Madmaheshwar Yatra पर अस्थायी रोक, Uttarakhand में भूस्खलन से पैदल मार्ग हुआ बाधित

रुद्रप्रयाग जिले के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने प्रतिकूल मौसम और भूस्खलन के खतरों को देखते हुए मदमहेश्वर मंदिर की पैदल यात्रा को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। बनतोली में मोरखंडा नदी का लकड़ी का पुल बहने से यात्रियों को ट्रॉली से नदी पार कराई जा रही थी, जिसकी मरम्मत में दो से तीन दिन लगेंगे। पंचकेदार शृंखला के इस धाम में सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान उमड़ी भीड़ के कारण सुरक्षा चुनौतियां खड़ी हो गई थीं।
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में 11,473 फुट की ऊंचाई पर स्थित मदमहेश्वर मंदिर की यात्रा तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तत्काल प्रभाव से अस्थायी तौर पर रोक दी गई है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर मदमहेश्वर जाने वाले पैदल मार्ग को जोखिमपूर्ण मानते हुए यह आदेश दिए हैं।
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पंचकेदार शृंखला के इस प्रमुख मंदिर तक पहुंचने के लिए 14.50 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। निर्माण कार्य और भूस्खलन के कारण मार्ग पर आवागमन जोखिमपूर्ण बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, प्रतिकूल मौसम, भूस्खलन की घटनाओं और यात्रा मार्ग पर उत्पन्न सुरक्षा संबंधी जोखिमों को देखते हुए अगले आदेश तक यात्रा अस्थायी तौर पर रोक दी गई है।
उन्होंने बताया कि कई श्रद्धालु और यात्री सुरक्षा चेतावनियों की अनदेखी करते हुए भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से जबरन गुजर रहे हैं तथा जोखिमपूर्ण स्थानों पर तस्वीरें लेने और ‘सेल्फी’ लेने का प्रयास कर रहे हैं जिससे किसी भी समय गंभीर दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है। इसके अलावा, हाल में बनतोली में मोरखंडा नदी पर बना लकड़ी का अस्थायी पुल भी नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण बह गया। अब इस स्थान पर यात्रियों को ट्रॉली के माध्यम से नदी पार कराई जा रही है।
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अधिकारियों ने बताया कि ट्रॉली की क्षमता एक बार में केवल दो व्यक्तियों को ले जाने की है, लेकिन सावन और कांवड़ यात्रा के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से ट्रॉली स्थल पर अत्यधिक भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो रही है। कई बार यात्रियों द्वारा ट्रॉली संचालकों और श्रमिकों के साथ दुर्व्यवहार किए जाने तथा तस्वीरें लेने की होड़ के कारण भी सुरक्षा संबंधी गंभीर चुनौतियां सामने आई हैं। लोक निर्माण विभाग ने ट्रॉली के सुरक्षित संचालन के लिए उसकी मरम्मत और रखरखाव में कम से कम दो से तीन दिन का समय लगने की बात कही है।
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