आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को आकार देने के लिये नयी शिक्षा नीति हो रही है लागू : राष्ट्रपति

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को कहा कि सरकार आत्म-निर्भर भारत के संकल्प एवं सामर्थ्य को आकार देने के लिए देश में नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू कर रही है जिसमें स्थानीय में शिक्षा, युवाओं के कौशल विकास, बालिका शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है।

नयी दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को कहा कि सरकार आत्म-निर्भर भारत के संकल्प एवं सामर्थ्य को आकार देने के लिए देश में नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू कर रही है जिसमें स्थानीय में शिक्षा, युवाओं के कौशल विकास, बालिका शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। संसद के केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ आत्म-निर्भर भारत के संकल्प व सामर्थ्य को आकार देने के लिए सरकार देश में नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से स्थानीय भाषाओं को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।’’

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उन्होंने कहा कि स्नातक पाठ्यक्रमों की महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाएं भारतीय भाषाओं में भी संचालित करने पर जोर दिया जा रहा है तथा इस वर्ष 10 राज्यों के 19 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 6 भारतीय भाषाओं में पढ़ाई शुरू हो रही है। राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि स्किल इंडिया मिशन के तहत, आई.टी.आई., जन शिक्षण संस्थान, और प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों के जरिए पूरे देश में सवा दो करोड़ से अधिक युवाओं का कौशल विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि कौशल को उच्च शिक्षा के साथ जोड़ने के लिए विश्विवद्यालय अनुदान आयोग (यू.जी.सी) के नियमों में कई बदलाव भी किए गये हैं।

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कोविंद ने कहा कि कोरोना से लड़ाई के लिए स्किल इंडिया मिशन के तहत स्वास्थ्य सेवा से जुड़े छह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इनसे स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जनजातीय युवाओं की शिक्षा के लिए हर आदिवासी बहुल ब्लॉक तक एकलव्य आवासीय मॉडल स्कूल के विस्तार का काम किया जा रहा है तथा ये स्कूल लगभग साढ़े तीन लाख जनजातीय युवाओं को सशक्त बनाएंगे।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन के दौरान महान संत थिरूवल्लुवर को उद्धृत किया। उन्होंने कहा, ‘‘ महान संत थिरूवल्लुवर ने कहा था कि कर्क्क कसड्डर कर्पवइ कट्रपिन्, निर्क्क अदर्क्क तग। अर्थात, एक व्यक्ति जो कुछ भी सीखता है, वह उसके आचरण में दिखाई देता है।’’ उन्होंने कहा कि देश की बेटियों में सीखने की क्षमता को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में लैंगिक समावेशी कोष का भी प्रावधान किया गया है। कोविंद ने कहा, ‘‘ यह हर्ष की बात है कि मौजूदा सभी 33 सैनिक स्कूलों ने बालिकाओं को प्रवेश देना शुरू कर दिया है। ’’ उन्होंने कहा कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” पहल के अनेक सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, और स्कूलों में प्रवेश लेने वाली बेटियों की संख्या में उत्साहजनक वृद्धि हुई है।

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