रूसी विदेश मंत्री का मध्यस्थता वाला बयान, क्या मानवीय तबाही को कम करने के लिए राष्ट्रीय हित में आगे आएगा भारत?

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अभिनय आकाश । Apr 1 2022 7:54PM

रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत मॉस्को और कीव के बीच मध्यस्थता कर सकता है। उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच अभी तक हुईं वार्ताएं युद्ध समाप्त करने के लिए समाधान तक पहुंचने में असफल रही हैं।

एक तरफ जब पूरी दुनिया विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। वहीं दूसरी ओर वैश्विक राजनीति में बड़ी उछल-पुथल जारी है। युद्ध के बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावारोव के भारत दौरे पर अमेरिका समेत पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 40 मिनट तक बातचीत की है। रूसी विदेश मंत्री के साथ पीएम मोदी की यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच बातचीत को लेकर रूसी विदेश मंत्री ने अमेरिका का समर्थन करने वाले सभी पश्चिमी देशों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि हमारे सभी पश्चचिमी दोस्त मौजूदा समय में सभी अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को यूक्रेन विवाद के साथ जोड़कर उसका महत्व कम करने में लगे हुए हैं। उन्होंने भारत के इस मुद्दे पर तटस्थ बने रहने पर जमकर सराहना की और कहा कि वो किसी से लड़ाई नहीं चाहते हैं। 

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सरर्गेई ने कहा कि वो भारत के इस फैसले की सराहना करना चाहते हैं कि उसने पूरे विवाद को जाना, समझा और एकतरफा कोई फैसला नहीं लिया। प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करने से पहले एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत मॉस्को और कीव के बीच मध्यस्थता कर सकता है। उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच अभी तक हुईं वार्ताएं युद्ध समाप्त करने के लिए समाधान तक पहुंचने में असफल रही हैं।

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पश्चिमी प्रतिबंधों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए रूस की क्षमता में कमी होना लाजिमी है। जिससे यूरेशिया में चीन की स्थिति और मजबूत होगी। ऐसा नतीजा भारत को परेशानी में डाल सकता है। भारत की विदेश नीति में रूस एक महत्वपूर्ण भागेदार है चाहे मध्य एशिया हो या अफ़ग़ानिस्तान या पश्चिम एशिया, मॉस्को का प्रभाव सकारात्मक रूप से देखा जाता रहा है। मानवीय तबाही को कम करने और राष्ट्रीय हित को बनाए रखने की कोशिश में अगर भारत रूस के प्रति मित्रता का व्यवहार रखने वाले दूसरे देशों के प्रयासों के साथ मिलकर यूक्रेन के साथ बातचीत को बढ़ावा देने के लिए आगे आता है तो ये रूस और यूक्रेन के साथ-साथ दुनिया के लिए भी बेहतर विकल्प हो सकता है। 

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