चंडीगढ़ में आयोजित Rodrigues Memorial Seminar में सैन्य विशेषज्ञों ने आर्टिलरी के आधुनिकीकरण पर मंथन किया

भारतीय सेना की रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी और सीएलडब्ल्यूएस के सहयोग से चंडीगढ़ में जनरल एस एफ रोड्रिग्स स्मृति संगोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान रक्षा विशेषज्ञों और शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने भविष्य के युद्ध में नेटवर्क आधारित सटीक प्रहार और तोपखाने की बदलती भूमिका पर गहन चर्चा की।
जनरल एस. एफ. रोड्रिग्स स्मृति संगोष्ठी के चौथे संस्करण में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, रक्षा उद्योग के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया तथा युद्ध के बदलते स्वरूप और तोपखाने के भविष्य पर चर्चा की। पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एस एफ रोड्रिग्स की स्मृति में आयोजित इस वार्षिक संगोष्ठी का आयोजन भारतीय सेना की रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी ने सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (सीएलडब्ल्यूएस) के सहयोग से शनिवार को चंडीगढ़ में किया। संगोष्ठी की शुरुआत पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एस एफ रोड्रिग्स को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई।
सैन्य आधुनिकीकरण में उनके योगदान और भविष्य को ध्यान में रखकर अपनाए गए उनके दृष्टिकोण को भारतीय सेना के लिए प्रासंगिक बताया गया। वह 1990 से 1993 तक थलसेना के 15वें प्रमुख रहे और बाद में 2004 से 2010 तक पंजाब के राज्यपाल रहे। इस वर्ष की संगोष्ठी का विषय ‘‘तोपखाने के जरिये नेटवर्क आधारित सटीक प्रहार क्षमता से असममित क्षमता’’ था।
चर्चा में दुनिया भर के संघर्षों से मिले सबक और असममित सैन्य क्षमताओं में उभरते रुझानों पर विचार किया गया। बहु-क्षेत्रीय अभियान (एमडीओ) में स्वचालन और निर्णय लेने में बढ़त के महत्व पर भी जोर दिया गया। एक आधिकारिक बयान में रविवार को कहा गया कि संगोष्ठी में सटीक प्रहार क्षमता, लंबी दूरी के प्रहार तथा ऐसे निर्बाध नेटवर्क के विकास जैसे प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई, जो युद्धक्षेत्र में तेजी से, सटीक और निर्णायक प्रभाव पैदा करने में सक्षम हो।
उद्घाटन संबोधन में तोपखाना महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अनूप शिंगल ने कहा कि भविष्य में तोपखाने की प्रभावशीलता केवल अलग-अलग हथियार प्रणालियों की मारक क्षमता या कैलिबर पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में सेंसर, हथियार प्रणालियों और निर्णय लेने वालों को नेटवर्क से जोड़ने की क्षमता पर भी निर्भर करेगी। उन्होंने कहा कि तोप, रॉकेट और मिसाइल को मानवरहित हवाई प्रणालियों, युद्धक्षेत्र निगरानी प्रणालियों, उपग्रह और हवाई खुफिया, सटीक लक्ष्य-निर्धारण प्रणालियों तथा मजबूत कमान एवं नियंत्रण नेटवर्क के साथ एकीकृत करने से दुश्मन के खिलाफ अपेक्षाकृत अधिक प्रभाव पैदा किया जा सकेगा। संगोष्ठी में मारक क्षमता में असममिति की अवधारणा पर भी विचार किया गया।
इसमें कहा गया कि तकनीकी एकीकरण, सटीकता, पहुंच, त्वरित प्रतिक्रिया और सूचना में बढ़त के जरिये अपेक्षाकृत छोटी सेनाएं भी प्रतिद्वंद्वी को असमान रूप से अधिक नुकसान पहुंचा सकती हैं। चर्चा में कहा गया कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में वही सेनाएं बढ़त हासिल करेंगी जो अधिक दूर तक देख सकें, तेजी से निर्णय ले सकें, सटीक प्रहार कर सकें और अधिक समय तक टिक सकें। समापन संबोधन में सेना की पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी अधिक मारक दूरी, सटीकता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन, निरंतर निगरानी और नेटवर्किंग से प्रेरित व्यापक बदलाव के दौर से गुजर रही है।
उन्होंने कहा कि भारतीय तोपखाने की क्षमता को युद्धक्षेत्र की पूरी गहराई में त्वरित, सटीक और निर्णायक प्रहार करने में सक्षम बनाए रखने के लिए सिद्धांतों, प्रौद्योगिकी, संगठनों और प्रशिक्षण पद्धतियों को लगातार विकसित करने की जरूरत है। जनरल एस एफ रोड्रिग्स स्मृति संगोष्ठी 2026 का समापन इस साझा समझ के साथ हुआ कि तोपखाने के क्षेत्र में भविष्य की बढ़त केवल अधिक मारक क्षमता रखने में नहीं, बल्कि सेंसर को उपयुक्त हथियार प्रणालियों से जोड़ने, सूचना को तेजी से लक्ष्य-निर्धारण समाधान में बदलने और निर्णय के समय तथा स्थान पर सटीक प्रभाव उत्पन्न करने की क्षमता में निहित होगी।
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