Karnataka Cabinet ने तुलु को दी दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा के रूप में मान्यता

कर्नाटक मंत्रिमंडल ने तुलु को राज्य की दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा का दर्जा देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही तटीय कर्नाटक के लिए एक अलग पर्यटन नीति लाने और 32,611 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने शुक्रवार को कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने तुलु को राज्य की दूसरी अतिरिक्त के रूप में मान्यता देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्य रूप से दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में बोली जाने वाली तुलु में शैक्षिक और सांस्कृतिक विकास की काफी संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से साझा किए गए मंत्रिमंडल के नोट में कहा गया है कि यह ‘‘दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा’’ होगी।
शिवकुमार ने यह भी कहा कि राज्य सरकार तटीय कर्नाटक के लिए अलग पर्यटन नीति लाएगी, क्योंकि यहां लंबा समुद्री तट, समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और धार्मिक एवं विरासत स्थल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने 32,611 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इनमें 16,000 करोड़ रुपये ग्रामीण विकास और इतनी ही राशि तटीय क्षेत्र के लिए निर्धारित की गई है।
कर्नाटक तुलु साहित्य अकादमी के अध्यक्ष तारानाथ गट्टी कापिकाड ने इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री शिवकुमार को धन्यवाद दिया। कापिकाड ने कहा कि सरकार ने तुलु को आधिकारिक पहचान देकर चुनावी घोषणा पत्र में किए वादे को पूरा किया। उन्होंने कन्नड़ एवं संस्कृति मंत्री शिवराज एस. तांगाडगी, दक्षिण कन्नड़ जिला के प्रभारी मंत्री यूटी खादर, पुत्तुर के विधायक अशोक राय और अन्य विधायकों का भी आभार प्रकट किया।
कापिकाड ने तुलु को आधिकारिक दर्जा देने की सतत मांग कर रहे भारत और विदेश में तुलु संगठनों का भी आभार प्रकट किया। इस निर्णय को तुलु बोलने वाले समुदाय के लिए ऐतिहासिक दिन करार देते हुए कापिकाड ने कहा कि इससे दुनियाभर में तुलु बोलने वाले लोगों का विश्वास बढ़ेगा और इस के विकास में योगदान मिलेगा। उन्होंने कहा कि तुलु का करीब 3,000 वर्षों का इतिहास है और इस की पहचान के लिए यह मंत्रिमंडल का एक महत्वपूर्ण निर्णय है।
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