सिख धर्म में योग की जगह नहीं, जिसको करना, घर में करे...अकाल तख्त का फरमान

Akal Takht
ANI
अभिनय आकाश । Jul 29 2026 12:50PM

जत्थेदार ने इस बात पर जोर दिया कि गुरुओं ने गुरुद्वारे की स्थापना इसीलिए की ताकि श्रद्धालु गुरु और शब्द से जुड़ सके। एक सिख के लिए गुरु से बढ़कर कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा गुरुणी में डूबने की बजाय भोलेभाले लोग गुरुद्वारों के अंदर योग प्रथाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

गुरुद्वारे में योग करने को लेकर अकाल तख्त की ओर से एक अहम बयान जारी किया गया है। अकाल तख्त के कार्यवाहक जठेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि सिख धर्म में योग के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने सभी गुरुद्वारा प्रबंधकों को यह सलाह दी है कि वे लंगर और दीवान हॉल सहित गुरुद्वारा परिसर के भीतर योग सत्र आयोजित करने की अनुमति ना दें। मंजी साहिब दीवान हॉल में सुबह की सभा को संबोधित करते हुए जत्थेदार गर्गज ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि हाल ही में कुछ सिख युवाओं ने उनसे संपर्क कर इस बारे में चिंता जाहिर की कि कुछ गुरुद्वारों में योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। जहां लोग विभिन्न आसन और श्वास लेने के व्यायाम यानी ब्रीदिंग एक्सरसाइजेज कर रहे हैं। जहां इस बयान के बाद चर्चा तेज हो गई। सवाल उठे कि आखिर योग से क्या आपत्ति है? तो इस बारे में सिख दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए जत्थेदार ने कई अहम बातें बताई। उन्होंने कहा योग का शाब्दिक अर्थ भगवान से जुड़ना है। लेकिन आज के समय में जो आमतौर पर किया जा रहा है वह सिर्फ शारीरिक व्यायाम है। अगर कोई घर पर व्यायाम करना चाहता है तो इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन गुरुद्वारों के अंदर योग सत्र आयोजित करना और लंगर या दीवान हॉल में लोगों से शारीरिक आसन करवाना सिख सिद्धांतों के बिल्कुल भी अनुरूप नहीं है। जत्थेदार ने इस बात पर जोर दिया कि गुरुओं ने गुरुद्वारे की स्थापना इसीलिए की ताकि श्रद्धालु गुरु और शब्द से जुड़ सके। एक सिख के लिए गुरु से बढ़कर कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा गुरुणी में डूबने की बजाय भोलेभाले लोग गुरुद्वारों के अंदर योग प्रथाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं। 

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सिखों की मीरी-पीरी की अवधारणा का ज़िक्र करते हुए गर्गज ने कहा कि गुरु ने सिखों को दुनियादारी और आध्यात्मिकता, दोनों की ज़िम्मेदारी निभाने का सिद्धांत दिया था और इसे दो तलवारें पहनकर दिखाया था। उन्होंने आगे कहा कि सिखों को 'शस्त्र विद्या (युद्ध-कला की परंपरा) भी सिखाई जाती थी और इन शिक्षाओं को छोड़कर गुरुद्वारों के अंदर योग करने का काम गुरु की शिक्षाओं के खिलाफ (मनमत) है। उन्होंने सिख समुदाय और गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटियों से अपील की कि वे गुरुद्वारे के परिसर में योग कार्यक्रम न होने दें। पिछले महीने फरीदकोट में तब विवाद खड़ा हो गया था जब कुछ सिख संगठनों ने स्थानीय गुरुद्वारों के परिसर में योग कक्षाएं चलाने पर आपत्ति जताई थी।

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इन सिख समूहों के प्रतिनिधियों ने दखल दिया और "सीएम दी योगशाला" पहल के तहत चल रहे सत्रों को रुकवा दिया। उनका कहना था कि इससे सिखों के धार्मिक आचार-संहिता का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने मांग की कि योग के बजाय, गुरुद्वारों को युवाओं को उनकी विरासत से जोड़ने के लिए गतका (सिख युद्ध-कला) के पारंपरिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देना चाहिए। इन सिख कार्यकर्ताओं ने उन चार गुरुद्वारों का दौरा किया जहाँ ये क्लास चल रही थीं और कड़ी आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि गुरुद्वारे के पवित्र परिसर में योग क्लास आयोजित करना उसकी पवित्रता और धार्मिक नियमों का उल्लंघन है, खासकर इसलिए क्योंकि कई प्रतिभागी (पुरुष और महिलाएँ) बिना सिर ढके इन सेशन में शामिल हो रहे थे, जबकि गुरुद्वारे के अंदर ऐसा करना पूरी तरह मना है। उस समय, सिख नेता शरणजीत सिंह सरन ने कहा कि उन्होंने कुछ समय से देखा था कि मुख्यमंत्री की योग क्लास गुरुद्वारे के परिसर में आयोजित की जा रही थीं, जिससे मर्यादा का उल्लंघन हो रहा था। 

उन्होंने कहा कि सेशन में शामिल होने वाले लोग बिना सिर ढके आते थे, जो सिख सिद्धांतों के खिलाफ था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ट्रेनिंग देने वाले ज़्यादातर ट्रेनर पंजाब से नहीं थे। इसके बाद सरन ने अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से सभी गुरुद्वारों में योग क्लास पर रोक लगाने के लिए एक औपचारिक आदेश (हुक्मनामा) जारी करने की मांग की। उन्होंने मांग की कि योग के बजाय, बच्चों को गुरु के घर में 'गतका' सिखाया जाना चाहिए ताकि उन्हें उनके धर्म से जोड़ा जा सके और सिख परंपराओं को बनाए रखने में मदद मिल सके। इन कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार द्वारा प्रायोजित योग कक्षाएं शुरू करना एक तरह का छिपा हुआ राजनीतिक दखल है, जिसका मकसद सिख धार्मिक स्थलों की पवित्रता को कम करना है। उन्होंने योग प्रशिक्षकों को चेतावनी दी कि वे गुरुद्वारा परिसरों के अंदर सत्र आयोजित न करें और धार्मिक परिसरों के बाहर कोई दूसरी जगह तलाशें।

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