दीदी का यह दांव क्या बंगाल में फिर से जमा पाएगा TMC के पांव ?

By अंकित सिंह | Publish Date: Jul 3 2019 6:20PM
दीदी का यह दांव क्या बंगाल में फिर से जमा पाएगा TMC के पांव ?
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लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से मिली करारी शिकस्त और राज्य में बढ़ते भाजपा के प्रभाव को देखते हुए ममता बनर्जी ने प्रदेश में आर्थिक आरक्षण लागू करने की घोषणा की है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के लोगों को खुशखबरी देते हुए पिछड़े सवर्णों को सरकारी नौकरी में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया है। हाल ही में मोदी सरकार ने सवर्ण आरक्षण को लेकर संसद में नया कानून बनाया था। अब तक ममता केंद्र की मोदी सरकार की योजनाओं और निर्णयों का विरोध करती रही हैं पर जिस तरीके से उन्होंने आरक्षण को लेकर केंद्र के नए प्रवधानों को राज्य में लागू करने का फैसला किया है वह अपने-आप में आश्चर्यजनक है। बंगाल सरकार इस आरक्षण का लाभ उन लोगों को नहीं देगी जो पहले से एसटी, एससी, ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण का लाभ ले रहे है। 

ममता का यू-टर्न
ममता बनर्जी ने पहले आरक्षण लागू करने के मोदी सरकार के फैसले पर कई सवाल खड़े किए थे। ममता ने कहा था कि मोदी सरकार लोगों के साथ धोखा कर रही है। सरकार के इस फैसले को चुनावी फैसला करार देते ममता ने केंद्र सरकार से इस पर सफाई मांगी थी और कहा था कि सरकार देश के बेरोजगार युवाओं को ठग रही है। ममता ने यहां तक कह दिया था कि मोदी सरकार आरक्षण खत्म करने की ओर बढ़ रही है। उन्होंने आर्थिक आधार पर आरक्षण की संवैधानिकता पर भी सवाल खड़े किए थे।
क्या है सवर्ण आरक्षण
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर तबके को सरकारी नौकरियों एवं शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण देने संबंधी विशेष प्रावधान को जनवरी में मंजूरी दी थी। मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले एक बड़ा चुनावी दांव खेलते हुए सवर्ण आरक्षण पेश किया था। यह दांव ऐसे समय में खेला गया था जब भाजपा को तीन राज्यों में करारी शिकस्त मिसी थी। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने सरकार के इस फैसले को ऐतिहासिक कदम बताया था। इस प्रावधान को मोदी सरकार एसटी, एससी एवं ओबीसी आरक्षण में बिना छेड़छाड़ किए लायी थी। इसका लाभ उन लोगों को मिलना है, जिनकी आय सालाना आठ लाख रुपए से कम है। आनन-फानन में सरकार ने आरक्षण संशोधन विधेयक को दोनों सदनों में भारी बहुमत से पास करवा लिया था। लोकसभा चुनाव के प्रचार में भी मोदी और शाह ने इसका बार-बार जिक्र किया जिसका फायदा पार्टी को हुआ। गुजरात इसे लागू करने वाला पहला राज्य बना था।  
ममता ने यह फैसला क्यों किया
लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से मिली करारी शिकस्त और राज्य में बढ़ते भाजपा के प्रभाव को देखते हुए ममता बनर्जी ने प्रदेश में आर्थिक आरक्षण लागू करने की घोषणा की है। हाल में देखें तो बंगाल में पार्टी के सिमटती जनाधार ने तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी को चिंतित कर दिया है। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बंगाल की 18 सीटों पर जीत हासिल की। भाजपा से उन्हें लगातार चुनौती मिल रही है। TMC जो कि बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी है वह 22 पर सिमट कर रह गई। भाजपा केंद्रीय योजनाओं के लाभ का जिक्र कर राज्य में ममता पर आक्रमक रहती है। एक के बाद एक कई TMC नेता भाजपा का दामन थाम चुके हैं। ममता को लगातार भाजपा से कड़ी चुनौती मिल रही है। ममता को ऐसा लगता है कि भाजपा लोगों को लुभावने सपने दिखाकर उन्हें अपने पाले में खीचंने में कामयाब हो पा रही है। अत: केंद्रीय योजनाओं को राज्य में लागू कर ममता श्रेय लेने की होड़ में जुट गई हैं। राज्य में 2021 में विधानसभा के चुनाव होने हैं और राजनीतिक जानकार बताते हैं कि भाजपा वहां ममता के सामने कड़ी चुनौती पेश कर सकती है। ममता के लिए सत्ता में वापसी करना असल परीक्षा होगी। बता दें कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 295 सीटें हैं और 2016 में हुए चुनाव में TMC 207 सीटें जीतकर सत्ता में आई थी। 


 

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