तिरंगे जैसा फीता काटने से Omar Abdullah ने कर दिया इंकार, BJP बोली- Well Done CM

Omar Abdullah
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला श्रीनगर के कश्मीर हाट में हस्तशिल्प विभाग के एक कार्यक्रम का उद्घाटन करने पहुंचे थे। यह कार्यक्रम 'अपने कारीगरों को जानो' नाम से आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य स्थानीय कारीगरों और उनकी कला को प्रोत्साहित करना था।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के समय उमर अब्दुल्ला ने अन्य कश्मीरी नेताओं के साथ मिलकर कई प्रकार के विरोधी बयान दिए थे, लेकिन अब उनके द्वारा तिरंगे के प्रति दिखाया गया सम्मान पूरे देश को एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश दे रहा है। श्रीनगर में घटी एक घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान किसी भी राजनीतिक मतभेद से ऊपर होता है और यही भावना देश की एकता को मजबूत करती है।

हम आपको बता दें कि बुधवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला श्रीनगर के कश्मीर हाट में हस्तशिल्प विभाग के एक कार्यक्रम का उद्घाटन करने पहुंचे थे। यह कार्यक्रम 'अपने कारीगरों को जानो' नाम से आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य स्थानीय कारीगरों और उनकी कला को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम के दौरान जब उद्घाटन के लिए उनके सामने फीता लाया गया, तो उन्होंने देखा कि उस फीते के रंग तिरंगे जैसे थे। यह देखते ही उन्होंने तुरंत उसे काटने से मना कर दिया और कहा कि इसे नहीं काटा जा सकता।

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मुख्यमंत्री ने अपने उप मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी की ओर देखते हुए भी यही बात दोहराई, जिस पर उप मुख्यमंत्री ने भी सहमति जताई। इसके बाद दोनों नेताओं ने फीते को काटने की बजाय उसे सावधानीपूर्वक खोलने का सुझाव दिया। उन्होंने फीते को आयोजकों को वापस सौंपते हुए कहा कि इसे सम्मानपूर्वक रखा जाए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद देश भर में इसकी सराहना हो रही है।

इस घटना पर भारतीय जनता पार्टी ने भी उमर अब्दुल्ला के इस कदम की प्रशंसा की है। जम्मू-कश्मीर भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि उद्घाटन के लिए राष्ट्रीय ध्वज जैसे रंगों वाले फीते का उपयोग करना गंभीर लापरवाही और समझ की कमी को दर्शाता है। उन्होंने इस मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि जिन अधिकारियों ने इस प्रकार की व्यवस्था की, उनकी पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई न जाएं।

उधर, सोशल मीडिया पर भी उमर अब्दुल्ला की इस संवेदनशीलता की व्यापक सराहना हो रही है। लोग इसे एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं और मान रहे हैं कि यह घटना यह दर्शाती है कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान सभी के लिए सर्वोपरि होना चाहिए। राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्र के प्रति सम्मान में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। देखा जाये तो यह घटना न केवल एक नेता के व्यक्तिगत व्यवहार को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि समय के साथ सोच में परिवर्तन संभव है। उमर अब्दुल्ला का यह कदम देश के युवाओं और समाज के सभी वर्गों के लिए एक प्रेरणा है कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि देश की गरिमा और एकता का प्रतीक है।

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