• खफा-खफा सी हैं पंकजा मुंडे, क्या कर रहीं भाजपा छोड़ने की तैयारी ?

अंकित सिंह Jul 20, 2021 16:08

पंकजा मुंडे और प्रीतम मुंडे भाजपा के वरिष्ठ नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटियां हैं। भाजपा को महाराष्ट्र में स्थापित करने में गोपीनाथ मुंडे का अहम योगदान माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पंकजा मुंडे इसी विरासत की लड़ाई को आगे बढ़ाना चाहती हैं।

भाजपा की राष्ट्रीय सचिव और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रह चुकी पंकजा मुंडे इन दिनों पार्टी से खफा-खफा सी हैं। दरअसल, उनकी नाराजगी की वजह उनकी छोटी बहन और लोकसभा सांसद प्रीतम मुंडे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलना बताया जा रहा है। लेकिन सूत्र यह भी बता रहे हैं कि पंकजा महज इस बात से ही नाराज नहीं हैं। बल्कि और भी कुछ वजहें हैं। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि पंकजा मुंडे की नाराजगी केंद्रीय नेतृत्व से बिल्कुल भी नहीं है। वह प्रदेश नेतृत्व से नाराज हैं। आपको पता दें कि पंकजा मुंडे और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस के बीच लगातार नाराजगी की खबर आती रहती हैं।

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पंकजा मुंडे और प्रीतम मुंडे भाजपा के वरिष्ठ नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटियां हैं। भाजपा को महाराष्ट्र में स्थापित करने में गोपीनाथ मुंडे का अहम योगदान माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पंकजा मुंडे इसी विरासत की लड़ाई को आगे बढ़ाना चाहती हैं। गोपीनाथ मुंडे महाराष्ट्र के बड़े ओबीसी नेताओं में से एक थे। मुंडे परिवार वंजारी समुदाय से आता है। इसी वंजारी समुदाय से भाजपा ने एक और नेता को आगे कर दिया है। भाजपा की ओर से भागवत कराड को आगे कर यह संदेश दिया जा रहा है कि वह नई लीडरशिप को पैदा करना चाहती है। पंकजा की नाराजगी की वजह भी यही मानी जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पंकजा मुंडे को भाजपा की ओर से किनारे करने की कोशिश की जा रही है? हालांकि पंकजा मुंडे ने धर्मयुद्ध टालने की कोशिश करेंगी वाला बयान देकर राजनीतिक हलचल तो जरूर मचा दी है। माना जा रहा है कि पंकजा मुंडे पर समर्थकों की ओर से भारी दबाव है कि वह शिवसेना में शामिल हो जाएं। लेकिन फिलहाल पंकजा मुंडे अगले कदम को लेकर कुछ समय इंतजार जरूर करना चाहती हैं। 

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इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में हाल में हुए फेरबदल में अपनी बहन प्रीतम मुंडे को जगह नहीं मिलने और इसके विरोध में महाराष्ट्र के बीड से भारतीय जनता पार्टी के कई पदाधिकारियों के इस्तीफे के बीच पार्टी महासचिव पंकजा मुंड ने इस बात से इनकार किया कि वह दबाव बनाने की किसी तरकीब का इस्तेमाल कर रही है। साथ ही, कहा कि वह हमेशा ही ‘‘धर्मयुद्ध’’ टालने की कोशिश करेंगी। अपनी बहन के संसदीय क्षेत्र बीड जिले से और राज्य के अन्य भागों से मुंबई आए भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पंकजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा को अपना नेता बताते हुए उनकी सराहना की। पंकजा ने पौराणिक महाकाव्य महाभारत का हवाला देते हुए कहा कि पांडवों की उचित मांगों को कौरवों ने खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा, ‘‘पांडवों ने कौरवों से पांच गांव मांगे थे लेकिन इसे खारिज कर दिया गया, जिस कारण धर्मयुद्ध हुआ था।’’ उन्होंने मराठी में कहा, ‘‘...मैं उस स्थान पर तब तक काम करना चाहुंगी जब तक कि वहां राम है। यदि राम नहीं है तो मै सोंचूंगी कि क्या करना है?’’ उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा, ‘‘(महाभारत में) पांडवों ने कौरवों के साथ धर्मयुद्ध टालने की पूरी कोशिश की थी। अच्छा आदमी हमेशा ही इस तरह के युद्ध टालने की कोशिश करता है और जब तक संभव होगा मैं भी ऐसा करूंगी।’’ 

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पंकजा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कौरवों के कुछ साथी दिल से पांडवों के साथ जाना चाहते हैं। पंकजा, वंजारी समुदाय से आने वाले भाजपा के दिग्गज नेता रहे दिवंगत गोपीनाथ मुंडे की बेटी हैं। पंकजा ने यह भी कहा कि वह हमेशा ही अपने गढ़ की रक्षा करेंगी और इसे मजबूत करेंगी। पंकजा राज्य में 2014 से 2019 तक भाजपा नीत सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री रही थी। वह 2019 का विधानसभा चुनाव परली सीट पर अपने रिश्ते के भाई एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी उम्मीदवार धनंजय मुंडे से हार गई थी। पंकजा ने कहा, ‘‘मैं एक चुनाव हार गई लेकिन मैं खत्म नहीं हुई हूं। मैं यहां मेरे समर्थकों के चलते यहां खड़ी हूं। ’’