Prabhasakshi NewsRoom: ब्रिटिश नहीं, पहली बार भारतीय तोपों से दी जाएगी राष्ट्रीय ध्वज को सलामी, Republic Day Parade 2023 में बनेंगे कई नये रिकॉर्ड

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हम आपको बता दें कि सरकार ने अपनी 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत निर्णय लिया है कि इस साल गणतंत्र दिवस पर 25 पाउंडर बंदूकों वाली पुरानी तोपों की बजाय नए 105 एमएम इंडिन फील्ड गन से राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी दी जाएगी।

आजादी का अमृत काल मना रहा भारत गुलामी की हर निशानी को मिटाने के अभियान में और आगे बढ़ गया है। इस बार गणतंत्र दिवस पर देश बहुत कुछ नया और बड़ा करने जा रहा है। राजपथ जोकि अब कर्तव्य पथ में तब्दील हो चुका है, उस पर जब इस 26 जनवरी को झांकियां निकलेंगी तो कई इतिहास रचे जाएंगे। दुनिया को इस बार भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की वो झलक देखने को मिलेगी जिसकी पहले की सरकारों ने कल्पना भी नहीं की थी। 74वें गणतंत्र दिवस परेड में सेना की ओर से प्रदर्शित किये जाने वाले सभी उपकरण भारत में बने हैं। यानि जब आप सेना की झांकियां देखेंगे तो एक से बढ़कर एक हथियार और शस्त्र प्रणालियां जो प्रदर्शित होंगी वो भारत में ही बनी होंगी। साथ ही इस बार गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज को ब्रिटिश तोपों से नहीं बल्कि पहली बार भारतीय तोपों से सलामी दी जायेगी। इसके अलावा आकाश में वायुसेना जो इतिहास रचेगी वो अलग है।

हम आपको बता दें कि सरकार ने अपनी 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत निर्णय लिया है कि इस साल गणतंत्र दिवस पर 25 पाउंडर बंदूकों वाली पुरानी तोपों की बजाय नए 105 एमएम इंडिन फील्ड गन से राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। इस बारे में दिल्ली क्षेत्र के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल भावनीश कुमार ने जानकारी देते हुए कहा है कि हम स्वदेशीकरण की ओर जा रहे हैं और वह समय दूर नहीं जब सभी उपकरण स्वदेशी होंगे।’’ उन्होंने बताया कि सेना द्वारा 74वीं गणतंत्र दिवस परेड़ में प्रदर्शित किए जा रहे सभी उपकरण भारत में बने हैं जिनमें आकाश हथियार प्रणाली और हेलीकॉप्टर, रुद्र और एएलएच ध्रुव शामिल हैं।

हम आपको बता दें कि 2281 फील्ड रेजीमेंट की 1940 के शुरुआत में निर्मित सात तोपों से राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में सलामी देने के लिए गोले दागे जाते थे। इनका निर्माण ब्रिटेन में हुआ था और इन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध में हिस्सा लिया था। वर्ष 1972 में 105 इंडियन फील्ड गन को डिजाइन किया गया था और गन कैरेज फैक्टरी जबलपुर और फील्ड गन फैक्टरी कानपुर में इनका निर्माण होता है और वर्ष 1984 से ही ये सेवा में हैं।

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उधर, कर्तव्य पथ पर इस बार दिखने वाली झांकियों की बात करें तो आपको बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी के पुनर्निमित कर्तव्य पथ पर इस बार की परेड में जहां दर्शकों को उत्तर प्रदेश के अयोध्या के दीपोत्सव की झांकी देखने को मिलेगी, वहीं हरियाणा की झांकी में भगवान कृष्ण के ‘विराट स्वरूप’ को प्रतिम्बित किया जाएगा। इतना ही नहीं, ऐतिहासिक गणतंत्र दिवस परेड में इस बार झारखंड के प्रसिद्ध देवघर मंदिर और जम्मू-कश्मीर की ‘अमरनाथ गुफा’ की झलक देखने को मिल सकेगी। जम्मू-कश्मीर ने पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन में पुनरुत्थान को प्रदर्शित करते हुए अमरनाथ के गुफा मंदिर को 'नया जम्मू-कश्मीर' विषय के साथ अपनी झांकी में चित्रित किया है।

राष्ट्रीय राजधानी के पुनर्निमित कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड के दौरान असम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गुजरात, पश्चिम बंगाल और कई अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की रंगारंग झांकियां दर्शकों का मन मोहेंगी। विभिन्न राज्यों द्वारा इस वर्ष अपनाई गई थीम काफी हद तक सांस्कृतिक विरासत और अन्य विषयों के अलावा 'नारी शक्ति' है। हम आपको बता दें कि भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत, आर्थिक और सामाजिक प्रगति को दर्शाने वाली कुल 23 झांकियां 26 जनवरी को औपचारिक परेड का हिस्सा होंगी। इन झांकियों में से 17 विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तथा छह झांकियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की होंगी। उत्तर प्रदेश की झांकी में भगवान राम और देवी सीता को वनवास से लौटने पर अयोध्या के लोगों द्वारा स्वागत करते हुए दिखाया गया है। अयोध्या दीपोत्सव उत्तर प्रदेश का मुख्य विषय है। उत्तर प्रदेश की झांकी के साइड पैनल अयोध्या में सरयू नदी के तट पर राम की पैड़ी को दर्शाते हैं और एक बड़ा 'दीपोत्सव द्वार' बनाया गया है। इसमें महाऋषि वशिष्ठ की मूर्ति भी है।

हरियाणा ने गणतंत्र दिवस की झांकी के लिए भगवद् गीता को अपनी प्रेरणा के रूप में चुना है, जिसमें चार अश्वों द्वारा खींचे जाने वाले रथ का एक विशाल मॉडल इसका मुख्य आकर्षण है। झांकी में भगवान कृष्ण को कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान में अर्जुन के सारथी के रूप में सेवा करते हुए और उन्हें उपदेश देते हुए दिखाया गया है। झांकी के सामने के हिस्से में भगवान कृष्ण को उनके 'विराट स्वरूप' रूप में दिखाया गया है।

पश्चिम बंगाल की झांकी में देवी दुर्गा की पवित्र छवि झलकती है। पश्चिम बंगाल की झांकी में कोलकाता की दुर्गा पूजा को दर्शाया गया है और यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में इसके शामिल होने का जश्न मनाया गया है। असम की झांकी में पौराणिक अहोम सेनापति लचित बोरफुकन और प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर सहित इसके सांस्कृतिक स्थलों को गर्व से दिखाया गया है।

गृह मंत्रालय दो झांकी प्रदर्शित करेगा, जिनमें स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की एक-एक झांकी शामिल होगी। गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार एनसीबी की झांकी को शामिल किया गया है, जिसके जरिये नशा से दूरी का सार्वभौमिक संदेश दिया जाएगा। इसके अलावा कृषि मंत्रालय, जनजातीय मामलों के मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय की एक-एक झांकी कर्तव्य पथ पर दर्शकों को आकर्षित करेगी। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की झांकी भी कर्तव्य पथ पर नजर आएगी। इस साल की परेड में रेल मंत्रालय की कोई झांकी नहीं होगी। हम आपको बता दें कि पिछले साल राजपथ का नाम बदलकर 'कर्तव्य पथ' किए जाने के बाद इस ऐतिहासिक पथ में आयोजित यह पहला गणतंत्र दिवस समारोह होगा। हम आपको यह भी बता दें कि सेंट्रल विस्टा परियोजना में लगे श्रमिकों और उनके परिवारों को इस बार के गणतंत्र दिवस परेड पर प्रधानमंत्री के अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।

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इस बीच, दिल्ली में गणतंत्र दिवस के लिए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये गये हैं। राजधानी में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों का कड़ा पहरा है। इसके अलावा गणतंत्र दिवस के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी में ड्रोन, पैराग्लाइडर, माइक्रोलाइट विमान और गर्म हवा के गुब्बारों सहित उप-पारंपरिक हवाई प्लेटफॉर्म का संचालन प्रतिबंधित कर दिया गया है। वहीं लाल किले के पास सुरक्षा के अभेद्य प्रबंध किये गये हैं और चौबीसों घंटे सतत निगरानी की जा रही है।

-नीरज कुमार दुबे

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