भाजपा को मायावती की सलाह, कहा- जातिवाद व साम्प्रदायिकता से खुद को करें अलग

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 19, 2019   15:02
भाजपा को मायावती की सलाह, कहा- जातिवाद व साम्प्रदायिकता से खुद को करें अलग

ख़ासकर सत्ताधारी पार्टी के लोगों को चाहिये कि वे केवल उन्हें स्मरण करने की रस्म नहीं निभाएं बल्कि इससे पहले अपने मन को संकीर्णता, जातिवाद व साप्रदायिकता आदि से पाक करें क्योंकि छोटे मन से कोई भी बड़ा नहीं हो सकता।

लखनऊ। संत रविदास जयन्ती के अवसर पर देश को बधाई देते हुये बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को कहा कि भाजपा द्वारा संकीर्ण, जातिवादी व साम्प्रदायिक द्वेष का व्यवहार करने के कारण ही देश में आज अनेकों प्रकार की विषमतायें व विकृतियाँ पहले से काफी ज्यादा बढ़ गयी हैं और समाज का तानाबाना बिखरता जा रहा है। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने अपना सारा जीवन इन्सानियत का संदेश देने में गुज़ारा और इस क्रम में ख़ासकर जातिभेद के ख़िलाफ आजीवन कड़ा संघर्ष करते रहे। संत रविदास जयन्ती पर मंगलवार को जारी अपने बयान में उन्होंने कहा कि आज के संकीर्ण व जातिवादी माहौल में उनके मानवतावादी संदेश की बहुत ही ज़्यादा अहमियत है और मन को हर लिहाज़ से वास्तव में चंगा करके जीवन गुजारने की ज़रूरत है। 

ख़ासकर सत्ताधारी पार्टी के लोगों को चाहिये कि वे केवल उन्हें स्मरण करने की रस्म नहीं निभाएं बल्कि इससे पहले अपने मन को संकीर्णता, जातिवाद व साप्रदायिकता आदि से पाक करें क्योंकि छोटे मन से कोई भी बड़ा नहीं हो सकता। मायावती ने कहा कि ख़ासकर सत्ताधारी पार्टी भाजपा द्वारा संकीर्ण, जातिवादी व साम्प्रदायिक द्वेष का व्यवहार करने के कारण ही देश में आज अनेकों प्रकार की विषमतायें व विकृतियाँ पहले से काफी ज्यादा बढ़ गयी हैं और समाज का तानाबाना बिखरता जा रहा है जिससे देश की 130 करोड़ आमजनता का दिन-प्रतिदिन का जीवन काफी विषम और कष्टकारी होता जा रहा है। 


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भाजपा के लोग सत्ता में रहने के बावजूद हर समस्या का राजनीतिकरण करके केवल लम्बी-चैड़ी बयानबाज़ी व लोगों को भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करने की कोशिश में ही लगातार लगे रहते हैं और वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के अति-घातक आतंकी हमले के मामले में भी देश में हर तरफ यही दिखाई पड़ रहा है। भाजपा को समझना चाहिये कि इस प्रकार की राजनीति से देश का कोई भला होने वाला नहीं है। इसलिये बीजेपी को देश हित के मद्देनज़र मूल तौर पर अपना रवैया बदलने की जरूरत है।





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