केरल University में छात्र राजनीति पर रोक लगाने का कोई फैसला नहीं: मंत्री Roji John

उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने साफ किया है कि केरल विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति प्रतिबंधित करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने प्रतिबंध के दावों को गलत बताते हुए कहा कि सिंडिकेट उपसमिति केवल अदालत के निर्देशानुसार कानूनी विभाग के मसौदे की जांच कर रही है।
केरलम सरकार में मंत्री रोजी एम. जॉन ने रविवार को कहा कि केरल विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति पर प्रतिबंध लगाने की कोई योजना नहीं है और उन्होंने इस तरह का दावा करने वाली खबरों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। उन्होंने यह टिप्पणी छात्र राजनीति को नियंत्रित करने वाले मसौदे के विश्वविद्यालय सिंडिकेट के समक्ष विचार के लिए हाल में रखे जाने संबंधी खबरों के बीच की। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि केरल विश्वविद्यालय ने छात्र राजनीति पर प्रतिबंध लगाने का कोई फैसला नहीं किया है और भ्रामक सूचनाएं फैलाने का अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कोच्चि के महाराजा कॉलेज में छात्र अभिमन्यु की हत्या के बाद केरल उच्च न्यायालय में जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं, इसके बाद अदालत ने विश्वविद्यालयों को परिसरों में छात्र राजनीति को लेकर दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया था। जॉन ने कहा कि अदालत ने यह भी कहा था कि एमजी विश्वविद्यालय की ओर से 2005 में तैयार किए गए दिशानिर्देशों का पालन किया जा सकता है या उन्हें एक मॉडल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अदालत के बार-बार निर्देशों के बाद केरल विश्वविद्यालय ने इस मुद्दे पर दिशानिर्देश तैयार करने के लिए सिंडिकेट की एक उपसमिति गठित की थी।
मंत्री ने कहा कि उपसमिति ने चर्चा के लिए विश्वविद्यालय के कानूनी विभाग से मसौदा तैयार करने को कहा था। उन्होंने कहा, ‘‘कानूनी विभाग ने केवल सिंडिकेट उपसमिति में चर्चा के लिए एक दस्तावेज भेजा था। इसमें एमजी विश्वविद्यालय की ओर से 2005 में तैयार किया गया मसौदा भी शामिल था।’’ जॉन ने कहा कि उपसमिति मसौदे की जांच करेगी और आवश्यक संशोधनों की सिफारिश करेगी।
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