बिना इंश्योरेंस नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल? Supreme Court का केंद्र को पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने सड़क हादसों की बढ़ती संख्या और टोल प्लाजा पर लंबी लाइनों की वजह से होने वाले ट्रैफिक जाम पर चिंता जताई।
देश की सड़कों पर दौड़ रही बिना बीमा (Insurance) वाली गाड़ियों पर नकेल कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार को एक ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसके तहत वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस न होने पर वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन (Fuel) नहीं दिया जाएगा। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या और टोल प्लाजा पर लगने वाले ट्रैफिक जाम पर चिंता जताते हुए यह आदेश जारी किया।
मंगलवार को, सुप्रीम कोर्ट ने देश में सड़क हादसों पर गंभीरता से ध्यान दिया और केंद्र को कुछ नेशनल हाईवे कॉरिडोर पर टेस्ट प्रोजेक्ट लागू करने का निर्देश दिया। इन प्रोजेक्ट्स का मकसद पारंपरिक टोल प्लाजा की जगह ऑटोमैटिक व्हीकल डिटेक्शन सिस्टम लगाना और अनिवार्य मोटर व्हीकल इंश्योरेंस के नियमों का पालन बेहतर बनाना है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने सड़क हादसों की बढ़ती संख्या और टोल प्लाजा पर लंबी लाइनों की वजह से होने वाले ट्रैफिक जाम पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके गाड़ियों को बिना रुके टोल पॉइंट से गुजरने देने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाने चाहिए।
अनिवार्य व्हीकल इंश्योरेंस पॉलिसी का बड़े पैमाने पर उल्लंघन
बेंच ने मोटर व्हीकल एक्ट के तहत अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के नियमों का पालन कम होने पर भी गंभीरता से ध्यान दिया। फाइनेंस पर बनी स्टैंडिंग कमेटी की 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सड़कों पर लगभग 56 प्रतिशत गाड़ियां बिना इंश्योरेंस के चल रही हैं।
नियमों का पालन बेहतर बनाने के लिए, कोर्ट ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) से कहा कि वह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के साथ मिलकर एक ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करे जो फ्यूल की बिक्री को गाड़ी के इंश्योरेंस स्टेटस से जोड़े। इस प्रस्ताव के तहत, बिना वैलिड इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल पंप पर तब तक फ्यूल नहीं मिलेगा जब तक उनका इंश्योरेंस रिन्यू नहीं हो जाता।
'बिना इंश्योरेंस, तो फ्यूल नहीं' प्रोजेक्ट के बारे में सब कुछ
कोर्ट ने कहा कि ऐसा सिस्टम बिना इंश्योरेंस और बिना रजिस्ट्रेशन वाली गाड़ियों की पहचान करने में मदद करेगा और मालिकों को वैलिड इंश्योरेंस बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करेगा। कोर्ट ने गौर किया कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक रूप से कोई आपत्ति नहीं है। बेंच ने कहा कि इस सिस्टम को लागू करने के लिए ANPR कैमरों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
कोर्ट ने 2018 के अपने उस निर्देश को याद दिलाया जिसमें नई कारों के लिए खरीद या रजिस्ट्रेशन के समय तीन साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए पांच साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य किया गया था। कोर्ट ने पाया कि आठ साल बीत जाने के बाद भी बड़ी संख्या में गाड़ियां बिना इंश्योरेंस के चल रही हैं। इंश्योरेंस कवर को छह साल तक बढ़ाना
सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, बेंच ने निर्देश दिया कि नई कारों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि चार साल और नई दो-पहिया गाड़ियों के लिए छह साल तक बढ़ाई जाए। इसने IRDAI से तुरंत ज़रूरी निर्देश जारी करने को कहा।
कोर्ट ने गौर किया कि देश की 30.48 करोड़ रजिस्टर्ड गाड़ियों में से 16.54 करोड़ गाड़ियों का इंश्योरेंस नहीं है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि इंश्योरेंस न होने से अक्सर सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को समय पर मुआवज़ा दिलाने का कानूनी मकसद पूरा नहीं हो पाता या उसमें देरी होती है। बेंच ने कहा, "मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत अनिवार्य इंश्योरेंस का मकसद सिर्फ़ सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवज़ा देना ही नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि वे लंबे कानूनी झगड़ों में न फंसें।"
कोर्ट ने आगे कहा कि बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों के मामलों में दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर आर्थिक मदद नहीं मिल पाती, जिससे उन्हें मुआवज़े के लिए अक्सर लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है। मौत या स्थायी विकलांगता वाले मामलों में यह बोझ और भी ज़्यादा होता है।
बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों की पहचान और चालान के लिए कैमरे
नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए, कोर्ट ने IRDAI और MoRTH को कुछ चुनिंदा राज्यों में ANPR कैमरे लगाने का निर्देश दिया। इन कैमरों को इंश्योरेंस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो और VAHAN डेटाबेस से जोड़ा जाएगा ताकि बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों का अपने-आप पता चल सके और ई-चालान जारी किया जा सके।
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बेंच ने यह भी देखा कि गाड़ी की जांच के दौरान इंश्योरेंस की स्थिति की पुष्टि करने के लिए पुलिस के पास कोई एक जैसा सिस्टम नहीं है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य पुलिस को ऐसे हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल ऐप दिए जाएं जो इंश्योरेंस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो और VAHAN पोर्टल से जुड़े हों, ताकि अनिवार्य इंश्योरेंस नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए तुरंत जांच की जा सके।
इसके अलावा, कोर्ट ने IRDAI को निर्देश दिया कि वह निजी गाड़ी मालिकों को कई तरह के पॉलिसी विकल्प दे। इनमें मोटर वाहन अधिनियम के तहत न्यूनतम ज़रूरतों को पूरा करने वाली बेस पॉलिसी के साथ-साथ ऐड-ऑन कवर, पर्सनल एक्सीडेंट कवर और ओन-डैमेज कवर भी शामिल हों।
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ये निर्देश मोटर दुर्घटना मुआवज़े के एक मामले की सुनवाई के दौरान जारी किए गए। कोर्ट ने देखा कि थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस को अनिवार्य करने वाला कानूनी ढांचा होने के बावजूद, नियमों का पालन ठीक से नहीं हो रहा है, जिससे दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों को मुआवज़ा पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
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