर्जन होगा।

रेल मंत्रालय ने भारत की पहली रोज़ाना चलने वाली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन सर्विस को मंज़ूरी दे दी है, जो जींद और सोनीपत के बीच चलेगी। सूत्रों के अनुसार, यह सेवा ट्रेन संख्या 74010/74009 के रूप में चलेगी, जिसमें जिंद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा, भम्बेवा, ईशापुर खीरी, बुटाना, खंदराई, गोहाना, रभरा, लाठ, मोहना (हरियाणा) और बड़वासनी में वाणिज्यिक स्टॉप होंगे। जून में, परफॉर्मेंस पैरामीटर्स का आकलन करने के लिए दिल्ली और जींद के बीच इमरजेंसी ब्रेकिंग दूरी और ट्रेन के हिलने-डुलने (ऑसिलेशन) पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक ट्रायल रन किया गया था।

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भारतीय रेलवे ने मई में नॉर्दर्न रेलवे के जींद-सोनीपत सेक्शन पर 10-कार वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल-बेस्ड ट्रेनसेट शुरू करने को मंज़ूरी दी थी। रेल मंत्रालय ने बताया कि यह ट्रेनसेट जल्द ही शुरू होने के लिए पूरी तरह तैयार है और 1200 KW के हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल करके 75 kmph की अधिकतम रफ़्तार से चलेगी। इस पहल का मकसद साफ़-सुथरे और ज़्यादा ऊर्जा-कुशल रेल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना है। 

मंत्रालय ने बताया कि हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी हाइड्रोजन का इस्तेमाल करके केमिकल रिएक्शन के ज़रिए बिजली बनाती है, जिसमें सिर्फ़ जल-वाष्प (water vapour) ही निकलता है। इस वजह से यह पारंपरिक फॉसिल फ्यूल-आधारित ट्रैक्शन सिस्टम का एक साफ़-सुथरा विकल्प है। इस प्रोजेक्ट के साथ, भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे उन देशों में शामिल हो गया है जो हाइड्रोजन से चलने वाले रेल ट्रांसपोर्ट पर काम कर रहे हैं।

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हरियाणा में जींद-सोनीपत सेक्शन को पायलट रूट के तौर पर चुना गया है। ट्रेनसेट के लिए जींद में ही हाइड्रोजन स्टोर करने और उसमें हाइड्रोजन भरने (रीफ्यूलिंग) की सुविधा भी बनाई गई है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइज़ेशन (PESO) ने इस जगह पर कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस को स्टोर करने और उसे भरने के लिए ज़रूरी लाइसेंस दे दिया है। मंत्रालय ने बताया है कि रीफ्यूलिंग के काम के लिए हाइड्रोजन कम्प्रेशन सिस्टम लगाया गया है। साथ ही, भरोसेमंद और सुरक्षित कामकाज सुनिश्चित करने के लिए टेक्निकल सपोर्ट और ज़रूरी स्पेयर पार्ट्स की भी व्यवस्था की गई है। एक स्टैंडबाय कम्प्रेशर यूनिट का इंतज़ाम भी किया जा रहा है।

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