US Supreme Court के Tariff फैसले पर भारत की पैनी नजर, मंत्री Pralhad Joshi बोले- सरकार करेगी अध्ययन

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के आयात शुल्क संबंधी फैसले का अध्ययन करेगी, जिसके बाद ही वाणिज्य और विदेश मंत्रालय कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देंगे। इस महत्वपूर्ण फैसले में अमेरिकी कोर्ट ने टैरिफ लगाने में ट्रंप प्रशासन द्वारा अपनी शक्तियों के दुरुपयोग को रेखांकित किया है।
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार आयात शुल्क पर अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले की जांच करने के बाद ही कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मामला वाणिज्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। शनिवार को यहां पत्रकारों से बात करते हुए जोशी ने कहा कि मैंने मीडिया में पढ़ा है कि अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ फैसला सुनाया है और भारतीय सरकार उसका अध्ययन करेगी। इस पर जो भी प्रतिक्रिया देनी होगी, वह वाणिज्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय द्वारा दी जाएगी, न कि मेरे द्वारा।
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उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के 6-3 के फैसले के बाद आई है, जिसमें कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन ने 1977 के अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) का इस्तेमाल करके व्यापक आयात शुल्क लगाने में अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया है। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने जस्टिस नील गोरसच, एमी कोनी बैरेट और तीन उदारवादी न्यायाधीशों के साथ यह फैसला सुनाया कि आईईईपीए राष्ट्रपति को शुल्क लगाने का अधिकार नहीं देता, यह शक्ति संवैधानिक रूप से कांग्रेस के पास है। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस फैसले को भयानक निर्णय करार दिया और 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत का नया वैश्विक शुल्क घोषित किया, जो 150 दिनों के लिए अस्थायी आयात अधिभार की अनुमति देता है।
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इस बीच, जोशी ने भारत एआई शिखर सम्मेलन के दौरान कमीज उतारकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए भारतीय युवा कांग्रेस की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि कांग्रेस पार्टी इस तरह का व्यवहार कर रही है, जबकि लगभग 150 देशों के 20 राष्ट्राध्यक्ष, 45 मंत्री और महत्वपूर्ण पदाधिकारी इसमें शामिल हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत के प्रदर्शन का जश्न मनाने के बजाय, वे हंगामा करने की कोशिश कर रहे हैं। वे भारत के विकास में बाधा बनने की कोशिश कर रहे हैं।
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