Jammu University में Jinnah पर संग्राम, ABVP का सवाल- बंटवारे के गुनहगार सिलेबस में क्यों?

Jammu University
ANI
एकता । Mar 22 2026 2:28PM

पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस में जिन्ना को शामिल करने को लेकर जम्मू यूनिवर्सिटी में छात्र संगठन ABVP और प्रशासन के बीच विवाद छिड़ गया है, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने इसे देश के बंटवारे के जिम्मेदार को पढ़ाना बताया। यूनिवर्सिटी ने इसे अकादमिक फैसला बताते हुए स्पष्ट किया है कि सिलेबस में गांधी, अंबेडकर और सावरकर जैसे अन्य विचारक भी शामिल हैं और यह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है।

जम्मू यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। विवाद की मुख्य वजह पॉलिटिकल साइंस के पोस्टग्रेजुएट सिलेबस में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना पर आधारित एक चैप्टर को शामिल करना है।

ABVP के कार्यकर्ताओं ने कैंपस में जमा होकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और मांग की कि मॉडर्न इंडियन पॉलिटिकल थॉट मॉड्यूल से इस चैप्टर को तुरंत हटाया जाए। प्रदर्शनकारियों ने जिन्ना के पोस्टर फाड़ते हुए चेतावनी दी कि अगर सिलेबस में बदलाव नहीं हुआ, तो वे पूरे जम्मू-कश्मीर में अपना आंदोलन और तेज करेंगे।

देश के बंटवारे के जिम्मेदार लोगों को क्यों पढ़ाएं?

ABVP के प्रदेश सचिव सन्नक श्रीवत्स का कहना है कि सर सैयद अहमद खान और मोहम्मद अली जिन्ना जैसे लोगों ने 'टू-नेशन थ्योरी' को बढ़ावा दिया था और देश के बंटवारे में मुख्य भूमिका निभाई थी।

परिषद का तर्क है कि अल्पसंख्यक प्रतिनिधियों के तौर पर ऐसे लोगों को पढ़ाना राष्ट्रीय भावनाओं के खिलाफ है और छात्रों के लिए स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना है कि अगर अल्पसंख्यकों के बारे में पढ़ाना ही है, तो उन महान हस्तियों को शामिल किया जाना चाहिए जिन्होंने देश की एकता और समाज की भलाई के लिए सचमुच काम किया हो।

इसे भी पढ़ें: सत्ता के शीर्ष पर 8931 दिन! PM Modi ने तोड़ा Pawan Chamling का Record, बने नंबर-1 लीडर

यूनिवर्सिटी का बचाव

दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल साइंस विभाग के प्रमुख बलजीत सिंह मान ने सिलेबस का बचाव करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से एक अकादमिक फैसला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिलेबस में केवल जिन्ना या इकबाल ही नहीं, बल्कि महात्मा गांधी, बी.आर. अंबेडकर, सावरकर, गोलवलकर, नेहरू और सरदार पटेल जैसे सभी प्रमुख विचारकों को पढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि इन विषयों को हटाने से उन छात्रों का नुकसान होगा जो नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि वहां इनसे जुड़े सवाल पूछे जाते हैं।

इसे भी पढ़ें: भारत की Energy Supply की टेंशन खत्म! एक तरफ Russia से आया Crude Oil तो दूसरी तरफ America ने भेजा ईंधन

UGC के नियमों का हवाला

विभाग ने जोर देकर कहा कि यह सिलेबस एक कमेटी द्वारा पास किया गया है और यह यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। बलजीत सिंह मान के अनुसार, राजस्थान, महाराष्ट्र और कोलकाता की कई बड़ी यूनिवर्सिटीज में भी यह कंटेंट पढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी का मकसद किसी खास विचारधारा को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि छात्रों के सामने अलग-अलग नजरिए पेश करना है ताकि वे खुद सही और गलत की पहचान कर सकें। उनके अनुसार, ऐतिहासिक स्पष्टता के लिए इन विचारकों के जीवन में आए बदलावों को समझना जरूरी है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़