कश्मीर में जवानों ने नाच-गाकर मनाई लोहड़ी, एलओसी के पास गानों की धुनों पर थिरके जवान

कश्मीर में जवानों ने नाच-गाकर मनाई लोहड़ी, एलओसी के पास गानों की धुनों पर थिरके जवान

एलओसी के पास अलाव जलाकर जवानों ने नाच गाकर लोहड़ी मनाई। वहीं बीएसएफ के जवानों ने भी जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में लोहड़ी का त्योहार मनाया। इस दौरान अलाव जलाया गया था। जवानों ने हंसी खुशी के साथ एक दूसरे से मिल बांटकर रेवड़ी, मूंगफली और गजक आदि खाई।

कोरोना महामारी की तेज लहर के बीच इस बार लोहड़ी और मकर संक्रांति पर्व की रौनक पहले जैसी नहीं दिख रही है और लोग सादगी के साथ ही त्योहार मना रहे हैं। जहां तक अपने परिवारों से दूर रहकर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हमारे जवानों की बात है तो उन्होंने भी बड़ी सादगी लेकिन उत्साह के साथ लोहड़ी पर्व मनाया। आइये सबसे पहले बात करते हैं बारामूला की जहां एलओसी के पास अलाव जलाकर जवानों ने नाच गाकर लोहड़ी मनाई। वहीं बीएसएफ के जवानों ने भी जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में लोहड़ी का त्योहार मनाया। इस दौरान अलाव जलाया गया था। जवानों ने हंसी खुशी के साथ एक दूसरे से मिल बांटकर रेवड़ी, मूंगफली और गजक आदि खाई।

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पुस्तक विक्रेता परेशान

आजकल के इस ऑनलाइन जमाने में हर किसी को घर बैठे कोई भी चीज आसानी से हासिल हो जाती है। आपको बाजार जाकर कुछ खरीदने की जरूरत नहीं है बस शॉपिंग साइट के एप पर जाइये और फटाक से मनचाही वस्तुएं मंगवा लीजिये। इससे उपभोक्ता भी खुश हैं और ई-कॉमर्स कंपनियां भी लेकिन जो दुकानदार हैं वो परेशान हैं क्योंकि ग्राहकों की आवक कम हो गयी है। अब किताबों की दुकान को ही लीजिये। ऑनलाइन बाजार से पुस्तक विक्रेताओं को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रभासाक्षी संवाददाता ने श्रीनगर में जब प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेताओं से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से ऑनलाइन पुस्तकें मंगवाने पर पाठक को भारी छूट मिल रही है जिससे हमें काफी नुकसान हो रहा है। साथ ही पुस्तक विक्रेताओं का यह भी कहना है कि लोगों की अब पढ़ने में रुचि कम होती जा रही है जिससे पुस्तकों की बिक्री पर काफी असर पड़ा है।

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कश्मीर का मौसम

आइये अब बात करते हैं कश्मीर के मौसम की। कश्मीर में भीषण ठंड के कहर के बीच अधिकतर स्थानों पर न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों ने अगले कुछ दिनों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने और न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज करने का पूर्वानुमान लगाया है। अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार रात घाटी के अधिकतर इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई। केवल उत्तर कश्मीर के गुलमर्ग रिज़ॉर्ट में न्यूनतम तापमान एक दिन पहले के मुकाबले तापमान अधिक दर्ज किया गया। वहां, तापमान शून्य से 10.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जबकि एक दिन पहले वहां तापमान 11.0 डिग्री सेल्सियस था। गुलमर्ग में लगातार छह दिन से न्यूनतम तापमान शून्य से 10 डिग्री सेल्सियस नीचे या उससे भी कम है। उन्होंने बताया कि दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में न्यूनतम तापमान शून्य से 10.3 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा। जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में न्यूनतम तापमान शून्य से 3.4 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा। काजीगुंड में न्यूनतम तापमान शून्य से 7.8 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा। वहीं, दक्षिण कश्मीर के कोकेरनाग में तापमान शून्य से 7.5 डिग्री सेल्सियस नीचे और उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में शून्य से 4.2 सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया।

ऐसी कड़ाके की सर्दी में सूखी सब्जियों की बहुत मांग है। हम आपको बता दें कि कड़ाके की सर्दी के दौरान सूखी सब्जियों का उपयोग करना कश्मीर की सदियों पुरानी परंपराओं में से एक है। इस दौरान बाहर से सब्जियां आ नहीं पातीं इसलिए सूखी सब्जियों को ही मुख्य आहार माना जाता है।





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