स्कूलों में जंक फूड पर रोक के लिए FSSAI से स्पष्ट नियम मांगेगा Kerala

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तिरुवनंतपुरम में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने बताया कि बच्चों के खानपान को सुधारने के लिए सरकार एफएसएसएआई से वसा, चीनी और नमक की सीमा संबंधी नियमों को अंतिम रूप देने का आग्रह करेगी। स्पष्ट वैज्ञानिक परिभाषा न होने से परिसरों में अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों की पहचान और बिक्री पर नियंत्रण कठिन हो रहा है। केंद्र के प्रस्तावित मसौदे में ठोस और तरल खाद्य पदार्थों के लिए अलग-अलग मानक तय किए गए हैं।

केरलम के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा कि राज्य सरकार बच्चों में अस्वास्थ्यकर खान-पान की आदतों को रोकने के अपने प्रयासों को तेज कर रही है। इसके तहत, राज्य सरकार वसा, चीनी और नमक की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों की पहचान करने और उन्हें विनियमित करने के नियमों के बारे में केंद्रीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण से स्पष्टीकरण मांगेगी। मंत्री ने सोमवार शाम जारी एक बयान में कहा कि राज्य भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को पत्र लिखकर प्रस्तावित नियमों को जल्द अंतिम रूप देने का आग्रह करेगा।

इससे जंक फूड उत्पादों की पहचान करने और स्कूल परिसरों में उनकी बिक्री को नियंत्रित करने या प्रतिबंधित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘‘जंक फूड की कोई सटीक वैज्ञानिक परिभाषा नहीं होने के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि किन खाद्य पदार्थों को इस श्रेणी में रखा जाए और उनकी बिक्री को कैसे नियंत्रित किया जाए।’’ हालांकि वसा, चीनी और नमक की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों को एचएफएसएस उत्पादों के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है लेकिन यह तय करने के लिए स्पष्ट मानकों की आवश्यकता है कि इन सामग्री की कितनी मात्रा को ‘अत्यधिक’ माना जाए। मुरलीधरन ने कहा कि ऐसे मानदंडों के अभाव में खाद्य उत्पादों की सूची तैयार करना और स्कूलों के आसपास उनकी बिक्री को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया है।

एफएसएसएआई ने सात अगस्त को मसौदा नियम प्रकाशित किए थे। इनमें वसा, चीनी और नमक की अधिक मात्रा वाले उत्पादों की पहचान करने के लिए ठोस और तरल खाद्य पदार्थों में इन सामग्री की मात्रा की विशिष्ट सीमाएं तय करने का प्रस्ताव है। प्रस्ताव के तहत जिन ठोस खाद्य पदार्थों में प्रति 100 ग्राम में 4.2 ग्राम से अधिक वसा, तीन ग्राम चीनी और 0.625 ग्राम नमक होगा, वे संबंधित निर्धारित सीमाओं से अधिक माने जाएंगे।

तरल खाद्य पदार्थों के लिए प्रस्तावित सीमाएं प्रति 100 मिलीलीटर में 1.5 ग्राम से अधिक वसा, दो ग्राम चीनी और 0.175 ग्राम नमक हैं। राज्य सरकार ने कहा कि इन नियमों को अंतिम रूप देकर कानूनी ढांचे में शामिल करने की जरूरत है ताकि ऐसे उत्पादों की पहचान करने और स्कूल परिसरों में उनकी बिक्री पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट आधार मिल सके। प्रस्तावित नियामक उपायों के साथ-साथ केरलम बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने तथा उनमें स्वस्थ खानपान की आदतों को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम भी चला रहा है।

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