NIA ने आतंकी गतिविधियों के लिये धन मुहैया कराने के मामले में NGO और ट्रस्ट पर मारे छापे

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जांच एजेंसी ने अलगाववादी संगठनों को धन मुहैया करने वाले माध्यमों को बंद करने के बाद यह कार्रवाई की है। एनआईए की विभिन्न टीमों ने एक महानिरीक्षक और एक उप महानिरीक्षक की निगरानी में लगातार दूसरे दिन नौ स्थानों पर तलाशी ली।

श्रीनगर। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने जम्मू कश्मीर के अंदर और बाहर संचालित हो रहे पंजीकृत एवं गैर पंजीकृत गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) की जांच की कड़ी में बृहस्पतिवार को कुछ और संगठनों पर छापे मारे। दरअसल, इन संगठनों का इस्तेमाल कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों के लिये धन मुहैया कराने वाले माध्यम के रूप में किया जा रहा है। जांच एजेंसी ने अलगाववादी संगठनों को धन मुहैया करने वाले माध्यमों को बंद करने के बाद यह कार्रवाई की है। एनआईए की विभिन्न टीमों ने एक महानिरीक्षक और एक उप महानिरीक्षक की निगरानी में लगातार दूसरे दिन नौ स्थानों पर तलाशी ली, जिनमें राष्ट्रीय राजधानी में भी एक जगह शामिल है, जहां दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष जफरूल इस्लाम खान के नेतृत्व वाले एनजीओ ‘चैरिटी एलायंस’ पर छापा मारा गया। अधिकारियों ने बताया कि जिन नौ परिसरों में छापेमारी की गई, उनमें अनंतनाग में संचालित शबीर अहमद बाबा के नेतृत्व वाला ह्यूमन वेलफेयर फाउंडेशन,जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामिया की अनुषंगी फलाह-ए-आम ट्रस्ट, जेके यतीम फांउडेशन, साल्वेशन मूवमेंट और जेके वॉइस ऑफ विक्टिम्स शामिल हैं। इनमें से कुछ संगठनों का नेतृत्व हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के जाफर अकबर सहित कट्टरपंथी अलगाववादी कर रहे हैं। 

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अधिकारियों ने बताया कि इन गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) और ट्रस्ट के खिलाफ विश्वसनीय सूचना मिलने के बाद आठ अक्टूबर को भारतीय दंड संहिता और गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत एक मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि सूचना मिली थी कि ये संगठन तथाकथित दान और कारोबारी योगदान के माध्यम से देश और विदेश से चंदा एकत्र करते हैं और उसका इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण में करते हैं। एनआईए ने बुधवार को इसी मामले में कश्मीर और बेंगलुरु के कुछ ठिकानों की तलाशी ली थी और दावा किया था कि इस दौरान उसने दोष साबित करने वाले कई दस्तावेज जब्त किए हैं। जिन लोगों के परिसरों में छापेमारी की गई थी, उनमें खुर्रम परवेज (जम्मू कश्मीर कोअलिशन ऑफ सिविल सोसाइटी के समन्वयक), उनके सहयोगी परवेज अहमद बुखारी, परवेज अहमद मत्ता और बेंगलुरु में रहने वाली उनकी सहयोगी स्वाति शेषाद्रि तथा परवीना अहंगर, ‘एसोसिएशन ऑफ पैरेंट्स ऑफ डिसैपियर्ड पर्सन्स’ (एपीडीपी) शामिल हैं। एनजीओ अथरौट और जी के ट्रस्ट के कार्यालयों में भी छापे मारे गये थे। एपीडीपी ने एक बयान जारी कर कहा कि एनआईए की टीम ने कई दस्तावेज और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किये हैं। अहंगर के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिये गये। बयान में आरोप लगाया गया कि एनआईए की टीम ने जो दस्तावेज और उपकरण जब्त किये हैं, उनमें सुरक्षा बलों द्वारा किये गये मानवाधिकार हनन की घटनाओं में निशाना बनाये गये लोगों के नाम, पहचान के ब्योरे हैं।

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