Kotia सीमा पर Andhra Pradesh के पंचायत चुनाव का Odisha के सभी दल करेंगे विरोध

कोरापुट जिले के कोटिया क्षेत्र में आंध्र प्रदेश द्वारा पंचायत चुनाव कराने के प्रयास के खिलाफ ओडिशा के सत्तापक्ष और विपक्ष ने हाथ मिला लिया है। जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक नवंबर से बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू करने का आदेश दिया है। दोनों राज्यों के बीच दशकों पुराना यह सीमा विवाद वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
ओडिशा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और सभी विपक्षी दलों ने विवादित कोटिया क्षेत्र में पंचायत चुनाव कराने के आंध्र प्रदेश सरकार के कदम का सामूहिक विरोध करने का फैसला किया है। नेताओं ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। आंध्र प्रदेश और ओडिशा की सीमा पर पूर्वी घाट की खूबसूरत पहाड़ियों में बसे कोटिया क्षेत्र के गांवों को लेकर दशकों पुराना क्षेत्रीय विवाद अक्सर चुनावों के दौरान सामने आता है।
दोनों राज्य इस क्षेत्र पर अपना अधिकार जताते हैं और यह मामला फिलहाल उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। इन गांवों के लोगों को दोहरी मतदान की सुविधा प्राप्त है, जिसके तहत वे दोनों राज्यों में मतदान कर सकते हैं। यह विवादित क्षेत्र ओडिशा के कोरापुट जिले के अंतर्गत आता है।
जिला प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो लोग निषेधाज्ञा का उल्लंघन करेंगे या ग्रामीणों को मतदान में भाग लेने के लिए उकसाएंगे, उनके खिलाफ गिरफ्तारी सहित सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आंध्र प्रदेश के इस कदम का संयुक्त रूप से विरोध करने का फैसला बृहस्पतिवार को हुई सर्वदलीय बैठक में लिया गया। इस बैठक में सभी प्रमुख दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया।
इसकी अध्यक्षता कोरापुट के जिलाधिकारी मनोज सत्यवान महाजन ने की। बैठक में सभी ने ओडिशा के क्षेत्रीय हितों की रक्षा करने पर सर्वसम्मति से सहमति जताई। जयपुर से कांग्रेस विधायक तारा प्रसाद बहिनीपति ने कहा कि कोटिया की क्षेत्रीय स्थिति को लेकर ‘‘कोई समझौता नहीं’’ किया जाएगा।
कोरापुट से बीजू जनता दल (बीजद) के पूर्व सांसद झीना हिकाका ने कहा कि विभिन्न दलों के नेता संयुक्त रूप से विवादित गांवों का दौरा करेंगे और जरूरत पड़ने पर वहां डेरा डालेंगे, ताकि आंध्र प्रदेश को चुनाव कराने से रोका जा सके। भाजपा विधायक रघुराम माछा ने कहा कि राज्य सरकार ओडिशा के हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है और उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से सहयोग मांगा। जिलाधिकारी ने कहा, ‘‘क्षेत्र में अनधिकृत गतिविधियों को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा एक नवंबर से लागू होगी।’’ चुनाव से पहले लोगों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए संवेदनशील सीमावर्ती गांवों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और रणनीतिक स्थानों पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन लोगों का विश्वास मजबूत करने के लिए विकास संबंधी पहलों पर भी ध्यान दे रहा है और ग्रामीणों की शिकायतों का समाधान कर रहा है।
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