आयुष्मान भारत की वेबसाइट पर 100 से अधिक कदाचार में शामिल अस्पतालों के नाम डाले गए: हर्षवर्द्धन

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  सितंबर 30, 2019   18:14
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आयुष्मान भारत की वेबसाइट पर 100 से अधिक कदाचार में शामिल अस्पतालों के नाम डाले गए: हर्षवर्द्धन
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स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि धोखाधड़ी के करीब 1200 मामलों की पुष्टि हुई है और 338 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गयी है। उन्होंने बताया कि छह अस्पतालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है और डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया है ।

नयी दिल्ली। देश के अस्पतालों में किसी भी गड़बड़ी पर रोक लगाने के उद्देश्य से सरकार ने एक पहल के तहत आयुष्मान भारत की आधिकारिक वेबसाइट पर 100 से अधिक ऐसे चिकित्सा संस्थानों के नाम डाले गये हैं, जो कदाचार में संलिप्त पाये गए हैं । केंद्रीय मंत्री स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी -पीएमजेवाई) के एक साल पूरे होने पर आयोजित ‘आरोग्य मंथन’ को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री हर्षवर्द्धन ने बताया कि सरकार की मंशा ‘नेम एंड फेम’ योजना भी लागू करने की है। इसका मकसद इस योजना के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले अस्पतालों को सम्मानित करना है। उन्होंने कहा, ‘‘भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति के तहत 111 अस्पतालों का नाम एबी-पीएमजेवाई की आधिकारिक वेबसाइट पर डाला गया है। इन अस्पतालों को पैनल से हटाया जा चुका है और इन अस्पतालों को किसी न किसी फर्जीवाड़े या गड़बड़ियों में संलिप्त पाया गया है।’’

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मंत्री ने कहा, ‘‘हमलोग अब नेम एंड फेम पहल शुरू करने की योजना बना रहे हैं। इसका मकसद बेहतर काम करने वाले अस्पतालों को सम्मानित करना है ताकि उनके अच्छे कामों का अनुसरण अन्य अस्पताल कर सकें।’’ आरोग्य मंथन का आयोजन राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने किया था। इस योजना को लागू करने वाली यह शीर्ष संस्था है।मंत्री ने कहा कि धोखाधड़ी की रोकथाम, पहचान और नियंत्रण के लिये मजबूत प्रणाली पीएमजेवाई के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धोखाधड़ी को रोका जाए और अगर इसका प्रयास किया जाता है तो उसका शीघ्र पता लगा कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

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स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि धोखाधड़ी के करीब 1200 मामलों की पुष्टि हुई है और 338 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गयी है। उन्होंने बताया कि छह अस्पतालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है और डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया है ।पिछले साल 23 सितंबर को शुरू होने के बाद पीएजेवाई के तहत 7500 करोड़ रुपये का 47 लाख से अधिक इलाज हो चुका है।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


राजस्थान में कोरोना वायरस से संक्रमित 19 और लोगों की मौत, 2765 नये मामले

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 28, 2020   19:49
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राजस्थान में कोरोना वायरस से संक्रमित 19 और लोगों की मौत, 2765 नये मामले
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राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण से 19 और मौत हुई हैं, जिससे इस घातक वायरस से मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 2274 हो गयी।

जयपुर। राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण के शनिवार को 2765 नये मामले सामने आये। इससे अब तक राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 2,62,805 हो गई है। वहीं, राज्य में संक्रमण से 19 और लोगों की मौत हो गई जिससे राज्य में संक्रमण से कुल मरने वालों का आंकड़ा 2274 तक पहुंच गया। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार शाम छह बजे तक बीते 24 घंटों में राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण से 19 और मौत हुई हैं, जिससे इस घातक वायरस से मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 2274 हो गयी।

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कोरोना वायरस संक्रमण से अब तक जयपुर में 428, जोधपुर में 232, अजमेर में 181, बीकानेर में 161, कोटा में 134, भरतपुर में 103, उदयपुर में 92 और पाली में 86 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक कुल 2,31,780 लोग संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। फिलहाल, राज्य में 28,751 रोगी उपचाराधीन हैं। शनिवार को सामने आए नये मामलों में जयपुर में 627, जोधपुर में 449, अजमेर में 115, कोटा में 219, अलवर में 179, उदयपुर में 110, भीलवाड़ा में 108, भरतपुर में 88, नागौर में 92 मामले शामिल हैं।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


किसान आंदोलन को राजनीतिक दल हवा दे रहे है: मनोहर लाल खट्टर

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 28, 2020   19:47
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किसान आंदोलन को राजनीतिक दल हवा दे रहे है: मनोहर लाल खट्टर
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हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा, यह बड़ी विचि​त्र स्थिति है कि एक राज्य का मुख्यमंत्री दूसरे राज्य के अपने समकक्ष से बातचीत करना चाहता है, लेकिन कई प्रयासों के बावजूद वह इसमें सफल नहीं हो पाता है। मैं छह साल से मुख्यमंत्री हूं। इससे पहले कभी ऐसी बात नहीं हुयी। हमने विपक्षी नेताओं के साथ भी बातचीत की।

चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार को आरोप लगाया कि केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ कुछ राजनीतिक दल एवं संगठन किसान आंदोलन को प्रायोजित कर रहे हैं। खट्टर ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर हमला बोला और दावा किया वह इस मसले पर उनसे बातचीत करना चाहते थे और तीन दिन तक उनके कार्यालय में टेलीफोन किया लेकिन उन्होंने इसका कोई उत्तर नहीं दिया। इसमें साजिश का दावा करते हुये, खट्टर ने गुरूग्राम में संवाददाताओं से कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री के कार्यालय के अधिकारी पंजाब के प्रदर्शनकारी किसानों को निर्देश दे रहे हैं। उन्होंने कहा इस आंदोलन की शुरूआत पंजाब के किसानों ने की है और कुछ राजनीतिक दल एवं संगठन इसे प्रायोजित कर रहे हैं। खट्टर ने दावा किया कि हरियाणा के किसानों ने इस आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया है। उन्होंने कहा, इसके लिये मैं हरियाणा के किसानों का धन्यवाद करना चाहता हूं।

मुख्यमंत्री ने कहा, मैं हरियाणा पुलिस की भी तारीफ करता हूं कि उन्होंने पिछले दो दिन में, जब से यह मामला (दिल्ली चलो मार्च) शुरू हुआ है, उन्होंने संयम से काम लिया है और बल का इस्तेमाल नहीं किया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ लोग इसमें अपनी राजनीति कर रहे हैं जो बेहद निंदनीय है। यह पूछे जाने पर कि किसानों के मार्च से पहले क्या उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री से बातचीत करने का प्रयास किया, खट्टर ने कहा, मेरे कार्यालय ने मुझे बताया कि उन्होंने छह से सात बार उनसे (कैप्टन अमरिंदर सिंह से) दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया और हर बार उनके कर्मचारियों ने कहा कि हम जल्दी ही संपर्क करेंगे और उस वक्त उन्होंने यह दलील दी कि मुख्यमंत्री बैठकों में और अन्य कार्यों में व्यस्त हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा, यह बड़ी विचि​त्र स्थिति है कि एक राज्य का मुख्यमंत्री दूसरे राज्य के अपने समकक्ष से बातचीत करना चाहता है, लेकिन कई प्रयासों के बावजूद वह इसमें सफल नहीं हो पाता है। मैं छह साल से मुख्यमंत्री हूं। इससे पहले कभी ऐसी बात नहीं हुयी। हमने विपक्षी नेताओं के साथ भी बातचीत की। 

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खट्टर ने कहा, इससे पहले भी मैने पंजाब के मुख्यमंत्री से टेलीफोन पर बातचीत की है, वह भी तब जब वह व्यस्त थे। वह आधे या एक घंटे में वापस कॉल करते थे। इस बार तीन दिन तक उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया। साजिश का आरोप लगाते हुये खट्टर ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी प्रदर्शनकारियों को निर्देश दे चुके हैं। एक अन्य सवाल के उत्तर में खट्टर ने जोर देकर कहा कि किसानों को केंद्र सरकार से बातचीत करनी चाहिये। इस बीच हरियाणा के गृह मंत्री ​अनिल विज ने अम्बाला में कहा कि देश के शेष हिस्से में किसान नये कृषि कानूनों को स्वीकार कर चुके हैं लेकिन पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह एवं राजनीतिक कारणों से किसान आंदोलन कर रहे हैं। विज ने उम्मीद जतायी कि किसानों को ब​हुत जल्दी यह महसूस होगा कि ये कानून उनके फायदे के लिये हैं।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


सरकार ने कसी Ola-Uber पर नकेल, नहीं वसूल सकेंगे ज्यादा किराया

  •  अभिनय आकाश
  •  नवंबर 28, 2020   19:37
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सरकार ने कसी Ola-Uber पर नकेल, नहीं वसूल सकेंगे ज्यादा किराया
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ओला उबर सबसे बड़ी कैब एग्रीगेटर कंपनियां हैं। पीक आवर्स में ऐसी कंपनियां किराया कई गुणा बढ़ाकर वसूलती हैं। एग्रीगेटर्स को डेटा स्थानीयकरण सुनिश्चित करना होगा कि डेटा भारतीय सर्वर में न्यूनतम तीन महीने और अधिकतम चार महीने उस तारीख से संग्रहीत किया जाए।

आपको जब सवेरे ऑफिस जाना हो या शाम परिवार के साथ घूमने तभी कैब एग्रीग्रेटर कंपनियां पीक आवर्स के नाम पर मनचाहा किराया वसूलती हैं। लेकिन अब भारत सरकार कैब कंपनियों पर नए नियम लाई है। सरकार का यह कदम अहम हो जाता है, क्योंकि लोग कैब सेवाएं देने वाली कंपनियों के अधिकतम किराये पर लगाम लगाने की लंबे समय से मांग कर रहे थे। 

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बेस फेयर से 50% कम चार्ज करने की अनुमति

ओला ऊबर सबसे बड़ी कैब एग्रीगेटर कंपनियां हैं। पीक आवर्स में ऐसी कंपनियां किराया कई गुणा बढ़ाकर वसूलती हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के द्वारा शुक्रवार को जारी मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश 2020 के अनुसार, ‘‘एग्रीगेटर कंपनियों को मूल किराये के 50 प्रतिशत तक न्यूनतम किराये और डेढ़ गुने तक अधिकतम किराये वसूलने की मंजूरी दी जाती है।’’ मंत्रालय ने कहा कि यह संसाधनों के इस्तेमाल को सुलभ करेगा और बढ़ावा देगा, जो कि परिवहन एग्रीगेशन के सिद्धांत का मूल है। यह गतिशील किराये के सिद्धांत को प्रमाणिक बनायेगा, जो मांग व आपूर्ति के अनुसार संसाधनों का इस्तेमाल सुनिश्चित करने में प्रासंगिक है। नये दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रत्येक सवारी (राइड) पर लागू किराये का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा एग्रीगेटर के साथ जुड़े वाहन के चालक को मिलेगा। शेष हिस्सा एग्रीगेटर कंपनियां रख सकती हैं। मंत्रालय ने कहा कि जिन राज्यों में शहरी टैक्सी का किराया राज्य सरकार ने निर्धारित नहीं किया है, वहां किराया विनियमन के लिये 25-30 रुपये को मूल किराया माना जायेगा। राज्य सरकारें एग्रीगेटर द्वारा जोड़े गये अन्य वाहनों के लिये इसी तरह से किराया निर्धारित कर सकती हैं।

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डेटा की सुरक्षा के लिए बनाया नियम

एग्रीगेटर्स को डेटा स्थानीयकरण सुनिश्चित करना होगा कि डेटा भारतीय सर्वर में न्यूनतम तीन महीने और अधिकतम चार महीने उस तारीख से संग्रहीत किया जाए, जिस दिन डेटा जेनरेट किया गया था। डेटा को भारत सरकार के कानून के अनुसार सुलभ बनाना होगा लेकिन ग्राहकों के डेटा को यूजर्स की सहमति के बिना शेयर नहीं किया जाएगा। कैब एग्रीगेटर्स को एक 24X7 कंट्रोल रूम स्थापित करना होगा और सभी ड्राइवरों को अनिवार्य रूप से हर समय कंट्रोल रूम से जुड़ा होना होगा





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।