आजादी को लेकर मणिशंकर अय्यर का विवादित बयान, कहा- 2014 से देश अमेरिका का गुलाम

आजादी को लेकर मणिशंकर अय्यर का विवादित बयान, कहा- 2014 से देश अमेरिका का गुलाम

अपने बयान में मणिशंकर अय्यर ने कहा कि गुटनिरपेक्षता की बात पिछले 7 सालों से नहीं हो रही है, शांति की बात नहीं हो रही है। हम अमेरिकियों के गुलाम बनकर बैठे हैं और कहते हैं कि चीन से बचों। इसके साथ उन्होंने कहा कि चीन के सबसे करीबी के दोस्त तो आप ही हो।

अक्सर अपने बयानों की वजह से सुर्खियों में रहने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर एक बार फिर से चर्चा में हैं। इस बार आजादी को लेकर उन्होंने विवादित बयान दे दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने इंडो-रसिया फ्रेंडशिप सोसाइटी के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि साल 2014 के बाद से हम अमेरिका के गुलाम बन गए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पिछले 7 साल से हम देख रहे हैं कि हम अमेरिकियों के गुलाम बनकर बैठे हैं। 

इसे भी पढ़ें: सत्ता में मौजूद लोग सिर्फ हिंदू धर्म के लोगों को असली भारतीय मानते हैं, शेष को नहीं: मणिशंकर अय्यर

अपने बयान में मणिशंकर अय्यर ने कहा कि गुटनिरपेक्षता की बात पिछले 7 सालों से नहीं हो रही है, शांति की बात नहीं हो रही है। हम अमेरिकियों के गुलाम बनकर बैठे हैं और कहते हैं कि चीन से बचों। इसके साथ उन्होंने कहा कि चीन के सबसे करीबी के दोस्त तो आप ही हो। इतना ही नहीं, मणि शंकर अय्यर ने भारत और रूस के रिश्ते पर भी अपनी बात कही। मणिशंकर अय्यर ने भारत और रूस के रिश्तो को बरसों पुराना बताया और कहा कि जब से मोदी सरकार आई है यह रिश्ता कमजोर हुआ है। मणिशंकर अय्यर ने कहा कि 2014 तक रूस के साथ हमारे संबंध जो हुआ करते थे उसमें काफी कमी आ चुकी है। 

पहले भी दिया था विवादित बयान

इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि आज सत्ता में बैठे लोग हिंदू धर्म में विश्वास करने वाली 80 प्रतिशत आबादी को ही असली भारतीय मानते हैं और शेष लोगों को गैर भारतीय मानते हैं। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि हमारे बीच चंद लोग हैं, जो आज सत्ता में हैं, उनका कहना है कि जो 80 प्रतिशत लोग हिंदू धर्म को मानते हैं, वो ही असली भारतीय हैं, बाकी लोग गैर भारतीय हैं, हमारे देश में वो मेहमान के तौर पर रह रहे हैं, जब चाहें उन्हें निकाल देंगे।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।