Modi Cabinet ने ले लिये बड़े फैसले, किसानों और नौजवानों को दे डाली बड़ी सौगात, विकास की रफ्तार भी होगी और तेज

कैबिनेट ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) को 62,500 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान के साथ मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहने वाली इस योजना के तहत भारत में मोबाइल फोन निर्माण पर 2.25 से 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में देश की विनिर्माण क्षमता, बुनियादी ढांचे, कृषि, परिवहन और समुद्री क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद इन निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य भारत को आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम और वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
हम आपको बता दें कि कैबिनेट ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) को 62,500 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान के साथ मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहने वाली इस योजना के तहत भारत में मोबाइल फोन निर्माण पर 2.25 से 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया जाएगा। घरेलू स्तर पर प्रमुख कंपोनेंट्स की खरीद पर अतिरिक्त 1.5 प्रतिशत और भारतीय ब्रांडों द्वारा डिजाइन एवं अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) के लिए 3 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलेगा। सरकार का अनुमान है कि योजना अवधि में लगभग 39 लाख करोड़ रुपये का मोबाइल उत्पादन होगा, निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा करीब 60 हजार प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। यह योजना पीएलआई योजना के बाद भारत को वैश्विक मोबाइल विनिर्माण केंद्र के रूप में और मजबूत करेगी।
इसे भी पढ़ें: India MEA Briefing : क्या Russia को Petrol Supply कर रहा है भारत, Prabhasakshi के सवाल पर विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब
साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को और गति देने के लिए सरकार ने सेमिकॉन 2.0 को भी 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी। यह कार्यक्रम चिप डिजाइन, मशीनों एवं कच्चे माल के निर्माण, नए फैब स्थापित करने, एटीएमपी/ओसैट इकाइयों के विस्तार, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा विकास जैसे छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगा। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाना है। अब तक सेमिकॉन 1.0 के तहत 12 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 105 स्टार्टअप चिप डिजाइन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के लिए भी कैबिनेट ने दो महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को मंजूरी दी। पहली परियोजना के तहत एनएच-19 से वाराणसी रिंग रोड तक गंगा तट के समानांतर 46.04 किलोमीटर लंबे छह लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण 14,447.64 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। वहीं दूसरी परियोजना के अंतर्गत वरुणा नदी के किनारे एनएच-31 से वाराणसी रिंग रोड तक 43.22 किलोमीटर लंबे 6/4 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण 10,998.32 करोड़ रुपये की लागत से होगा। दोनों परियोजनाओं से शहर में यातायात जाम में उल्लेखनीय कमी आएगी, यात्रा समय लगभग आधा रह जाएगा तथा काशी विश्वनाथ धाम, बीएचयू, रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट और प्रमुख लॉजिस्टिक केंद्रों तक बेहतर संपर्क सुनिश्चित होगा। ये परियोजनाएं पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप बहु-मॉडल कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेंगी।
साथ ही रेलवे क्षेत्र में कैबिनेट ने ओडिशा और झारखंड में लगभग 3,907 करोड़ रुपये की लागत वाली दो मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड का दोहरीकरण तथा राजखरसावां-दांगोआपोसी खंड पर चौथी लाइन का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं से भारतीय रेल नेटवर्क में लगभग 145 किलोमीटर की वृद्धि होगी, 1,526 गांवों और लगभग 14 लाख लोगों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा तथा कोयला, लौह अयस्क, चूना पत्थर और अन्य खनिजों के परिवहन में तेजी आएगी। साथ ही हर वर्ष 44 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होगी, जिससे लॉजिस्टिक लागत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा, कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कैबिनेट ने राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (निपू-2026) को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत देश में गैस आधारित नए यूरिया संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार के अनुसार नई नीति में पारदर्शी लागत निर्धारण, 12 से 16 प्रतिशत तक रिटर्न ऑन इक्विटी तथा विदेशी मुद्रा जोखिम को कम करने जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। इससे प्रत्येक नए संयंत्र पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने का अनुमान है और आयात पर निर्भरता कम होगी।
साथ ही समुद्री क्षेत्र में भी सरकार ने दो रणनीतिक परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। गुजरात के पोरबंदर में लगभग 2,000 एकड़ क्षेत्र में ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित किया जाएगा, जबकि वाडिनार में 1,570 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक जहाज मरम्मत सुविधा स्थापित की जाएगी। इन परियोजनाओं से भारत की जहाज निर्माण एवं मरम्मत क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बड़े वाणिज्यिक जहाजों की विदेशी मरम्मत पर निर्भरता घटेगी तथा रोजगार और निवेश के नए अवसर सृजित होंगे।
कुल मिलाकर, केंद्रीय मंत्रिमंडल के ये निर्णय ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘पीएम गतिशक्ति’ और ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं। मोबाइल और सेमीकंडक्टर जैसे उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से लेकर रेलवे, सड़क, उर्वरक और समुद्री अवसंरचना तक फैले इन फैसलों का उद्देश्य विनिर्माण क्षमता बढ़ाना, रोजगार सृजित करना, लॉजिस्टिक लागत घटाना, निर्यात को प्रोत्साहित करना तथा भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में और अधिक सशक्त बनाना है।
अन्य न्यूज़















