झूठ बोलने में कमलनाथ भी चल पड़े दिग्विजय सिंह की राह परः विष्णुदत्त शर्मा

झूठ बोलने में कमलनाथ भी चल पड़े दिग्विजय सिंह की राह परः विष्णुदत्त शर्मा

शर्मा ने कहा कि कमलनाथ को इसका जवाब देना चाहिए कि आपकी सरकार के दौरान आयकर के छापों में 287 करोड़ पकड़े गए थे या नहीं। सरकार के अंदर घोटाले हुए थे। शर्मा ने कहा कि कमलनाथ अब झूठ बोलकर मध्य प्रदेश की जनता को गुमराह नहीं कर सकते हैं

भोपाल। यह कमलनाथ का पहला झूठ नहीं है, जो उन्होंने इंदौर में बोला है। झूठ बोलने का रिकॉर्ड बनाने वाले दो लोग हैं, कमलनाथ और दिग्विजय सिंह। ये दोनों देश में ऐतिहासिक झूठ बोलने वाले व्यक्तियों में शुमार होते हैं। अब कमलनाथ भी उसी राह पर चल पडे हैं, जिस पर दिग्विजय सिंह चल रहे हैं। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने सोमवार को मीडिया से चर्चा के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही। 

 

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जनता गुमराह नहीं होगी, आपकी नस-नस को पहचानती है

प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि झूठ बोलकर सत्ता में आई कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने मध्य प्रदेश के साथ, यहां के किसानों और गरीबों के साथ धोखा किया। उस सरकार ने गरीब कल्याण की योजनाओं को बंद करके भारी भ्रष्टाचार किया। श्री शर्मा ने कहा कि भ्रष्टाचार की बात मैं ऐसे नहीं कह रहा हूं, जिन लोगों के नाम मैंने चुनाव अभियान के दौरान लिये अब वो एक-एक करके सभी जेल जा रहे हैं।  शर्मा ने कहा कि कमलनाथ को इसका जवाब देना चाहिए कि आपकी सरकार के दौरान आयकर के छापों में 287 करोड़ पकड़े गए थे या नहीं। सरकार के अंदर घोटाले हुए थे। शर्मा ने कहा कि कमलनाथ अब झूठ बोलकर मध्य प्रदेश की जनता को गुमराह नहीं कर सकते हैं, प्रदेश की जनता ने आपकी नस-नस को पहचान लिया है।

 

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कमलनाथ-दिग्विजय के गुरूर ने तोड़ी सहमति से निर्वाचन की परंपरा

प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने एक प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के सहमति से निर्वाचन की परंपरा हमने नहीं तोड़ी। ये परंपरा कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के गुरूर ने तोड़ी है। कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को लगा था कि हम स्थायी रूप में सत्ता में आ गए है। हम तो हमेशा लोकतंत्र में विपक्ष को भी साथ लेकर चलने में विश्वास करते हैं। उन्होंने ही परंपरा तोड़कर गुरूर और घमंड दिखाया था, अब उन्हें इसका खामियाजा तो भुगतना पड़ेगा।





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