मालेगांव Fast Track Court ने चार साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को सुनाई फांसी

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महाराष्ट्र के नासिक जिले की त्वरित अदालत ने बच्ची से बर्बरता के मामले को ‘दुर्लभतम’ करार देते हुए 24 वर्षीय विजय संजय खैरनार को मृत्युदंड दिया है। अदालत ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराने का भी निर्देश जारी किया।

महाराष्ट्र के नासिक जिले की एक त्वरित अदालत ने पिछले वर्ष चार वर्षीय लड़की के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में 24 वर्षीय व्यक्ति को शुक्रवार को मौत की सजा सुनाई तथा इस जघन्य अपराध को ‘दुर्लभतम’ मामला बताया। अतिरिक्त सत्र न्यायालय एवं त्वरित विशेष अदालत (एफटीएससी) के न्यायाधीश के. जी. पलदेवार ने दोषी विजय संजय खैरनार को मौत की सजा सुनाई। बच्ची से दुष्कर्म और उसकी हत्या की इस वारदात के करीब एक साल बाद यह फैसला आया है।

घटना के बाद राज्य के कई हिस्सों में आक्रोश फैल गया था और विरोध प्रदर्शन हुए थे। उत्तरी महाराष्ट्र के मालेगांव कस्बे में स्थित निचली अदालत ने सजा सुनाते हुए इस अपराध को ‘दुर्लभतम’ करार दिया। अदालत ने मृतक बच्ची के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी आदेश दिया।

जेल में बंद दोषी खैरनार और उसके वकील नीलेश राठी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये अदालत में पेश हुए। बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने 30 सितंबर को फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी ठहराया था और सजा की घोषणा शुक्रवार को की गयी। इस मामले में वरिष्ठ वकील उज्ज्वल निकम विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) थे।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 16 नवंबर, 2025 को वेल्डिंग और फर्नीचर का काम करने वाले खैरनार ने नासिक जिले की मालेगांव तहसील के एक गांव में चार वर्षीय लड़की के साथ दुष्कर्म किया और बाद में गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। बच्ची अपने दोस्तों के साथ घर के पास खेलते समय लापता हो गई थी। बाद में उसका शव आरोपी के घर के पास स्थित एक मोबाइल फोन टावर के नजदीक मिला था।

अपराध की भयावह प्रकृति के कारण मालेगांव तहसील, नासिक जिले के आसपास के क्षेत्रों और राज्य के कुछ अन्य हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। आरोपी को 17 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन पक्ष का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और ‘आखिरी बार साथ देखे जाने’ के सिद्धांत पर आधारित था।

विशेष लोक अभियोजक निकम ने दलील दी कि यह मामला ‘दुर्लभतम’ श्रेणी में आता है। उन्होंने इस वारदात को बिना किसी उकसावे के किया गया, निर्मम और जघन्य अपराध बताया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, बच्चे आरोपी को ‘दादा’ कहकर बुलाते थे।

उसने बच्ची को चॉकलेट का लालच दिया और अपने घर के अंदर ले गया, जहां उससे दुष्कर्म किया। इसके बाद आरोपी ने एक करदोड़ा (पतले धागे) से बच्ची का गला घोंट दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने इसके बाद खून के धब्बे धोए, नहाया, शव को चादर में लपेटा और अपने घर से 10 से 15 फुट दूर स्थित मोबाइल टावर परिसर में फेंक दिया।

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