पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में 5.8 प्रतिशत की गिरावट: सरकार

सरकार ने संसद में बताया कि पश्चिम एशिया संघर्ष की शुरुआत के बाद से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में 5.8 प्रतिशत की गिरावट आई है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होने के बावजूद देश के आर्थिक बुनियादी ढांचे मजबूत बने हुए हैं।
नयी दिल्ली, 28 जुलाई सरकार ने मंगलवार को संसद में कहा कि वैश्विक बाजारों में एक प्रमुख भागीदार के रूप में भारत की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय रुझानों से जुड़ी हुई है और पश्चिम एशिया संघर्ष की शुरुआत के बाद से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में 5.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक बाजारों में एक प्रमुख भागीदार के रूप में, भारत की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय रुझानों से भी जुड़ी हुई है, जो इसकी विनिमय दर के उतार-चढ़ाव को प्रभावित करती है।
पश्चिम एशिया संघर्ष की शुरुआत के बाद से (27 फरवरी से 22 जुलाई, 2026 तक) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में 5.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।’’ उनसे सवाल किया गया था, ‘‘विशेष रूप से रुपये का दबाव, आयात की बढ़ती लागतों और औद्योगिक व कॉर्पोरेट क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभावों के संदर्भ में देश की अर्थव्यवस्था पर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का क्या प्रभाव पड़ा है।’’ इसके साथ ही वित्त राज्य मंत्री चौधरी ने कहा कि वर्तमान में, भारतीय अर्थव्यवस्था के वृहद आर्थिक मूल तत्व मजबूत बने हुए हैं। पिछले तीन साल के दौरान वास्तविक जीडीपी में लगातार सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू मांग, संतुलित कॉर्पोरेट बैलेंस शीट और विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन द्वारा आर्थिक विकास को समर्थन दिया जा रहा है।
वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए विभिन्न अहम संकेतक भी आर्थिक गतिविधि और घरेलू मांग में सतत गति की ओर इशारा करते हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के निरंतर प्रतिरोधकता को दर्शाता है। चौधरी ने कहा कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) ने अप्रैल 2026 में साल-दर-साल (वाईओवाई) आधार पर 4.9 प्रतिशत और मई 2026 में साल-दर-साल आधार पर 5.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जो बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद निरंतर निवेश-आधारित औद्योगिक विकास का संकेत देता है।
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