Medha Patkar की ओर से दायर मानहानि मामले में उपराज्यपाल सक्सेना बरी

पाटकर और सक्सेना के बीच वर्ष 2000 से ही कानूनी विवाद चल रहा था। पाटकर ने उनके और नर्मदा बचाओ आंदोलन के खिलाफ विज्ञापन प्रकाशित कराने के लिए सक्सेना के विरुद्ध मुकदमा दायर किया था।
राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने कार्यकर्ता मेधा पाटकर द्वारा दायर 25 साल पुराने मानहानि मामले में दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना को बृहस्पतिवार को बरी कर दिया और कहा कि शिकायतकर्ता अपने आरोपों को साबित करने में नाकाम रहीं।
यह आदेश प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट राघव शर्मा ने दिया। मार्च 2025 में, अदालत ने मामले में अतिरिक्त गवाहों की गवाही के लिए पाटकर के आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह वास्तविक आवश्यकता के बजाय मुकदमे में देरी करने का जानबूझकर किया गया प्रयास है।
पाटकर और सक्सेना के बीच वर्ष 2000 से ही कानूनी विवाद चल रहा था। पाटकर ने उनके और नर्मदा बचाओ आंदोलन के खिलाफ विज्ञापन प्रकाशित कराने के लिए सक्सेना के विरुद्ध मुकदमा दायर किया था।
उस समय अहमदाबाद स्थित काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज नामक एक गैर सरकारी संगठन के प्रमुख रहे सक्सेना ने भी 2001 में पाटकर के खिलाफ दो मुकदमे दायर किए थे और आरोप लगाया था कि पाटकर ने उनके खिलाफ एक टीवी चैनल पर अपमानजनक टिप्पणी की है और प्रेस में मानहानिकारक बयान जारी किए।
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