झारखंड Rajya Sabha चुनाव में Parimal Nathwani ने भरा पर्चा, BJP के समर्थन से जीत का दावा

रिलायंस इंडस्ट्रीज के निदेशक परिमल नथवानी ने भाजपा विधायकों के समर्थन से झारखंड राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है। मुकेश अंबानी के करीबी सहयोगी नथवानी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं, क्योंकि वे 2008 और 2014 में भी निर्दलीय सांसद रह चुके हैं और सभी दलों के समर्थन का दावा कर रहे हैं। यह नामांकन झारखंड की राजनीतिक समीकरणों में एक दिलचस्प मोड़ लाता है, खासकर जब भाजपा ने अभी तक आधिकारिक तौर पर समर्थन की घोषणा नहीं की है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के कॉर्पोरेट मामलों के निदेशक और उद्योगपति मुकेश अंबानी के करीबी सहयोगी और सलाहकार परिमल नथवानी ने भाजपा विधायकों के समर्थन से झारखंड राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया। जेएमएम उम्मीदवार बैद्यनाथ राम और कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा ने भी सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में अपना नामांकन दाखिल किया।
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नामांकन दाखिल करने के बाद नथवानी सीट जीतने को लेकर काफी आश्वस्त दिखे। उन्होंने कहा कि मैं पहले भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुका हूं और सीट जीत चुका हूं। सभी दलों के विधायक मेरा समर्थन करते रहे हैं और इस बार भी करेंगे। मुझे किसी पर दबाव डालने की जरूरत नहीं है और मुझे विश्वास है कि मैंने अतीत में जो काम किए हैं, उनके आधार पर मैं खुद ही जीत हासिल करूंगा। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि सभी दलों के विधायक उनके पक्ष में मतदान करेंगे, जिससे उनकी जीत सुनिश्चित होगी। 2014 में एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपनी जीत को याद करते हुए, नथवानी ने कहा कि यह उनके द्वारा किए गए काम का ही नतीजा था जिसने उन्हें जनादेश दिलाया, और उन्हें विश्वास है कि इस बार भी ऐसा ही होगा।
नथवानी ने कहा कि वे पहले 2008 और 2014 में झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और लगभग हर क्षेत्र में काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मैंने झारखंड को अपनी ‘कर्मभूमि’ बनाया है, इसलिए मैं कभी भी बाहरी नहीं रहा। अगर मुझे मौका मिला, तो मैं पहले से भी ज्यादा काम करूंगा। झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी परिमल नथवानी के झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके होने का जिक्र किया और जोर देकर कहा कि उनके पिछले कार्यों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
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हालांकि भाजपा ने परिमल नथवानी को अपना समर्थन दिया है, लेकिन अभी तक इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। मरांडी ने कहा कि वोटों की संख्या भले ही कम हो, लेकिन नथवानी के रिकॉर्ड पर ध्यान देना चाहिए, न कि सिर्फ संख्या पर।
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