DGFT का बड़ा फैसला: अब Exporters के लिए EODC पाना हुआ आसान, Physical Challan की जरूरत खत्म

मंत्रालय ने आगे कहा कि कस्टम्स और ICEGATE (इंडियन कस्टम्स इलेक्ट्रॉनिक डेटा इंटरचेंज गेटवे) से मिले लाइसेंस-वाइज़ वॉलंटरी ड्यूटी पेमेंट डेटा को DGFT के ऑनलाइन सिस्टम के साथ जोड़ दिया गया है, जिससे संबंधित ऑथराइज़ेशन के आधार पर ऐसे पेमेंट का सीधे और प्रमाणित वेरिफिकेशन किया जा सकेगा।
एक्सपोर्टर्स के लिए 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' (कारोबार में आसानी) की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने 'एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन डिस्चार्ज सर्टिफिकेट' (EODC) के लिए अप्लाई करते समय ड्यूटी पेमेंट के फिजिकल चालान जमा करने की ज़रूरत को खत्म कर दिया है।\वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को यह घोषणा की और बताया कि यह फ़ैसला 'एडवांस ऑथराइज़ेशन' (AA) और 'एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स' (EPCG) स्कीम के तहत लिया गया है। मंत्रालय ने आगे कहा कि कस्टम्स और ICEGATE (इंडियन कस्टम्स इलेक्ट्रॉनिक डेटा इंटरचेंज गेटवे) से मिले लाइसेंस-वाइज़ वॉलंटरी ड्यूटी पेमेंट डेटा को DGFT के ऑनलाइन सिस्टम के साथ जोड़ दिया गया है, जिससे संबंधित ऑथराइज़ेशन के आधार पर ऐसे पेमेंट का सीधे और प्रमाणित वेरिफिकेशन किया जा सकेगा।
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इसमें कहा गया है, "एक्सपोर्टर्स को DGFT कस्टमर पोर्टल पर पेमेंट की वेरिफ़ाइड जानकारी मिलेगी, जिससे वे आवेदन करने से पहले यह देख सकेंगे कि पेमेंट सही ऑथराइज़ेशन से जुड़ा है या नहीं। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यही वेरिफ़ाइड पेमेंट रिकॉर्ड DGFT बैक ऑफ़िस में रीजनल अथॉरिटीज़ के लिए भी उपलब्ध होगा, जिससे पेमेंट की जानकारी को मैन्युअल रूप से वेरिफ़ाई करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही कहा इससे प्रोसेस तेज़ी से होने, बेवजह की बातचीत कम होने और DGFT की अलग-अलग रीजनल अथॉरिटीज़ के फ़ैसलों में ज़्यादा एकरूपता आने की उम्मीद है। इसमें आगे कहा गया है कि यह डिजिटल सुविधा DGFT और ICEGATE के बीच API-बेस्ड डेटा एक्सचेंज के ज़रिए लागू की गई है, जिसके तहत ड्यूटी पेमेंट की जानकारी कस्टम्स सिस्टम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से DGFT के EODC प्रोसेसिंग वर्कफ़्लो में भेजी जाती है।
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मंत्रालय के अनुसार, मैन्युअल रूप से जानकारी जमा करने और वेरिफ़ाई करने की जगह वेरिफ़ाइड डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल करने से प्रोसेसिंग का समय कम होने, डेटा की सटीकता बेहतर होने, इंसानी दखल कम होने और क्लोज़र प्रोसेस में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। इस कदम से एक्सपोर्टर्स के लिए ट्रांज़ैक्शन कॉस्ट और कंप्लायंस का बोझ भी कम होने की उम्मीद है, क्योंकि डॉक्यूमेंटेशन, फ़ॉलो-अप और फ़िज़िकल इंटरफ़ेस कम हो जाएगा। इससे खास तौर पर उन MSME एक्सपोर्टर्स को फ़ायदा होगा जो क्लोज़र की औपचारिकताएं खुद (इन-हाउस) पूरी करते हैं। इसमें आगे कहा गया है कि DGFT ने एक्सपोर्टर्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स की जानकारी के लिए 5 अगस्त, 2026 को ट्रेड नोटिस नंबर 15/2026-27 जारी किया है।
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