Prabhasakshi NewsRoom: परम्परा और प्रगति की झलक के साथ शुरू हुआ संसद का बजट सत्र

Parliament budget session
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अभिभाषण में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की प्रगति का भी विशेष उल्लेख रहा। राष्ट्रपति ने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक यात्रा को ऐतिहासिक शुरुआत बताया और कहा कि आने वाले वर्षों में भारत अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

संसद भवन परिसर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का औपचारिक और भव्य स्वागत हुआ और उनके अभिभाषण के साथ बजट सत्र की शुरुआत हुई। धुंध भरी सुबह में छह घोड़ों द्वारा खींची जाने वाली पारंपरिक बग्घी से राष्ट्रपति का आगमन हुआ, जो भारतीय लोकतंत्र की गरिमा और परंपरा का सजीव चित्र था। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने गज द्वार पर उनका स्वागत किया। अश्वारोही अंगरक्षक दल और गार्ड ऑफ ऑनर ने इस अवसर को और औपचारिक बनाया।

राष्ट्रपति के आगमन से पहले पारंपरिक वेश में लोकसभा के वरिष्ठ मार्शल ने राजदंड को उसके स्थान से उठाया और ड्रम की थाप के बीच जुलूस के रूप में लोकसभा कक्ष तक ले जाया गया। यह दृश्य परंपरा और आधुनिक लोकतंत्र के संगम का प्रतीक बना। इसके बाद राष्ट्रपति ने लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित किया और देश की नीतिगत दिशा का व्यापक खाका प्रस्तुत किया।

अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति मुर्मू ने विकसित भारत के लक्ष्य को केंद्र में रखते हुए सरकार की उपलब्धियों और भावी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने विकसित भारत जी राम जी अधिनियम की सराहना करते हुए कहा कि इससे गांवों के विकास को नई गति मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और भ्रष्टाचार तथा लीकेज पर प्रभावी रोक लगेगी। इस कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित होने और किसान, पशुपालक तथा मछुआरों के लिए नई सुविधाएं विकसित होने की बात कही गई। इस उल्लेख के दौरान विपक्षी सदस्यों ने विरोध किया, लेकिन राष्ट्रपति ने शांत और दृढ़ स्वर में सरकार का पक्ष रखा।

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राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्र सरकार सच्चे सामाजिक न्याय के लिए समर्पित है और 'सबका साथ, सबका विकास' का दृष्टिकोण जमीन पर परिणाम दे रहा है। उन्होंने बताया कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से पौने सात लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे लोगों तक पहुंची है। बीते एक दशक में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर लाने और सामाजिक सुरक्षा के दायरे को 25 करोड़ से बढ़ाकर 95 करोड़ लोगों तक पहुंचाने को उन्होंने सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। उनके अनुसार पारदर्शिता और ईमानदारी ने प्रशासन को मजबूत बनाया है और विकास की हर पाई सही जगह खर्च हो रही है।

अभिभाषण में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की प्रगति का भी विशेष उल्लेख रहा। राष्ट्रपति ने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक यात्रा को ऐतिहासिक शुरुआत बताया और कहा कि आने वाले वर्षों में भारत अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गगनयान मिशन पर चल रहे कार्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।

भारतीय रेल की उपलब्धियों पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। असम के कामाख्या और पश्चिम बंगाल के हावड़ा के बीच शुरू हुई इस ट्रेन के साथ ही देशभर में 150 से अधिक वंदे भारत ट्रेनों का नेटवर्क बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल सौ प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य के बेहद करीब है और चिनाब पुल तथा पंबन पुल जैसे विश्व स्तरीय ढांचागत निर्माण भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रमाण हैं। दिल्ली से आइजोल तक सीधे रेल संपर्क का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे राष्ट्रीय एकता का सशक्त उदाहरण बताया।

देखा जाये तो राष्ट्रपति का अभिभाषण सरकार की प्राथमिकताओं और देश की दिशा का दर्पण होता है। इस बार का संबोधन परंपरा, विकास और आत्मविश्वास का संगम दिखा। संसद भवन में राजदंड के साथ हुआ स्वागत यह संकेत देता है कि आधुनिक भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजते हुए आगे बढ़ना चाहता है। यह दृश्य राजनीति से परे लोकतांत्रिक निरंतरता का प्रतीक बना। विकसित भारत जी राम जी अधिनियम पर राष्ट्रपति का जोर यह बताता है कि ग्रामीण भारत अब केवल सहायता का नहीं, बल्कि योजनाबद्ध विकास का केंद्र बनने जा रहा है। हालांकि विपक्ष का विरोध यह भी दर्शाता है कि नीतियों के क्रियान्वयन और पारदर्शिता पर निरंतर निगरानी जरूरी होगी। रोजगार, भ्रष्टाचार पर रोक और स्थानीय विकास जैसे वादे तभी सार्थक होंगे जब वे जमीन पर समान रूप से दिखें।

सामाजिक न्याय और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण पर दिए गए आंकड़े सरकार की नीयत और क्षमता दोनों का दावा करते हैं। परंतु आंकड़ों के साथ यह सवाल भी जुड़ा है कि क्या विकास की यह गति अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुंच रही है। गरीबी से बाहर निकले करोड़ों लोगों के जीवन की गुणवत्ता को लगातार बेहतर बनाना अगली कसौटी होगी। अंतरिक्ष और रेल जैसी उपलब्धियों का उल्लेख राष्ट्रीय गौरव को मजबूत करता है। शुभांशु शुक्ला की यात्रा और वंदे भारत ट्रेनों का विस्तार यह संकेत देता है कि भारत अब महत्वाकांक्षी लक्ष्यों से नहीं डरता। चुनौती यह है कि इस आत्मविश्वास को समावेशी विकास में बदला जाए, ताकि तकनीकी प्रगति और आधारभूत ढांचा आम नागरिक के जीवन को सीधे बेहतर बना सके।

कुल मिलाकर राष्ट्रपति का अभिभाषण उम्मीद और प्रश्न दोनों छोड़ता है। उम्मीद इस बात की कि देश मजबूत नींव पर आगे बढ़ रहा है और प्रश्न इस बात के कि क्या यह यात्रा सभी को साथ लेकर चल पाएगी? हालांकि देखा जाये तो लोकतंत्र की खूबसूरती भी यही है कि वह उम्मीद और सवाल दोनों को साथ लेकर चलता है।

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